पहाड़ की संस्कृति, शिक्षा और पहचान का संगम – चंदोला होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज का वार्षिकोत्सव बनेगा ऐतिहासिक”— सांस्कृतिक जगमगाहट — श्वेता मेहरा और टीम का भव्य प्रदर्शन

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रुद्रपुर, उधमसिंह नगर।जिस धरा ने अपने लोकगीतों, लोकनृत्यों और पर्वतीय संस्कारों से पूरे देश को आत्मगौरव का पाठ पढ़ाया, उसी धरती पर अब एक और ऐतिहासिक शाम उतरने जा रही है। अवसर है — चंदोला होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल तथा वसुंधरा नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज के वार्षिकोत्सव का, जो 4 दिसंबर 2025 को सायं 6 बजे से रात्रि 12 बजे तक अपने भव्य स्वरूप में रुद्रपुर के सांस्कृतिक इतिहास में दर्ज हो जाएगा।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

यह आयोजन केवल एक कॉलेज इवेंट नहीं, बल्कि पहाड़ी संस्कृति, शिक्षा, चिकित्सा और जनभागीदारी का उत्सव बनने जा रहा है।


एक ऐतिहासिक संस्थान – 2002 से चिकित्सा सेवा की अग्रदूत

साल 2002 में स्थापित चंदोला होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल आज उत्तराखंड की आयुष शिक्षा का ध्वजवाहक बन चुका है। भारत सरकार के नेशनल कमीशन फॉर होम्योपैथी तथा उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय से संबद्ध यह संस्थान न केवल डॉक्टर तैयार कर रहा है, बल्कि मानवता की सेवा के लिए समर्पित चिकित्सकों की नई पीढ़ी को दिशा दे रहा है।

संस्थान के चेयरमैन डॉ. के.सी. चंदोला के दूरदर्शी नेतृत्व में यह कॉलेज अब पूरे उत्तराखंड में एक आदर्श चिकित्सा शिक्षण संस्थान के रूप में प्रतिष्ठित है।


दिनभर चलेगा चिकित्सा सम्मेलन — जनता से सीधे संवाद करेंगे देशभर के होम्योपैथिक विशेषज्ञ

वार्षिकोत्सव की शुरुआत सुबह 10 बजे से होगी, जब ऑल इंडिया लेवल के 100 से अधिक आयुष डॉक्टर रुद्रपुर पहुंचेंगे।
इस अवसर पर एक राष्ट्रीय होम्योपैथिक गोष्ठी का आयोजन किया गया है, जिसमें देशभर से आए विशेषज्ञ आधुनिक चिकित्सा परिदृश्य में होम्योपैथी की उपयोगिता पर चर्चा करेंगे।

यह एक अनोखी पहल है — जहाँ डॉक्टर केवल मंच से नहीं बोलेंगे, बल्कि आम जनता से सीधे संवाद करेंगे, उनकी समस्याएं सुनेंगे और परामर्श देंगे। इस पहल से रुद्रपुर में जन-संवाद आधारित चिकित्सा संस्कृति की शुरुआत होगी।


सांस्कृतिक जगमगाहट — श्वेता मेहरा और टीम का भव्य प्रदर्शन

शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक परिसर एक सांस्कृतिक पर्व में बदल जाएगा।
पहाड़ी संस्कृति की पहचान लोकप्रिय गायिका श्वेता मेहरा अपने पूरे दल के साथ मंच पर उतरेंगी।
उनकी प्रस्तुति में केवल संगीत नहीं, बल्कि उत्तराखंड की आत्मा बहेगी — झोड़ा, चांचरी, चफुला, और गढ़वाली-कुमाऊंनी लोकगीतों के संग दर्शक अपनी जड़ों से जुड़ने का अनुभव करेंगे।

यह श्वेता मेहरा का रुद्रपुर में पहला व्यक्तिगत कार्यक्रम होगा, और इसीलिए इसकी प्रतीक्षा पूरे कुमाऊं में उत्सव की तरह की जा रही है।
स्टेज से लेकर पूरे परिसर तक लगभग एक किलोमीटर का क्षेत्र रोशनी से जगमग रहेगा — मानो शहर के दिल में देवभूमि का एक सांस्कृतिक दीपोत्सव उतर आया हो।


राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों का महासंगम

इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाने जा रहा है राजनीतिक हस्तियों का भव्य जमावड़ा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आगमन की पूरी संभावना है।
इसके अलावा, सांद अजय भट्ट,कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, सुबोध उनियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, विधायक शिव अरोड़ा, पूर्व कैबिनेट मंत्री किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला,गदरपुर विधायक अरविंद पांडे, नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी, तथा महापौर विकास शर्मा एवं पूरे प्रदेश से कई और मंत्री और विधायकों के पहुंचने की संभावनाएं तलाश की जा रही है उत्तराखंड की कई जानी-मानी हस्तियां उपस्थित रहेंगी।

यह दृश्य केवल राजनीति का नहीं बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक होगा — जहाँ जनप्रतिनिधि, डॉक्टर, समाजसेवी और आम जनता एक मंच पर होंगे।


सम्मान का पर्व — समाजसेवियों और आंदोलनकारियों को मिलेगा गौरव

कार्यक्रम में रुद्रपुर के सेवा कार्यों में अग्रणी संस्थानों और समाजसेवियों को सम्मानित किया जाएगा।
विशेष रूप से राज्य आंदोलनकारियों को भी आमंत्रित किया गया है — जो उत्तराखंड की अस्मिता और संघर्ष की जीवंत गाथा हैं।
उनका सम्मान एक तरह से उस पीढ़ी को नमन होगा, जिसने इस राज्य को अस्तित्व दिया।

इस सम्मान समारोह से यह संदेश जाएगा कि शिक्षा संस्थान केवल ज्ञान के केंद्र नहीं, बल्कि समाज के संस्कार-स्थल हैं।


पहाड़ की संस्कृति – हमारी पहचान

उत्तराखंड का लोकसंगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जीवन का दस्तावेज़ है।
डॉ. चंदोला और उनकी टीम ने इस वार्षिकोत्सव को उसी भावना से सजाया है — जहाँ शिक्षा के साथ संस्कृति का संगम भी दिखेगा।

श्वेता मेहरा जैसी लोककलाकार जब मंच पर होंगी, तो यह केवल गायन नहीं होगा, बल्कि पहाड़ की माटी की आवाज़ गूंजेगी।
उनके गीतों में नदी की लय, पहाड़ की गंध और लोकजीवन की लचक महसूस की जाएगी।


भविष्य की दिशा — होम्योपैथी और जनकल्याण का समागम

यह वार्षिकोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भविष्य की चिकित्सा शिक्षा और नीति की झलक भी पेश करेगा।
आज जब लोग एलोपैथी और औषधियों के दुष्प्रभावों से त्रस्त हैं, होम्योपैथी एक शांत, सशक्त और दीर्घकालिक विकल्प बनकर उभर रही है।

संस्थान का उद्देश्य केवल डॉक्टर बनाना नहीं, बल्कि समझदार, संवेदनशील और समाजोन्मुख चिकित्सक तैयार करना है।
इस दिशा में यह आयोजन एक नया अध्याय जोड़ेगा — जहाँ चिकित्सा, संस्कृति और समाज एक सूत्र में पिरोए जाएंगे।


एक शाम, जो रुद्रपुर को रोशन कर देगी

4 दिसंबर की यह शाम केवल कैंपस का उत्सव नहीं, बल्कि पूरे रुद्रपुर की सांस्कृतिक चेतना का उत्सव होगी।
यह आयोजन शिक्षा, संस्कृति और समाज के उस मिलन का प्रतीक है, जिसकी कमी आज आधुनिक विकास की दौड़ में सबसे ज्यादा खलती है।

जब मंच पर श्वेता मेहरा की आवाज़ गूंजेगी, रोशनियों से सजी सड़कें मुस्कुराएंगी, और मंच पर समाजसेवियों व आंदोलनकारियों का सम्मान होगा — तब यह कहा जा सकेगा कि
“रुद्रपुर ने अपने हृदय में फिर से पहाड़ की आत्मा को जगा दिया।”



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