: ईरान में जारी हिंसा और राजनीतिक उथल-पुथल से पूरी दुनिया डरी हुई है. सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ खत्म होने का नाम नहीं ले रही तो वहीं अस्पतालों में लाशों की लगी ढेर और ऊंची होती जा रही है.

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हालात ऐसे हैं कि 2000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है , हजारों लोग जख्मी हो चुके हैं. ये वो लोग हैं, जो किसी बाहरी हमले या युद्ध में नहीं मारे गए हैं, बल्कि गृहयुद्ध की भेंट चढ़ गए हैं. ऐसे में सवाल ये है कि आखिर ईरान में ऐसा हुआ ही क्यों ? जिस देश के पास तेल और गैस का भंडार है, वहां की अर्थव्यवस्था क्रैश कैसे हो गई ? ईरान की करेंसी शून्य के करीब कैसे पहुंच गई और करेंसी के गिरने से ईरान के लोग बेकाबू होकर सड़कों पर क्यों उतर आए ?

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

पेट की आग से जल रहा ईरान

ईरान में महंगाई का आलम ये है कि ईरान की करेंसी रियाल की वैल्यू शून्य के करीब पहुंच गई है. भारतीय करेंसी में देखें तो रिय़ाल की कीमत 0.000091 पैसे पर पहुंच गई, जबकि डॉलर के मुकाबले रियाल 0.0000010 सेंट पर पहुंच गया है. जबकि यूरो के मुकाबले रियाल की वैल्यू शून्य पर पहुंच गई. यूरोप के 27 देशों में ईरानी रियाल चलन से बाहर हो गया है. गिरती करेंसी वैल्यू और आसमान छूती महंगाई ने लोगों को भूखे रहने पर मजबूर कर दिया.

ईरान में महंगाई की एक झलक

ईरान की गिरती अर्थव्यवस्था और कमजोरी होती करेंसी ने महंगाई को चरम पर पहुंचा दिया है. ईरान की करेंसी रियाल फ्री-फॉल ने ईरान में उबाल ला लिया है. लोगों का पैसा रातों-रात कागज का टुकड़ा बन गया है. ईरान में 1 कप चाय की कीमत 20000 रियाल, 1 लीटर दूध 30 हजार रियाल में बिक रहा है. एक ग्लास जूस के लिए आपको 50 हजार रिलाय खर्च करने पड़ रहे हैं. 1 किलो चीनी 80 हजार रियाल तो ब्रेड 50 हजार रियाल के बिक रहा है. जबकि हेयर कट के लिए आपको 1 लाख रियाल चुकाने होंगे. ईरान में महंगाई दर 40% को पार कर चुकी है.

पेट की आग ने लोगों को किया मजबूर,सड़कों पर उतरने लोग

भले ही लोग ईरान के विद्रोह को राजनीतिक बता रहे हो, लेकिन हकीकत यही है कि ये लड़ाई भूख की है. प्रतिबंधों के चलते उपजी महंगाई, गरीबी ने लोगों को भूखमरी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है. जेब कागजी नोट से भरे है, लेकिन प्लेटें खाली है. लोगों का गुस्सा विद्रोह बनकर सड़कों पर उतरा है. लेकिन मन में सवाल है कि आखिर ये स्थिति आई कैसे ?

आग तेहरान में, लेकिन रिमोट कंट्रोल वॉशिंगटन का ?

