

रुद्रपुर (उधम सिंह नगर)।रुद्रपुर के रम्पुरा क्षेत्र में स्थित एक विवादित भूखंड व उस पर बने मंदिरों को लेकर सियासी भूचाल खड़ा हो गया है। सिविल जज (प्रवर खण्ड) रुद्रपुर की अदालत में विचाराधीन दीवानी वाद संख्या–252/2025 कान्ता प्रसाद गंगवार बनाम गेंदन लाल आदि के बावजूद 21 दिसंबर 2025 को दिनदहाड़े कथित तौर पर स्टे ऑर्डर की अवहेलना करते हुए जबरन कब्जे का प्रयास, मारपीट, तोड़फोड़ और लूटपाट का आरोप लगाया गया है। इस पूरे घटनाक्रम में रुद्रपुर विधायक शिव अरोरा को भी नामजद किया गया है।
क्या है पूरा मामला
प्रार्थी कान्ता प्रसाद गंगवार के अनुसार, रम्पुरा क्षेत्र में उनका लगभग 120×125 फीट का भूखंड है, जिस पर चन्द्रदेव मंदिर, काली मंदिर और भैरव मंदिर बने हुए हैं। इस भूमि को लेकर सिविल कोर्ट रुद्रपुर में दीवानी वाद लंबित है, जिसमें माननीय न्यायालय ने 04 अक्टूबर 2025 को स्पष्ट स्टे ऑर्डर पारित किया है, जो 06 जनवरी 2026 तक प्रभावी है। आदेश के तहत प्रतिवादी पक्ष को भूखंड व मंदिरों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप या कब्जा करने से रोका गया है।
21 दिसंबर की घटना का आरोप
शिकायत के मुताबिक, 21 दिसंबर 2025 को करीब 11:30 बजे विधायक शिव अरोरा अपने साथ विपक्षीगण—गेंदन लाल चन्द्रा, रामप्रसाद चन्द्रा, धर्मपाल, सत्यपाल चन्द्रा, टीका राम, ओमप्रकाश, राजेन्द्र ‘पानी वाला’, विजय पाल और लगभग 100 अज्ञात लोगों के साथ विवादित भूखंड पर पहुंचे। आरोप है कि:
भूखंड पर बने कमरे का ताला तोड़कर अंदर रखा कीमती सामान, जरूरी कागजात और नकदी लूट ली गई।
मकान व ढांचों में तोड़फोड़ कर नुकसान पहुंचाया गया।
मौके पर मंदिर में पुजारी का कार्य कर रहे रामचन्द्र पर हमला किया गया; लात-घूंसे व थप्पड़ों से पीटा गया और मोबाइल छीन लिया गया।
काजल गंगवार द्वारा जब न्यायालय के स्टे ऑर्डर की प्रति विधायक को दी गई और आदेश पालन की प्रार्थना की गई, तो आरोप है कि विधायक आग-बबूला हो गए और “इन्हें भी मारो” कहा।
बीच-बचाव करने आई मीना के साथ भी मारपीट की गई।
स्टे ऑर्डर फाड़ने और धमकी का आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया है कि विधायक शिव अरोरा ने स्टे ऑर्डर की प्रति छीनकर फाड़ दी और कथित तौर पर कहा कि यह “एकतरफा आदेश” है, जिसे वे नहीं मानते। आरोप है कि उन्होंने यह भी कहा कि “उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी की सरकार है, मैं रुद्रपुर का विधायक हूं, यहां मेरा ही आदेश चलता है।”
इतना ही नहीं, मौके पर पहुंची पुलिस को कथित तौर पर कार्रवाई न करने के लिए हड़काने और वादी का कब्जा हटाने के निर्देश देने का भी आरोप लगाया गया है।
घायल हुए, मेडिकल कराया
मारपीट में पुजारी रामचन्द्र, काजल गंगवार और मीना के घायल होने की बात कही गई है, जिनका सरकारी अस्पताल रुद्रपुर में मेडिकल परीक्षण कराया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्हें मुकदमा वापस न लेने पर जान से मारने या झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी भी दी गई।
पुलिस की भूमिका और स्थिति
शिकायत में उल्लेख है कि पुलिस ने पहले स्टे ऑर्डर के अनुपालन में पक्षकारों को भूखंड में जाने से रोका था, लेकिन 21 दिसंबर की घटना के दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए। हालांकि, मौके पर पहुंची पुलिस के प्रयासों से कथित कब्जा पूरी तरह सफल नहीं हो सका।
