

संपादकीय :रुद्रपुर की सरज़मीं एक ऐतिहासिक क्षण की दहलीज़ पर खड़ी है। आगामी 4 दिसंबर को पंडित राम सुमेर शुक्ल स्मृति राजकीय मेडिकल कॉलेज में आयोजित होने वाला पंडित रामसुमेर शुक्ल स्मृति समारोह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि तराई की अस्मिता, गौरव और संघर्षपूर्ण इतिहास को नमन करने का अवसर है। आज अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय और कार्यक्रम संयोजक व पूर्व विधायक राजेश शुक्ला द्वारा कार्यक्रम स्थल पर की गई समीक्षा न केवल व्यवस्थाओं की औपचारिकता थी, बल्कि यह सुनिश्चित करने का प्रयास भी था कि आयोजन की गरिमा कोई कमी नहीं रहने पाए।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
निरीक्षण के दौरान बैठने की व्यवस्था, मंच, पार्किंग, सुरक्षा और आमजन की सुविधाओं पर जिस सूक्ष्म दृष्टि से ध्यान दिया गया, वह इस बात का संकेत है कि समारोह सिर्फ भव्यता के लिए नहीं बल्कि जनसहभागिता और सांस्कृतिक सम्मान के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने सही कहा कि तराई के संस्थापक एवं महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित रामसुमेर शुक्ल की पुण्यतिथि पर होने वाला यह स्मरणोत्सव ऐतिहासिक होगा—क्योंकि इतिहास वही जीवित रहता है जिसे समाज याद रखने का संकल्प ले।
समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं को मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया जाना न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देगा कि राष्ट्र और प्रदेश के विकास में योगदान देने वाला हर छोटा-बड़ा प्रयास मान-सम्मान का अधिकारी है। प्रशासन और आयोजकों की समन्वित तैयारियों से साफ दिखता है कि यह आयोजन पंडित रामसुमेर शुक्ल के संघर्ष, त्याग और राष्ट्रभक्ति की विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम बनने जा रहा है।
इस निरीक्षण के दौरान नारायणपुर सोसायटी अध्यक्ष नरेंद्र ठुकराल, मंडल अध्यक्ष मयंक तिवारी, नगर पालिका अध्यक्ष नगला सचिन शुक्ला, नीरज खग्गर, मनोज पन्नू और डॉ. मनोज तिवारी की मौजूदगी भी बताती है कि यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज और संगठन की सामूहिक भागीदारी का प्रतीक है।
आज आवश्यकता केवल एक समारोह की नहीं, बल्कि उस विचारधारा को पुनर्जीवित करने की है जिसके लिए पंडित रामसुमेर शुक्ल ने अपना जीवन समर्पित किया था—निजी स्वार्थों से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के लिए काम करना। यदि यह आयोजन लोगों को उस सोच और मूल्यों की ओर वापस ले जाने में सफल होता है, तो इससे बड़ी श्रद्धांजलि और क्या हो सकती है?




