यूपी से लेकर उत्तराखंड तक अस्पतालों में रहकर बच्चे चोरी करने वाला गैंग पिछले पांच साल से सक्रिय है। क्लीनिक पर आने वाले तमाम लोगों से संपर्क कर बच्चों का पता लगाना और उसके बाद खरीदार तलाशना ब्रह्मपाल के अलावा काशीपुर के अमित का काम था।

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क्लीनिक की आड़ से ऐसे तमाम महिलाओं का यह लोग प्रसव भी करा चुके है जिन्हें बच्चे की जरूरत नहीं होती। प्रसव के बाद यह उन महिलाओं को कुछ रुपये देने के बाद बच्चों को बेच देते थे।

ब्रह्मपाल गांव में पिछले 25 साल से क्लीनिक चला रहा है तो पांच साल पहले काशीपुर के अमित के साथ मिलकर गांव में एक और क्लीनिक बनाया था। उस क्लीनिक पर अमित के अलावा इसका बेटा रजत भी बैठता था। संजय की शादी दस साल पहले हुई थी, लेकिन उसके कोई संतान नहीं थी। करीब एक माह पहले संजय ने ब्रह्मपाल से बच्चा दिलवाने की बात कही थी। गिरोह तुरंत बच्चे की व्यवस्था संजय को ढाई लाख रुपये में बेच दिया।

ब्रह्मपाल मूल रूप से काशीपुर का निवासी है, लेकिन इसमें ठाकुरद्वारा के सुरजन नगर में लगभग 25 वर्ष पूर्व आकर क्लीनिक खोला था। उसके पास कोई मेडिकल की डिग्री नहीं है। धीरे धीरे मरीज बढ़ने लगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिदिन 200 से 300 मरीज क्लीनिक पर आते है। इसके बाद बेटे रजत को बीएएमएस की डिग्री करवाकर सुरजन नगर में ही पुलिस चौकी के पास अलग क्लीनिक खुलवा दिया।

जहां पर काशीपुर निवासी अमित देखरेख करता था। अमित और रजत दोनों पहले काशीपुर के निजी अस्पताल में नौकरी करते थे। क्लीनिक की आड़ में इन्होंने यूपी, उत्तराखंड और बिहार के लोगों को मिलाकर बच्चा चोरी का गैंग बनाया। उधर रायबरेली स्टेशन से 13 मई को चोरी हुए नौ माह के मासूम को ठाकुरद्वारा के सुरजन नगर निवासी संजय कुमार को 2.50 लाख रुपये में बेच दिया था।

संजय कुमार की शादी को दस साल हो गए, लेकिन अभी तक संतान नहीं थी। उधर सुरजन नगर में अवैध तरीके से क्लीनिक चलाने वाले ब्रह्मपाल के बारे में सभी को पता था कि यह रुपये लेकर बच्चे बेचता है। ऐसे में संजय ने ब्रह्मपाल से करीब एक माह पहले बच्चे का इंतजाम करने के लिए कहा था।

बच्चे की डिमांड आते ही ब्रह्मपाल ने गांव में दूसरा क्लीनिक चलाने वाला उत्तराखंड के काशीपुर निवासी अपने बेटे रजत के दोस्त अमित से संपर्क किया। क्योंकि अमित के संपर्क में भी गैंग के ऐसे लोग थे जो डिमांड के अनुसार बच्चे चाेरी करते थे। इसके बाद इन लोगों ने रामपुर और अमरोहा निवासी गैंग के सदस्यों से संपर्क किया।

रायबरेली से बच्चा चोरी करने के बाद 14 मई को संजय को दे दिया था। संजय ने बच्चा गांव में अपने रिश्तेदार का बताया और खुशी मनाते हुए लोगों को दावत दी। दावत में ब्रह्मपाल के अलावा काशीपुर निवासी अमित भी शामिल हुआ।

चार दिन पहले रायबरेली पुलिस ने सबसे पहले अमित के क्लीनिक पर छापेमारी की थी। यहां से बच्चे का पता निकाला और संजय को हिरासत में लेकर बच्चा बरामद किया। इसी बीच ब्रह्मपाल का नाम सामने आया तो उसे भी गिरफ्तार कर लिया। इस गिरोह में ब्रह्मपाल के बेटा रजत भी शामिल बताया जा रहा है। अब पुलिस उसकी तलाश में लगी है।


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