ईरान के पास तेल और गैस का भंडार है. जिस देश के पास तेल और गैस का भंडार है. ईरान के पास दुनिया के कुल प्रमाणित तेल भंडार का लगभग 12 फीसदी हिस्सा है. अनुमान के मुताबिक उसके 200 अरब बैरल से ज्यादा कच्चा तेल मौजूद है, लेकिन अमेरिका के प्रतबंधों के चलते ईरान बर्बाद हो गया. ईरान पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखा है. साल 2015 तक ईरान हर दिन 2.5 मिलियन बैरल तेल बेच रहा था, लेकिन 2018 में अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों और दवाब के चलते ईरान का तेल निर्यात 80% तक गिर गया. अमेरिका और ईरान की जंग ने ईरानी लोगों की थाली पर खर्च बढ़ा दिया. अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरान का निर्यात ठप होता चला गया. अमेरिका के बाद संयुक्त राष्ट्र ने ईरान पर प्रतिबंधों को सख्त कर दिया, जिसके बाद ईरान के लिए अपना तेल बेचना मुश्किल हो गया. निर्यात कम होने से विदेशी मुद्रा की कमी खजाने को खाली करती चली गई और ईरानी रियाल की कीमत तेजी से गिरने लगी. साल 2025 तक रियाल की वैल्यू 45 फीसदी तक लुढ़क गई. अब ट्रंप ने ईरान की बचीखुची कमर तोड़ने का भी जुगाड़ कर दिया है. ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है.

ईरान की महंगाई वाली आग में अमेरिका ने डाला घी

अमेरिका ने पहले प्रतिबंधों के साथ ईरान की अर्थव्यवस्था को तबाह किया और अब घी डालकर उसके विद्रोह में उबाल ला रहा है. ताजा 25 फीसदी टैरिफ ईरान की अर्थव्यवस्था को खोखला कर देंगे. रही सही कसर ईरान के सत्ताधारी लोग कर देंगे. ईरान के मुखिया बने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई इस हालात को इकोनॉमी ऑफ रेजिस्टेंस यानी बाहरी दुश्मनों की देन बता रहे है, लेकिन हकीकत ये है कि सरकार महंगाई रोकने के बजाए, लोगों के लिए खाने-पीने का इंतजाम करने के बजाए डिजिटल सर्विलांस पर अरबों का खजाना लूटा रही है.

ईरान के विद्रोह का अंजाम क्या होगा ?

ईरान में अमेरिकी प्रवेश से विद्रोह का रंग बदल सकता है. अमेरिका किसी भी हाल में ईरान में रिजीम चेंज कराने में जुटा है. अमेरिका ईरान को अपने हिसाब से कंट्रोल करने की ओर आगे बढ़ सकता है, हालांकि ये इतना आसान नहीं होगी. अमेरिका ईरान पर संभावित सैन्य हमलों के विकल्पों पर भले ब्रीफिंग दे रहा हो, लेकिन वो भी इस हमले से बचने की कोशिश करेगा. ईरान के लोगों की मांग पर क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को फिर से सत्ता में लाया जा सकता है, ताकि ईरान की आर्थिक संकट, भारी महंगाई, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, बेरोजगारी, मुद्रा गिरावट से निपटा जा सके.

सवाल: ईरान में क्यों हो रहा है प्रदर्शन ?

बढ़ती महंगाई, गिरती मुद्रा और बेरोजगारी के चलते ईरान में 28 दिसंबर प्रदर्शन शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे पूरे ईरान में फैल गया. ईरान में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब मौलवी सिस्टम में पूरी तरह बदलाव की मांग पर पहुंच गया है.

सवाल: क्या ईरान एक मुस्लिम देश है ?

जवाब: ईरान की जनसंख्या है करीब 9.31 करोड़. ये दुनिया का 17वां सबसे बड़ा देश है. 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद,ईरान एक इस्लामी राज्य बन गया, जहां धर्म और राजनीति से देश चलता है.

सवाल: ईरान की करेंसी की वैल्यू कितनी है ?

जवाब: ईरान की नेशनल करेंसी, रियाल निचले स्तर पर है. ईरान के ओपन मार्केट में एक अमेरिकी डॉलर लगभग 1,429,500 रियाल में खरीदा जा सकता है.
सवाल: ईरान से भारत को क्या मिलता है?

जवाब: भारत ईरान को चावल, चाय, चीनी, दवाइयां, कृत्रिम रेशे, बिजली के उपकरण और कृत्रिम आभूषण जैसे सामान भेजता है, वहीं ईरान से सूखे मेवे, रासायनिक पदार्थ और कांच खरीदता है.


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