फरमैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जो ग्राफ साझा किया, उसमें अमेरिका, चीन, रूस, यूरो क्षेत्र और भारत की वास्तविक जीडीपी को 2019 के रुझान के मुकाबले 2025 की तीसरी तिमाही तक की प्रतिशत वृद्धि के रूप में दर्शाया गया है। इसमें नतीजा आश्चर्यजनक है, भारत अकेली प्रमुख अर्थव्यवस्था है जो अपने दीर्घकालिक विकास पथ से स्पष्ट रूप से ऊपर बढ़ रही है।

भारत की रिकवरी सबसे मजबूत
सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं 2020 में नकारात्मक वृद्धि के क्षेत्र में चली गई थीं। यूरो एरिया: -25%, चीन: -10%, अमेरिका: -5%, भारत: -5%, रूस: -8%, 2022 तक भारत ने महामारी-पूर्व रुझान को न केवल छू लिया, बल्कि उससे आगे निकल गया। 2024 में इसकी स्थिति +3% पर और 2025 की तीसरी तिमाही तक +5% तक पहुंचने का अनुमान है।
फरमैन के अनुसार, भारत की यह उछाल एक अस्थायी उभार नहीं, बल्कि नीतिगत सुधारों, डिजिटल ढांचे और मजबूत घरेलू मांग का परिणाम है। केंद्र और राज्य स्तर पर किए गए निवेश सुधार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्थिर महंगाई नियंत्रण और सरकारी योजनाओं ने उद्योग और उपभोक्ताओं दोनों को नई गति दी।
दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं क्यों पिछड़ रहीं?
भारत के विपरीत चीन अभी भी जीरो-कोविड नीति के असर और रियल एस्टेट संकट से उबर नहीं पा रहा है। उसका ग्राफ 2025 तक लगभग -5% पर रहने का अनुमान है। रूस यूक्रेन युद्ध और प्रतिबंधों के कारण -8% पर अटका हुआ है। यूरो एरिया महंगाई, ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक अस्थिरता से जूझते हुए -3% के स्तर पर है। अमेरिका की वृद्धि एआई-आधारित निवेश में सीमित है, जिससे विस्तार की स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं।
दुनिया के रेटिंग एजेंसियों का भी भारत पर भरोसा
वैश्विक रेटिंग एजेंसियां भारत की आर्थिक मजबूती पर भरोसा जता रही हैं। इकरा ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में भारत की वृद्धि 7% के आसपास बनी रहेगी। जबकि मूडीज ने भी भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बताया है, जिसके 2025 में 7% और 2026 में 6.4% की जीडीपी वृद्धि की संभावना है।

