

साथ ही जीवन में खुशहाली आती है। वहीं, इस पवित्र माह(Chaturmas 2025) के दौरान देवी तुलसी की पूजा परम कल्याणकारी मानी गई है। ऐसे में रोजाना देवी तुलसी को जल चढ़ाएं। उनके समक्ष घी का दीपक जलाएं।

संवाददाता,शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स /उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट
इसके बाद तुलसी चालीसा का पाठ करें। अंत में आरती करें। ऐसा करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही घर में मां लक्ष्मी का वास होता है।
आपको बता दें कि जगत के पालनहार श्रीहरि के योगनिद्रा के दौरान सृष्टि का संचालन भोलेनाथ करते हैं. इस साल चातुर्मास 6 जुलाई से शुरू हो गया है. ऐसे में आपको अगले 4 महीने क्या-क्या नहीं करना है, इसकी पूरी डिटेल आर्टिकल में बताने जा रहे हैं…
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चातुर्मास में क्या नहीं करें – What not to do in Chaturmas
- इस दौरान आपको कोई भी नया काम शुरू नहीं करना चाहिए. इस समय दुकान खोलना, नया कारोबार शुरू करना शुभ नहीं माना जाता है. इससे आपको नए काम में लाभ नहीं मिलता है.
- चातुर्मास के दौरान भूमि पूजन, मुंडन संस्कार, तिलक समारोह, गृह प्रवेश, नामकरण जैसे संस्कार भी नहीं करने चाहिए.
- वहीं, चातुर्मास के दौरान तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए. बल्कि सात्विक भोजन का पालन करना चाहिए.
- चातुर्मास के दौरान आपको दही,मूली और साग नहीं खाना चाहिए.
चातुर्मास में क्या करें – What to do in Chaturmas
- चातुर्मास में नियमित रूप से विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए. साथ ही, मान्यता है कि इस दौरान ब्रज की यात्रा करना बहुत शुभ होता है. इससे जीवन में सुख शांति आती है.
- चातुर्मास में जातक को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और जमीन पर सोना चाहिए. ऐसा करने व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता आती है.
- इन चार महीनों में भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना चाहिए. साथ ही, माता लक्ष्मी की भी विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए. इससे श्री हरि खुश होते हैं.
चातुर्मास कब समाप्त होगा 2025 – When will Chaturmas end in 2025
इस साल चातुर्मास 6 जुलाई से शुरू होकर 1 नवंबर तक रहेगा. 1 नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन श्रीहरि योगनिद्रा से जागेंगे. इसी के साथ सारे मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे. आपको बता दें कि चातुर्मास के दौरान सिर्फ भगवान विष्णु ही नहीं बल्कि अन्य देवी-देवता भी विश्राम पर रहते हैं. इसलिए कोई भी नया काम करने से देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता है, जिससे काम सफल नहीं होता.
तुलसी चालीसा।। (Tulsi Chalisa)
”श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय।
जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।”
नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।
दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।
विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।
भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।
जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।
करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।
कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।
तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।
कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।
वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।
श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।
कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।
छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।
तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।
औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता,
देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।
वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।
नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।
नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।
नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।
नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।
नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।
नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।
जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।
निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।
करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।
शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।
क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।
मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।
जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।
बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।
प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।
चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।
करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।
पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।
यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।
करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।
है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।
तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।
भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।
यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय।
गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।




