

आध्यात्मिक दृष्टि
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ऋषिकेश केवल एक भौगोलिक तीर्थ नहीं, बल्कि आत्मसंयम और साधना की जीवंत परंपरा का प्रतीक है। कहा जाता है कि ऋषि रैभ्य की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु यहाँ ‘ऋषिकेश’—अर्थात इंद्रियों के स्वामी—के रूप में प्रकट हुए। यही कारण है कि यह भूमि योग, साधना और वैराग्य की चेतना से जुड़ी मानी जाती है। ऋषिकेश का आध्यात्मिक महत्व आज भी उतना ही प्रासंगिक है, क्योंकि यह मनुष्य को भोग से योग और विक्षेप से आत्मबोध की ओर ले जाने का संदेश देता है। आधुनिक जीवन की आपाधापी में ऋषिकेश की यह पौराणिक चेतना आत्मसंयम और संतुलन की प्रेरणा बनकर उभरती है।





