दिपावली की रात जब पूरा आकाश दीपों की रोशनी से जगमगाता है, तो हर घर में एक ही संकल्प जलता है कि अंधकार पर प्रकाश की जीत होगी।लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हम सिर्फ मोमबत्तियां क्यों नहीं जलाते, और मिट्टी के दीये को इतना पवित्र क्यों माना जाता है?

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ज्योतिष डॉ मधु कोटिया, आध्यात्मिक उपचारक और परंपरा दोनों मानते हैं कि दीया सिर्फ रोशनी का साधन नहीं, बल्कि जीवन का प्रतीक माना गया है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

दीये का असली अर्थ

एक छोटा-सा मिट्टी का दीया देखने में साधारण लगता है। मिट्टी का प्याला, रूई की बत्ती और थोड़ा-सा तेल या घी। लेकिन इसका अर्थ उतना ही गहरा है जितनी इसकी लौ की चमक।

संध्या के समय जब पहला दीया जलाया जाता है, तो वह क्षण बहुत खास होता है, इस समय दिन और रात एक-दूसरे से मिलते हैं। यह हमें याद दिलाता है कि प्रकाश का अर्थ अंधकार को मिटाना नहीं, बल्कि उसमें राह ढूंढना है। दीया अंधकार को खत्म नहीं करता, वह सिखाता है कि उसमें भी कैसे देखा जाए।

दीये के हर हिस्से का एक अर्थ है

  • मिट्टी का प्याला – धरती और विनम्रता का प्रतीक है। यह कहता है, “अपने इरादों को सच्चाई की जमीन पर रखो।”
  • तेल या घी -हमारी मेहनत और कर्म हैं। जो भी हम रोज करते हैं, प्रार्थना, काम, सेवा। वही इसका ईंधन है।
  • रूई की बत्ती – हमारा ध्यान और एकाग्रता है। पतली, नाज़ुक, लेकिन जब संभाली जाए तो अग्नि को संभाल लेती है।
  • लौ – यह चेतना और ज्ञान का प्रतीक है। जब बाकी सब संतुलन में हों, तभी यह लौ बिना जलाए सबको गरमाहट देती है।

दीया एक जिम्मेदारी भी सिखाता है

दीया बिजली की रोशनी की तरह स्वतः नहीं जलता। उसे हमें अपनी देखभाल, धैर्य और श्रद्धा से जलाए रखना होता है। जैसे दीए की लौ को हवा से बचाना पड़ता है, वैसे ही समृद्धि और संबंधों की लौ को भी संभालना पड़ता है।सफलता सिर्फ मिलने से नहीं आती, उसे संभालना और निभाना भी उतना ही जरूरी है।

दीया जहां रखो, वही उसका अर्थ बदल जाता है

  • दहलीज पर रखा दीया – स्वागत और सौभाग्य का प्रतीक है।
  • मंदिर या पूजा स्थान पर रखा दीया – भक्ति का प्रतीक बन जाता है।
  • खिड़की पर रखा दीया – किसी लौटते हुए व्यक्ति के लिए आशा और मार्गदर्शन का प्रतीक है।

दीया हमें खुद से जोड़ता है

अगर आप ध्यान से देखें तो जब मन अशांत होता है, दीए की लौ भी हिलने लगती है और जब मन शांत होता है, लौ भी स्थिर हो जाती है।
यह हमें याद दिलाती है कि हमारी आंतरिक शांति ही बाहरी स्थिरता बनाती है।
दो दीए साथ जलें तो एक-दूसरे की रोशनी बढ़ जाती है।

दिवाली के दिन ही नहीं, बल्कि रोज शाम को एक दीया जलाना भी शुभ माना जाता है। दीया सिखाता है कि भावना बदलते ही अर्थ भी बदल जाता है।

दीया एक वादा है

दीया सिर्फ अंधकार को मिटाने का नहीं, बल्कि दूसरों के लिए प्रकाश बनने का वादा है।
उसकी लौ हमें सिखाती है कि हम हवा में भी स्थिर रहें, खुद जलें पर दूसरों को रोशनी दें, और जब तेल कम हो जाए, तो कृतज्ञता और हिम्मत से खुद को फिर से भर लें।

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इस दिवाली, जब आप दीया जलाएं, तो उसे सिर्फ परंपरा न समझें। यह आपके भीतर की रोशनी का प्रतीक है। वह जो राह दिखाती है, गर्माहट देती है, और जीवन को सुंदर बनाती है।✧ धार्मिक और अध्यात्मिक

