

हरिद्वार, संवाददाता।केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की प्रयोगशाला जांच में उत्तराखंड में निर्मित 40 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं। इनमें से 32 सैंपल हरिद्वार स्थित 13 फार्मा कंपनियों के हैं। जांच में सामने आया है कि ये दवाएं निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं, जिससे मरीजों की सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
जांच रिपोर्ट के अनुसार हरिद्वार की एक प्रमुख फार्मा कंपनी के कैल्शियम फॉस्फेट और विटामिन डी-3 सस्पेंशन के 16 बैच मानकों में फेल पाए गए हैं। चिंताजनक पहलू यह है कि इस कंपनी की दवाओं की आपूर्ति सरकारी अस्पतालों में भी की जाती रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माण प्रक्रिया में लापरवाही, गुणवत्ता नियंत्रण में कमी और मानकों की अनदेखी के कारण दवाएं फेल होती हैं। ऐसी दवाएं इलाज के बजाय मरीजों की स्थिति को और बिगाड़ सकती हैं। गंभीर मामलों में इससे जान का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है।
जांच में फेल पाई गई दवाओं में छाती के संक्रमण, टाइप-2 मधुमेह, गर्भावस्था में मधुमेह, एसिडिटी व पाचन संबंधी रोग, आंखों की एलर्जी, सर्दी-खांसी, बुखार, श्वसन एलर्जी, बैक्टीरियल इंफेक्शन, अवसाद और दर्द के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं।
औषधि निरीक्षक अनिता भारती ने बताया कि जिन कंपनियों की दवाएं जांच में फेल हुई हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से संबंधित दवाओं का उत्पादन रोकने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि सरकारी अस्पतालों में इन दवाओं की कितनी मात्रा सप्लाई की गई थी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले में गहन जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और दवा उद्योग की सख्त निगरानी की मांग की है, ताकि भविष्य में मरीजों की जान के साथ कोई खिलवाड़ न हो।




