गोद भराई की पारंपरिक रस्म को मिला सामाजिक और सामूहिक आयोजन का नया स्वरूप, महिला समूहों ने मनाया उत्सव

नगर निगम के शहरी आजीविका मिशन दीनदयाल अंत्योदय केंद्र में आयोजित हुआ गोद भराई कार्यक्रम, भाजपा महिला प्रकोष्ठ की पदाधिकारी भी रहीं मौजूद

रुद्रपुर। भारतीय समाज में गोद भराई की रस्म सदियों से मातृत्व की खुशियों, पारिवारिक परंपराओं और आने वाले नवजीवन के स्वागत का प्रतीक रही है। गर्भवती महिला के लिए आयोजित इस रस्म में परिवार की महिलाएं एकत्र होकर उसे शुभकामनाएं देती हैं, उपहार भेंट करती हैं और सुरक्षित प्रसव तथा स्वस्थ संतान की मंगलकामना करती हैं। लेकिन बदलते सामाजिक परिवेश में अब इस पारंपरिक रस्म का स्वरूप भी विस्तार लेता दिखाई दे रहा है। गोद भराई जैसे पारिवारिक आयोजन अब महिला स्वयं सहायता समूहों के सामूहिक कार्यक्रमों और सामाजिक गतिविधियों का हिस्सा बन रहे हैं। कुछ आयोजनों में इनका सामाजिक के साथ राजनीतिक रंग भी नजर आने लगा है।

हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स अवतार सिंह बिष्ट | उत्तराखंड उत्तर प्रदेश, संपूर्ण भारत, देश-विदेश, खेल, आध्यात्मिक, राजनीतिक और जन सरोकारों की खबरें।

इसी कड़ी में नगर निगम के शहरी आजीविका मिशन दीनदयाल अंत्योदय केंद्र में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने सामूहिक रूप से एक गर्भवती महिला की गोद भराई का कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ खुशियां साझा कीं और आपसी एकता, सहयोग तथा महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया।

आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं के बीच आपसी प्रेम, एकजुटता और सहयोग की भावना को बढ़ावा देने के साथ उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करना भी रहा। आयोजन में यह संदेश दिया गया कि महिलाएं मिलकर छोटे-छोटे पारिवारिक और सामाजिक कार्यक्रमों को भी उत्सव का रूप दे सकती हैं। ऐसे आयोजनों से महिलाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, नेतृत्व क्षमता विकसित करने, सामाजिक जिम्मेदारियां निभाने और स्वरोजगार के नए अवसर तलाशने का मंच मिलता है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय जनता पार्टी जिला प्रकोष्ठ स्वयं सहायता समूह की सह-संयोजक रेनू शर्मा, मंडल संयोजक रंजन सक्सेना तथा शहरी आजीविका मिशन दीनदयाल अंत्योदय केंद्र की संगठनकर्ता ममता आर्य मौजूद रहीं। इसके अलावा धनलक्ष्मी समूह की ममता देवी, नीतू, लवली सिकदार, शुभ्रा, नीलम, बीना सहित विभिन्न स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम में कुमाऊंनी, बंगाली, राजस्थानी और उत्तर प्रदेश की पृष्ठभूमि से जुड़ी महिलाओं की सहभागिता भी देखने को मिली। अतिथियों ने महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि अलग-अलग भाषा, संस्कृति और क्षेत्र से आने वाली महिलाएं जब एक मंच पर एकजुट होकर आगे बढ़ती हैं तो सामाजिक समरसता और सहयोग की भावना मजबूत होती है।

गोद भराई की रस्म में बदलाव, चर्चा का विषय बना नया स्वरूप

गौरतलब है कि परंपरागत रूप से गोद भराई गर्भवती महिला के मातृत्व का उत्सव है। इसमें परिवार और समाज की महिलाएं गर्भवती महिला को आशीर्वाद देती हैं तथा मां और होने वाले शिशु के स्वस्थ जीवन की कामना करती हैं। समय के साथ अब यह रस्म केवल घरों और पारिवारिक दायरे तक सीमित नहीं रह गई है। स्वयं सहायता समूह, सामाजिक संस्थाएं और विभिन्न संगठन भी ऐसे कार्यक्रम सामूहिक रूप से आयोजित करने लगे हैं।

इस आयोजन में भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों की मौजूदगी ने इसे सामाजिक गतिविधि के साथ राजनीतिक-सामाजिक सहभागिता के दृष्टिकोण से भी चर्चा में ला दिया है। हालांकि आयोजकों ने इसका उद्देश्य महिला एकता, सहयोग और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना बताया है। ऐसे में यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि पारंपरिक सामाजिक रस्मों का विस्तार महिला सशक्तिकरण के मंच के रूप में हो रहा है या धीरे-धीरे इन आयोजनों में राजनीतिक सहभागिता भी अपनी जगह बना रही है।

बहरहाल, महिलाओं का एक मंच पर एकत्र होना, एक-दूसरे की खुशियों में शामिल होना और सामूहिक रूप से सामाजिक जिम्मेदारियां निभाना महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक पहल के रूप में देखा जा सकता है।

नारी शक्ति केवल एक नाम नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देने वाली शक्ति है। महिलाएं एकजुट होंगी, आगे बढ़ेंगी और आत्मनिर्भर बनेंगी, तभी समाज की वास्तविक प्रगति संभव होगी।