6 सदस्यों वाली इस कमेटी में टेक्नोलॉजी, स्पेस, सिक्योरिटी, शिक्षा, एकेडमिक्स और लॉजिस्टिक्स के एक्सपर्ट शामिल हैं, जो सरकारी परीक्षाओं में स्ट्रक्चरल और टेक्नोलॉजी पर आधारित सुधारों के लिए सुझाव देंगे। आइए आपको बताते हैं कि आखिर ये ये 6 लोग हैं कौन, जिन्हें परीक्षा सुधार टास्क फोर्स में शामिल किया गया है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
नंदन नीलेकणिजन्म 2 जून 1955 को बेंगलुरु (कर्नाटक) में हुआ था। हालांकि, परिवार मूल रूप से कर्नाटक के ही सिरसी का रहने वाला है। उन्होंने IIT बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में B.Tech. करने से पहले बिशप कॉटन बॉयज स्कूल (बेंगलुरु) और सेंट जोसेफ हाई स्कूल (धारवाड़) में पढ़ाई की। टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योर और इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि इस टास्क फोर्स की अध्यक्षता करेंगे।
भारत के आधार डिजिटल पहचान कार्यक्रम के आर्किटेक्ट माने जाने वाले नीलेकणि से उम्मीद है कि वे परीक्षाओं को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और कुशल बनाने के लिए एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर पैनल की सिफारिशों की अगुवाई करेंगे। सरकार ने पैनल को ऐसे डिजिटल समाधानों की जांच करने का काम सौंपा है, जो परीक्षा प्रक्रिया के हर चरण को मजबूत कर सकें, जैसे कि प्रश्न पत्र की सुरक्षा से लेकर उम्मीदवार के वेरिफिकेशन और रिजल्ट प्रोसेसिंग तक।
एस. सोमनाथउनका जन्म 1963 में केरल के अलाप्पुझा जिले के थुरावर में हुआ। कोल्लम के टीकेएम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक, बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में एमटेक और बाद में IIT मद्रास से PhD की डिग्री हासिल की। डॉ. एस. सोमनाथ ने 2022 से 2025 तक ISRO के चेयरमैन और डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस के सेक्रेटरी के तौर पर काम किया। लगभग 40 साल के अनुभव वाले एक जाने-माने स्पेस साइंटिस्ट के तौर पर वे लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी और स्पेस सिस्टम इंजीनियरिंग में अपने योगदान के लिए मशहूर हैं।
तपन डेकाजन्म 25 फरवरी 1963 को असम के बारपेटा जिले के सार्थेबारी में हुआ था। 1988 बैच की इंडियन पुलिस सर्विस (IPS) में शामिल होने से पहले उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में मास्टर डिग्री पूरी की। हिमाचल प्रदेश कैडर के 1988 बैच के IPS अधिकारी तपन कुमार डेका ने जून 2022 से जून 2026 तक इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर के तौर पर काम किया। केंद्र सरकार ने दो बार उनका कार्यकाल बढ़ाया। एक अनुभवी इंटेलिजेंस अधिकारी के तौर पर उन्होंने आतंकवाद-रोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाई। उनके प्रमुख अभियानों में 26/11 मुंबई हमले, इंडियन मुजाहिदीन के खिलाफ कार्रवाई और जम्मू-कश्मीर व पूर्वोत्तर में सुरक्षा अभियान शामिल हैं।
वी. कामाकोटी1968 में तमिलनाडु के चेन्नई में जन्मे वी. कामाकोटी ने श्री वेंकटेश्वर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (मद्रास यूनिवर्सिटी) से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में B.E. की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने IIT मद्रास से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में M.S. (रिसर्च) और Ph.D. किया। IIT मद्रास के डायरेक्टर वी. कामाकोटी इस टास्क फ़ोर्स में एकेडमिक और रिसर्च कम्युनिटी का प्रतिनिधित्व करेंगे।
जनवरी 2022 से IIT मद्रास के डायरेक्टर प्रो. वी. कामाकोटी एक कंप्यूटर साइंटिस्ट हैं, जो कंप्यूटर आर्किटेक्चर, इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी और VLSI डिजाइन में माहिर हैं। वे माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट और साइबर सिक्योरिटी से जुड़े अहम राष्ट्रीय प्रोग्राम्स का नेतृत्व करते हैं। नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य हैं और कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्ट्री की ओर से बनाई गई AI टास्क फोर्स के चेयरमैन भी रह चुके हैं।
अनीता करवालदिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज से पढ़ाई की। सिविल सर्विस में आने से पहले उन्होंने इकोनॉमिक्स की पढ़ाई की थी। गुजरात कैडर की 1988 बैच की IAS अधिकारी अनीता करवाल के पास पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में 36 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें स्कूली शिक्षा पर खास ध्यान दिया गया है। उन्होंने CBSE की चेयरपर्सन (2017-2021) और बाद में स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग की सेक्रेटरी के तौर पर काम किया। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।
अमृत लाल मीणाराजस्थान (1965) में जन्मे अमृत लाल मीणा, बिहार कैडर के 1989 बैच के IAS अधिकारी हैं। IAS बनने से पहले उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा पूरी की थी। मीणा के पास 36 साल से ज्यादा का प्रशासनिक अनुभव है, जिसमें बिहार में 25 साल और भारत सरकार के साथ 11 साल का अनुभव शामिल है। उन्होंने बिहार के मुख्य सचिव (2024-2025) और कोयला मंत्रालय के सचिव (2022-2024) के रूप में काम किया है, और प्रशासन तथा लॉजिस्टिक्स में अपनी विशेषज्ञता के लिए व्यापक रूप से जाने जाते हैं।
क्यों बनाया गया है पैनल?प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुताबिक मल्टी-डिसिप्लिनरी टास्क फोर्स भारत की परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाने के तरीकों की जांच करेगी। इसकी सिफारिशें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को मजबूत करने और ढांचागत बदलावों व तकनीक के अधिक इस्तेमाल के जरिए प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को बेहतर बनाने पर केंद्रित होंगी।