घरों और मंदिरों में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाएगी।

पटाखों की अनुमति

इस बार सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में सीमित शर्तों के साथ पटाखों की बिक्री और फोड़ने की अनुमति दी है। यह त्योहार केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बसे भारतीयों द्वारा धूमधाम से मनाया जाता है।

भारत के अलावा अन्य देशों में दीवाली

भारत के अलावा इन देशों में भी मनाई जाती है दीवाली

भारत में यह पर्व पांच दिनों तक चलता है, जिसमें धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज शामिल हैं। नेपाल में इसे तिहार कहा जाता है। इसके अलावा, श्रीलंका, मॉरीशस, सिंगापुर, मलेशिया, फिजी, त्रिनिदाद और टोबैगो, गुयाना, ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में भी भारतीय समुदाय इस त्योहार को बड़े उत्साह के साथ मनाता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

इस वर्ष दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त संध्या 7:08 बजे से 8:18 बजे तक है। प्रदोष काल का शुभ समय शाम 5:46 बजे से रात 8:18 बजे तक रहेगा। वृषभ काल में पूजा का समय शाम 7:08 बजे से रात 9:03 बजे तक है। निशिता काल में देवी लक्ष्मी की पूजा रात 11:41 बजे से 12:31 बजे तक की जा सकती है।

  • पूजा की विधि:

पूजा से पहले घर की सफाई करें और पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की नई प्रतिमा स्थापित करें। ध्यान रखें कि गणेश जी को लक्ष्मी जी के दाईं ओर रखें। घर के मुख्य द्वार पर दीये जलाएं और कलश स्थापित करें। पूजा में चावल, हल्दी, मिठाई और दीप जलाकर आराधना करें।

हिमाचल प्रदेश में बसों का संचालन

हिमाचल में शाम के बाद नहीं चलेंगी बसें

दीवाली के दिन हिमाचल प्रदेश में शाम 5 बजे के बाद एचआरटीसी की बसें लोकल रूटों पर नहीं चलेंगी। यह निर्णय सुरक्षा और ट्रैफिक नियंत्रण के मद्देनजर लिया गया है। निजी बसों की आवाजाही भी शाम 7 बजे के बाद रोक दी जाएगी, ताकि ड्राइवर और कंडक्टर भी अपने परिवार के साथ त्योहार मना सकें।

उल्लू की बलि पर रोक

दीपावली पर अंधविश्वास के चलते उल्लुओं की बलि देने की घटनाओं को रोकने के लिए उत्तराखंड के कार्बेट टाइगर रिजर्व और तराई पश्चिमी वन प्रभाग में निगरानी बढ़ा दी गई है। वन विभाग की टीम को गश्त तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। ध्यान रहे कि उल्लू भारतीय वन्यजीव अधिनियम 1972 की अनुसूची एक के तहत संरक्षित पक्षी है। इसके शिकार पर तीन साल की सजा का प्रावधान है।

पूजा के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें

पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

दीवाली की पूजा में स्नान के बाद शुद्ध सफेद वस्त्र पहनें। चौकी पर लक्ष्मी, गणेश और कुबेर की मूर्ति रखें और मौली बांधें। छह चौमुखे और 26 छोटे दीपक जलाएं। देवताओं को गंगाजल से स्नान कराने के बाद रोली, अक्षत, मिष्ठान, मेवा और धूप अर्पित करें।

स्पेशल ट्रेनों की स्थिति

स्पेशल ट्रेनों में सीटें खाली

दीवाली के मौके पर घर लौटने वाले यात्रियों की संख्या में तेजी आई है। रेलवे ने इस बार अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं, लेकिन कई स्पेशल ट्रेनों में सीटें खाली हैं। वहीं नियमित ट्रेनों में अगले एक माह तक सभी सीटें फुल हैं। यात्रियों की प्राथमिकता अब भी नियमित ट्रेनों को ही मिल रही है।

दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति

दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण और GRAP-2 लागू

दीवाली से पहले दिल्ली में प्रदूषण स्तर बढ़ने लगा है। इसी को देखते हुए ग्रैप का दूसरा चरण लागू कर दिया गया है। रविवार शाम से लागू इस चरण के तहत निर्माण कार्यों और डीजल जेनरेटर के उपयोग पर नियंत्रण लगाया गया है। आईएमडी के अनुसार दिल्ली का AQI शाम 7 बजे 302 तक पहुंच गया। विशेषज्ञों ने आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता के और बिगड़ने की आशंका जताई है।


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