

इस केस में बरेली पासपोर्ट कार्यालय के अधिकारी मोहम्मद नसीम की गवाही भी महत्वपूर्ण रही, क्योंकि उन्हीं ने अब्दुल्ला को दूसरा पासपोर्ट जारी किया था। अदालत ने कहा कि अधिकारी ने नियमों का पालन न करते हुए, बिना पुलिस सत्यापन के, आवेदन वाले दिन ही पासपोर्ट जारी कर दिया, जो पूरी तरह नियम-विरुद्ध है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
पासपोर्ट अधिकारी की लापरवाही पर अदालत की कड़ी टिप्पणी
अदालत ने अपने आदेश में यह टिप्पणी भी की कि पासपोर्ट अधिकारी ने कोर्ट में दिए बयान में अपने कदम को पूरी तरह सही ठहराने की कोशिश की, जिसे न्यायालय ने अनुचित और आपत्तिजनक माना।
जज ने कहा कि यह व्यवहार दर्शाता है कि अधिकारी किसी स्तर पर आरोपी से प्रभावित थे। उन्होंने साफ कहा कि एक सरकारी अधिकारी से ऐसी लापरवाही न केवल कानून व्यवस्था को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि देश की साख भी दांव पर लगती है। ऐसे मामलों में प्रभावशाली लोग पहचान के दम पर विदेश जाने या कानूनी कार्रवाई से बचने में सफल हो जाते हैं, जो न्याय व्यवस्था के लिए खतरनाक है।
पासपोर्ट अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई की सिफारिश
इसी वजह से अदालत ने आदेश दिया कि पासपोर्ट अधिकारी मोहम्मद नसीम, चाहे वह नौकरी पर हों या रिटायर, के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा विदेश मंत्रालय को भेजी जाए। अदालत ने कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक है कि दोषी अधिकारियों पर कठोर दंडात्मक और विभागीय कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर प्रभावशाली लोगों को लाभ न पहुंचा सके। अभियोजन पक्ष की ओर से केस लड़ रहे सहायक अभियोजन अधिकारी स्वदेश शर्मा ने बताया कि पासपोर्ट अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति जिले के वरिष्ठ अधिकारियों, जिलाधिकारी या पुलिस अधीक्षक-के माध्यम से भारत सरकार के विदेश मंत्रालय तक भेजी जाएगी।
प्रभावशाली परिवार होने पर भी कानून सबके लिए समान
अदालत ने अपने फैसले में यह भी उल्लेख किया कि अब्दुल्ला आज़म एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आते हैं, उनके पिता आज़म खां यूपी राजनीति के बड़े नेता रहे हैं और चार दशक से राजनीति में सक्रिय हैं। अदालत ने कहा कि यदि ऐसे प्रभावशाली परिवार से होने के कारण आरोपी को कम सजा दी जाती है, तो जनता के मन में गलत संदेश जाएगा कि ताकतवर लोगों को न्याय व्यवस्था में विशेष लाभ मिलता है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि न्याय का मूल सिद्धांत है”कानून सबके लिए समान है।” इसलिए किसी भी आरोपी को उसकी सामाजिक स्थिति, परिवार या राजनीतिक पहचान के कारण राहत नहीं दी जा सकती। जनता का भरोसा तभी बना रह सकता है जब हर गलत काम करने वाला व्यक्ति, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली हो, सजा से बच न सके।




