

रुद्रपुर के आवास विकास पुलिस चौकी परिसर में शुक्रवार को उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब भाजपा नेता राधेश शर्मा और सौरभ बहेड़ (तिलक राज बहेड़ परिवार से जुड़ा पक्ष) आमने-सामने आ गए। देखते-देखते चौकी के बाहर समर्थकों की भीड़ जुट गई और नारेबाजी शुरू हो गई। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उकसावे, दबाव बनाने और आक्रमण की कोशिश जैसे गंभीर आरोप लगा रहे हैं, जिससे शहर की सियासत में हलचल मच गई है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड)
आवास विकास पुलिस चौकी उस समय तनावपूर्ण हो गई जब वार्ड नंबर 39 के पार्षद सौरभ बहेड़ और राधेश शर्मा अपने-अपने समर्थकों के साथ आमने-सामने आ गए। किसी पुराने विवाद को लेकर दोनों पक्ष चौकी पहुंचे, जहां बातचीत जल्द ही आरोप-प्रत्यारोप के आक्रामक दौर में बदल गई। दोनों ओर से ऊंची आवाज़ में एक-दूसरे पर दबाव बनाने और गलत आरोप लगाने की बातें होती रहीं। समर्थकों की मौजूदगी से माहौल और गरम हो गया और टकराव की स्थिति बन गई। पुलिस ने बीच-बचाव कर दोनों पक्षों को अलग-अलग कर स्थिति को नियंत्रण में लिया।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के मुताबिक, विवाद की जड़ स्थानीय प्रभाव, पुराने मतभेद और हालिया घटनाक्रम हैं। शुक्रवार को किसी शिकायत/पूछताछ के सिलसिले में दोनों पक्षों का चौकी पर आमना-सामना हुआ। इसके बाद माहौल गरमाया और समर्थक सड़कों पर उतर आए। “भारतीय जनता पार्टी जिंदाबाद” के नारे लगे, वहीं दूसरे पक्ष ने भी अपने आरोपों को मुखरता से रखा।
दोनों पक्षों के आरोप
राधेश शर्मा पक्ष का कहना है कि उन पर झूठे आरोप लगाकर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है और राजनीतिक छवि धूमिल करने का प्रयास है।
सौरभ बहेड़ पक्ष का दावा है कि उनके साथ अन्याय हुआ है और वे धमकी व दखल की शिकायत लेकर चौकी पहुंचे थे।
क्या कोई घटना हुई?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बनने से पहले ही पुलिस ने हस्तक्षेप कर लिया। किसी बड़े नुकसान या चोट की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आक्रमण की कोशिश का आरोप दोहरा रहे हैं, जिसकी जांच की बात पुलिस कह रही है।
पुलिस का रुख
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है। सभी पक्षों की शिकायतें दर्ज की जा रही हैं और सीसीटीवी फुटेज व बयान के आधार पर तथ्यों की पड़ताल होगी। कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
सियासी संदेश और चर्चा
इस घटनाक्रम के बाद राधेश शर्मा चर्चा के केंद्र में हैं। समर्थक इसे राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन बता रहे हैं, तो विरोधी इसे दबाव की राजनीति करार दे रहे हैं। साफ है कि मामला केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि स्थानीय राजनीति की गर्मी भी इसमें शामिल है।
सत्य क्या है—यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल, आवास विकास चौकी पर हुआ यह टकराव रुद्रपुर की राजनीति में नई बहस छेड़ चुका है। प्रशासन की अगली कार्रवाई और निष्पक्ष जांच ही इस विवाद का अंतिम सच सामने
आवास विकास चौकी का हालिया घटनाक्रम यह दर्शाता है कि अब यह स्थान न्याय और सुरक्षा के बजाय शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बनता जा रहा है। जनप्रतिनिधियों द्वारा चौकी परिसर में ही आक्रामक तेवर दिखाना, छाती ठोककर चुनौती देना और खुलेआम धमकी भरे शब्दों का प्रयोग करना कानून की गरिमा को ठेस पहुँचाता है। पुलिस चौकी वह स्थान होती है जहाँ आम नागरिक न्याय और संरक्षण की उम्मीद लेकर आता है, न कि राजनीतिक रौब और दबाव देखने के लिए। यदि चौकियाँ प्रभावशाली लोगों के शक्ति प्रदर्शन का मंच बनेंगी, तो आम जनता का कानून और व्यवस्था से भरोसा धीरे-धीरे कमजोर होता चला जाएगा।




