

आज जब आधुनिकता की अंधी दौड़ में शिक्षा के मायने सिर्फ रोजगार और प्रतिस्पर्धा तक सीमित होते जा रहे हैं, ऐसे समय में उत्तराखंड संस्कृत अकादमी हरिद्वार द्वारा आयोजित खंड स्तरीय संस्कृत प्रतियोगिता यह बताती है कि सांस्कृतिक मूल्यों और भाषाई विरासत को लेकर पर्वतीय समाज आज भी संवेदनशील, जागरूक और प्रतिबद्ध है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
दिनांक 14–15 नवम्बर 2025 को रा०इ०का गंगानगर, मोतियापाथर, अल्मोड़ा में जब द्वीप प्रज्ज्वलित हुए, तो यह सिर्फ कार्यक्रम का शुभारंभ नहीं था, बल्कि संस्कृत और भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान की घोषणा समान था।
मुख्य अतिथि ब्लॉक प्रमुख लमगड़ा श्री त्रिलोक सिंह रावत ने संस्कृत भाषा को केवल एक विषय नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता की रीढ़ बताया। वहीं खंड शिक्षा अधिकारी सुश्री प्रेमा बिष्ट ने संस्कृत की वैज्ञानिकता को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि यह भाषा ज्ञान, तत्त्व और मनोविज्ञान की दृष्टि से आज भी विश्व की अग्रणी भाषाओं में से एक है।
विद्यालय की प्रधानाचार्य श्रीमती पूनम तिवारी और प्रतियोगिता के खंड संयोजक श्री संजय दत्त भट्ट ने अतिथियों का स्वागत कर यह संदेश दिया कि शैक्षिक संस्थानों की भूमिका सिर्फ पुस्तकीय ज्ञान देना नहीं, बल्कि मूल्यों और चरित्र निर्माण की भूमि तैयार करना भी है।
परिणाम गौरव की कहानी कह रहे
दोनों दिवसों की प्रतियोगिताओं ने यह प्रमाणित किया कि कुमार्यावस्था से ही संस्कृत के प्रति बढ़ता रुझान भविष्य में सांस्कृतिक सुरक्षा का सबसे सशक्त आधार बनेगा।
कनिष्ठ वर्ग (पहला दिन – 14/11/25)
प्रतियोगिता प्रथम स्थान समूह नृत्य रा.बा.इ.का. जलना वाद–विवाद रा.बा.इ.का. जलना आशु भाषण रा.बा.इ.का. जलना श्लोकोच्चारण रा.इ.का गंगानगर संस्कृत नाटक सर्वो.इ.का. जयंती समूह गान श्री कल्याणिका संस्कृत विद्यालय डोल
वरिष्ठ वर्ग (दूसरा दिन – 15/11/25)
प्रतियोगिता प्रथम स्थान समूह गान श्री कल्याणिका संस्कृत विद्यालय डोल आश्रम समूह नृत्य रा.बा.इ.का. जयंती श्लोकोच्चारण श्री कल्याणिका संस्कृत विद्यालय डोल आश्रम वाद–विवाद रा.इ.का गंगानगर आशु भाषण रा.बा.इ.का. जलना
प्रतियोगिता संचालन श्री संजय दत्त भट्ट एवं श्री प्रकाश चंद्र उप्रेती ने सावधानी और शुचिता के साथ किया।
समापन के दौरान ब्लॉक प्रमुख धारी सुश्री भावना आर्या सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, पंचायत सदस्य, रा.शिक्षक संघ पदाधिकारी, शिक्षक–शिक्षिकाएं एवं निर्णायक मंडल की गरिमामयी उपस्थिति कार्यक्रम की प्रतिष्ठा का परिचायक रही।
एक संपादकीय दृष्टि – संस्कृत का पुनर्जागरण शिक्षा नहीं, राष्ट्रीय आवश्यकता
यह केवल उत्सव नहीं था — यह संस्कृत के पुनर्जागरण की जन घोषणा थी।
संस्कृत भाषा का इतिहास जितना प्राचीन है, उसका भविष्य उतना ही उज्ज्वल बनाया जा सकता है, यदि समाज और शिक्षा जगत मिलकर निरंतर प्रयास करें। इस प्रतियोगिता ने साबित कर दिया कि अगर संस्थान आगे आते हैं, और सरकार–समाज सहयोग करें, तो बच्चे भाषा नहीं, पूरी सभ्यता सीखते हैं।
आज आवश्यकता है — ✓ संस्कृत को तकनीक और नवाचार से जोड़ा जाए
✓ विद्यालय स्तर से विश्वविद्यालय तक इसे करियर–उन्मुख बनाया जाए
✓ संस्कृति और भाषा के प्रति गर्व को शिक्षा नीति में संरक्षित किया जाए
यह आयोजन हमें यह विश्वास दिलाता है कि यदि भाषा जीवित रहेगी तो संस्कार, संस्कृति, समाज और राष्ट्र—सब सुरक्षित रहेंगे।
गंगानगर मोतियापाथर के इस आयोजन से संस्कृत की लौ फिर से प्रज्वलित हुई है — अब जिम्मेदारी हम सबकी है कि यह लौ बुझने न पाए।




