नशा मुक्ति और मूल निवास के संकल्प के साथ उत्तरकाशी से सकारात्मक पहल की शुरुआत

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उत्तरकाशी।उत्तराखंड की मूल भावना—संस्कृति, स्वाभिमान और स्वस्थ समाज—को सशक्त करने की दिशा में एक सराहनीय पहल सामने आई है। उत्तरकाशी जनपद के ब्लॉक चिन्यालीसौड़ के बादसी गांव से नशा मुक्ति अभियान और मूल निवास नीति को लागू करने की मांग के साथ जागरूकता की शुरुआत की गई है।
इस अभियान की अगुवाई बिजेंद्र जगूड़ी, अध्यक्ष मूल निवास संगठन, उत्तरकाशी, द्वारा की गई। उन्होंने ग्रामीणों और युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि नशा उत्तराखंड के भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बनता जा रहा है। यदि समय रहते समाज ने सामूहिक प्रयास नहीं किए, तो इसका दुष्प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर गहरा पड़ेगा।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने नशा मुक्ति के संदर्भ में एकजुट होकर सकारात्मक आह्वान किया और गांव-गांव तक जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह एक स्वस्थ, संस्कारित और स्वावलंबी समाज के निर्माण का सपना था। उस परिकल्पना को साकार करने के लिए नशा मुक्त उत्तराखंड और मूल निवास जैसे मुद्दों पर गंभीरता से काम करना आवश्यक है।
बिजेंद्र जगूड़ी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मूल निवास नीति लागू होने से न केवल स्थानीय लोगों के अधिकार सुरक्षित होंगे, बल्कि रोजगार, संसाधनों और पहचान पर बाहरी दबाव भी कम होगा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे नशे से दूर रहकर उत्तराखंड की संस्कृति, भाषा और सामाजिक मूल्यों के संरक्षण में आगे आएं।
इस पहल को गांव के बुजुर्गों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन मिला। लोगों ने इसे उत्तराखंड राज्य आंदोलन की मूल भावना से जुड़ा कदम बताते हुए कहा कि ऐसी जागरूकता ही राज्य को सही दिशा दे सकती है।
बादसी गांव से शुरू हुई यह पहल अब क्षेत्र के अन्य गांवों तक पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है, ताकि नशा मुक्त, स्वाभिमानी और मूल निवास आधारित उत्तराखंड के सपने को जमीन पर उतारा जा सके।


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