

उधमसिंहनगर में अपराध और नशे की धरपकड़ आज केवल कानून व्यवस्था का सवाल नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द व साम्प्रदायिक शांति का भी महत्वपूर्ण पहलू बन चुका है। ऐसे दौर में एसएसपी मणिकांत मिश्रा का कड़ा और निर्णायक रुख जिले के नागरिकों में विश्वास जगाने वाला है। यह बीती रात की कार्रवाई ही नहीं, बल्कि अपराध और नशे के खिलाफ चल रहे निरंतर अभियान का परिणाम है कि 5000 अवैध इंजेक्शन और 326 प्रतिबंधित सिरप के साथ तस्कर को गिरफ्तार किया गया — वह भी स्कूटी के माध्यम से लाइसेंस और बिल के बिना सप्लाई करता था। काशीपुर कोतवाली और एसओजी की संयुक्त टीम को यह उपलब्धि सौंपे जाने के साथ एनडीपीएस एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
नशा तस्कर चाहे किसी भी समुदाय, जाति या पंथ से हो — अपराध की पहचान केवल अपराध से होती है। एसएसपी मिश्रा का यह संदेश प्रशासनिक स्तर के साथ सामाजिक मनोविज्ञान पर भी सकारात्मक प्रभाव छोड़ता है कि अपराधी को धर्म नहीं, उसके अपराध से पहचाना जाएगा।
कानून व्यवस्था और साम्प्रदायिक संवेदनशीलता—साथ-साथ
कानून का सख्त और तटस्थ उपयोग साम्प्रदायिक तनावों को रोकने का सबसे प्रभावी हथियार होता है। देर रात किच्छा कोतवाली में लंबित विवेचनाओं की व्यक्तिगत समीक्षा, पिकेट प्वाइंट्स का निरीक्षण और जनता की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए किया गया फील्ड भ्रमण यह साबित करता है कि जिले की पुलिस केवल कागज़ों पर नहीं, बल्कि ज़मीन पर सक्रिय है।
अच्छी और निष्पक्ष विवेचना करने वाले अधिकारियों को तत्काल मंच पर शाबाशी देना भी एक ऐसा कदम है जो पुलिस विभाग में पारदर्शिता, प्रेरणा और जवाबदेही — तीनों को मजबूत करता है।
AHTU अभियान—सुरक्षा और संवेदनशीलता का संगम
एसएसपी मिश्रा के नेतृत्व में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट द्वारा सिडकुल पंतनगर में महिला प्रशिक्षणार्थियों को मानव तस्करी, साइबर सुरक्षा और ‘गौरा शक्ति ऐप’ संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह अभियान सिर्फ अपराध रोकने का तरीका नहीं, बल्कि समाज को जागरूक और सशक्त बनाने का माध्यम है।
महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की दृष्टि से यह पहल समुदायों के बीच विश्वास को मज़बूत बनाती है और हर वर्ग में सुरक्षा की भावना उत्पन्न करती है।
कानून + समाज = शांति
उधमसिंहनगर की तरह बहुसांस्कृतिक और बहुधार्मिक जिलों में साम्प्रदायिक सौहार्द केवल धर्मस्थलों या त्यौहारों में ही नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण और निष्पक्ष प्रशासन से भी कायम रहता है।
जब हर नागरिक को विश्वास हो कि
“कानून का संरक्षण सबको और दंड भी सबको समान रूप से मिलेगा”—
तो समाज को विभाजित करने वाली ताकतें स्वतः कमजोर पड़ जाती हैं।
एसएसपी मणिकांत मिश्रा की कार्यशैली इसी सिद्धांत पर आधारित दिखाई देती है—
✔ अपराधी पर सख्त कार्रवाई
✔ ईमानदार पुलिसकर्मियों को सम्मान
✔ समाज के कमजोर वर्गों और महिलाओं को जागरूकता
✔ रात में भी फील्ड पर उपस्थिति ताकि हर नागरिक बेखौफ रहे
अपराध को धर्म, जाति या समुदाय की दृष्टि से नहीं, बल्कि समाज विरोधी कृत्य के रूप में देखकर उसका कठोर दमन — यही प्रशासनिक न्याय और साम्प्रदायिक सौहार्द दोनों की असली नींव है।
उधमसिंहनगर में एसएसपी मणिकांत मिश्रा की इस पहल ने यही संदेश दिया है कि कानून और संवेदनशीलता एक साथ चल सकते हैं और जब ऐसा होता है तो समाज सुरक्षित, शांतिपूर्ण और विकासोन्मुख बनता है।