सीएम हेल्पलाइन का संदर्भ
मामले से जुड़ी सीएम हेल्पलाइन शिकायत संख्या CMHL-122025-13-902791 (दिनांक 01.12.2025) का भी जिक्र है। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, उस समय शिकायतकर्ता ने कहा था कि फिलहाल वह कोई कार्रवाई नहीं चाहता क्योंकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और स्टे प्राप्त है। साथ ही यह भी कहा गया था कि भविष्य में परेशान किए जाने पर पुलिस को सूचना दी जाएगी।
नामजद विपक्षी
प्रकरण में कुल 9 नामजद विपक्षियों में विधायक शिव अरोरा सहित स्थानीय निवासी शामिल हैं।

वादी / प्रार्थी पक्ष
कान्ता प्रसाद गंगवार – वादी / प्रार्थी
रामचन्द्र (पुत्र प्रेम राज) – पुजारी, घायल
काजल गंगवार – स्टे ऑर्डर दिखाने वाली, घायल
मीना – बीच-बचाव करने वाली, घायल
के.पी. गंगवार – शिकायतकर्ता (सीएम हेल्पलाइन संदर्भ)
विपक्षी / नामजद आरोपी
शिव अरोरा – विधायक, रुद्रपुर
गेंदन लाल चन्द्रा
राम प्रसाद चन्द्रा
धर्मपाल
सत्यपाल चन्द्रा
टीका राम
ओमप्रकाश
राजेन्द्र (पानी वाला)
विजय पाल
लगभग 100 अज्ञात व्यक्ति
रूद्रपुर में स्टे ऑर्डर उल्लंघन का आरोप, विधायक सहित 9 के खिलाफ कार्रवाई की मांग।रूद्रपुर (उधम सिंह नगर) में सिविल जज (प्रवर खण्ड) न्यायालय द्वारा पारित अस्थाई निषेधाज्ञा के कथित उल्लंघन का मामला सामने आया है। प्रकीर्ण दीवानी वाद संख्या 100/2025 में वादी कान्ता प्रसाद गंगवार ने आदेश 39 नियम 2ए सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत नौ नामजद विपक्षियों, जिनमें रूद्रपुर विधायक शिव अरोरा भी शामिल हैं, के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
प्रार्थी के अनुसार वह वार्ड संख्या 6/20, रम्पुरा क्षेत्र स्थित लगभग 120×125 फीट के भूखण्ड पर पिछले करीब 30 वर्षों से काबिज है, जहाँ ट्रस्ट के माध्यम से मंदिरों का निर्माण किया गया है। इस भूमि को लेकर 4 अक्टूबर 2025 को दायर दीवानी वाद संख्या 252/2025 में न्यायालय ने विपक्षियों को किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप, कब्जे या निर्माण से रोकने का आदेश दिया था, जो वर्तमान में 6 जनवरी 2026 तक प्रभावी है।
आरोप है कि 21 दिसंबर 2025 को स्टे ऑर्डर के बावजूद विवादित भूमि पर जबरन प्रवेश, तोड़फोड़ व मारपीट की गई। प्रार्थी का कहना है कि पुलिस के पहुंचने से स्थिति नियंत्रण में आई। इस संबंध में पुलिस को शिकायत भी दी गई है।
न्यायालय ने 23 दिसंबर 2025 को प्रार्थना पत्र दर्ज कर सभी विपक्षियों को 23 जनवरी 2026 के लिए नोटिस जारी किए हैं। मामले की सुनवाई जारी है।
नोट: आरोपों की पुष्टि न्यायालय के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।
वादी ने कोर्ट के आदेश की अवमानना, लूट, मारपीट, धमकी, तोड़फोड़ और राजनीतिक दबाव का आरोप लगाते हुए सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
अब आगे क्या
मामला अब पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में है। स्टे ऑर्डर के बावजूद हुई कथित घटना ने प्रशासन, पुलिस और राजनीति—तीनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह न्यायालय की अवमानना के साथ-साथ गंभीर आपराधिक धाराओं का विषय बन सकता है।
— रिपोर्ट: (रुद्रपुर)




