प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की तीन सदस्यीय चयन समिति की बैठक में बुधवार को नया मुख्य सूचना आयुक्त (CIC), सूचना आयुक्त (ICs) और एक विजिलेंस कमिश्नर चुनने पर विचार हुआ।

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बैठक के दौरान राहुल गांधी ने अपनी सहमति तीव्र तरीके से दर्ज कराई। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि शॉर्टलिस्ट की गई सूची में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और अल्पसंख्यक समुदायों का प्रतिनिधित्व लगभग न के बराबर है।

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा है कि राहुल गांधी ने कई सप्ताह पहले सरकार से आवेदकों की जातीय संरचना उपलब्ध कराने को कहा था। बुधवार को यह विवरण दिया गया। लिस्ट में केवल 7% आवेदक ही पिछड़े समुदायों से थे और शॉर्टलिस्ट में सिर्फ एक उम्मीदवार ऐसे समुदाय से था। राहुल ने इस मुद्दे को बैठक में गंभीरता से उठाया और विस्तृत रूप से असहमति नोट भी सौंपा।

राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार सूचना का अधिकार (RTI) कानून को कमजोर कर रही है। उनके अनुसार, शॉर्टलिस्ट में शामिल कुछ उम्मीदवारों का अपने पिछले कार्यकाल में पारदर्शिता का रिकॉर्ड संतोषजनक नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक और स्वायत्त संस्थाओं में नियुक्तियों के दौरान SC, ST, OBC, EBC और अल्पसंख्यक समुदायों को व्यवस्थित रूप से बाहर रखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, राहुल की आपत्ति के बाद सीमित आवेदक समूह में उपलब्ध योग्य उम्मीदवारों में से कुछ नियुक्तियां करने पर सहमति बनी।

इस बैठक से एक दिन पहले राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा था कि चयन पैनल की बैठकों में विपक्ष का कोई प्रभाव नहीं होता। उन्होंने कहा, “एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह होते हैं, दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष। मेरी उस कमरे में कोई आवाज नहीं। जो वे तय करते हैं वही होता है।” उन्होंने यह टिप्पणी CEC और EC की नियुक्ति प्रक्रिया के संदर्भ में की, जिसका चयन ढांचा CIC और CVC की तरह ही है।

मुख्य सूचना आयुक्त का पद 13 सितंबर से खाली है, जब तत्कालीन CIC हीरालाल समारिया (जो दलित समुदाय से थे) रिटायर हुए। सूचना आयोग में 10 सूचना आयुक्त तक हो सकते हैं, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 2 ही कार्यरत हैं। आठ पद वर्षों से खाली हैं।

आपको बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने CIC की नियुक्ति प्रक्रिया का विरोध किया हो। 2023 में समारिया की नियुक्ति के दौरान भी विपक्षी सदस्य अधीर रंजन चौधरी ने कहा था कि सरकार ने उनसे न तो परामर्श किया और न ही जानकारी दी। 2020 में उन्होंने पूर्व IFS अधिकारी यशवर्धन कुमार सिन्हा को CIC और पत्रकार उदय महूरकर को सूचना आयुक्त बनाए जाने का विरोध किया था, लेकिन उनकी आपत्ति के बावजूद दोनों नियुक्ति कर दिए गए थे।


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