

इन बदलावों से लाखों महिलाएं अब सुरक्षित, भरोसेमंद और पारदर्शी कार्यस्थल का लाभ उठा सकेंगी।

1 .वर्कप्लेस सुरक्षा में सुधार
500 या अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों में सुरक्षा समितियां बनाई जाएंगी, जिनमें महिला प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। रात की शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित परिवहन, महिला सुरक्षा गार्ड, CCTV और सुपरवाइजरी व्यवस्था अनिवार्य होगी।
2 .रात की शिफ्ट में काम की मंजूरी
पहली बार महिलाओं को सुबह 6 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद भी काम करने की अनुमति दी गई है। इससे IT, हेल्थकेयर, हॉस्पिटैलिटी, एयरलाइंस, ई-कॉमर्स और BPO जैसी इंडस्ट्री में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। कंपनियों को इसके लिए सुरक्षित परिवहन, निगरानी और सुरक्षा इंतजाम करना अनिवार्य होगा।
3 .समान वेतन और भेदभाव पर रोक
नए कोड्स के अनुसार अब किसी भी कंपनी को पुरुष, महिला या ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के बीच भेदभाव नहीं करने का अधिकार होगा। समान काम का समान वेतन देना हर कंपनी की जिम्मेदारी होगी। पहली बार ट्रांसजेंडर कर्मचारियों को भी कानूनी सुरक्षा मिली है।
4 .फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए ग्रैच्यूटी
पहले फिक्स्ड-टर्म या कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को ग्रैच्यूटी पाने के लिए 5 साल नौकरी करनी पड़ती थी। अब केवल एक साल की सेवा पूरी करने के बाद भी उन्हें ग्रैच्यूटी का लाभ मिलेगा। इससे IT, BPO, हॉस्पिटैलिटी और रिटेल सेक्टर की लाखों महिलाएं लाभान्वित होंगी।
5 .शिकायत समितियों में महिला प्रतिनिधित्व
अब शिकायत सुनने वाली कमेटियों में महिलाओं का पर्याप्त और बराबर प्रतिनिधित्व जरूरी होगा। इससे महिलाओं की शिकायतें अधिक संवेदनशील और निष्पक्ष तरीके से सुनी जाएंगी।
6 .साल में एक बार मुफ्त स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था
सभी कर्मचारियों के लिए साल में एक बार फ्री हेल्थ चेकअप अनिवार्य होगा। यह बदलाव खासकर कामकाजी महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि परिवार और नौकरी के बीच स्वास्थ्य जांच को वे अक्सर टाल देती हैं।




