उत्तराखंड रुद्रपुर। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार से जुड़ी तीन अहम खबरें इन दिनों चर्चा में हैं। एक ओर मुख्यमंत्री ने गायक दलेर मेहंदी और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बीच पैदा हुए विवाद को संवाद के जरिए समाप्त करने की पहल की है, वहीं दूसरी ओर कैबिनेट ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए निश्शुल्क बस यात्रा और प्रशिक्षकों की नियुक्ति को मंजूरी दी है। इसके साथ ही अदाणी पावर से 1234 मेगावाट बिजली खरीदने की प्रस्तावित योजना पर उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने यूपीसीएल से स्पष्टीकरण मांगा है। इन घटनाक्रमों में सरकार के सामने सांस्कृतिक सौहार्द, खेल सुविधाओं के विस्तार और बिजली खरीद में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अलग-अलग चुनौतियां दिखाई देती हैं।
अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर
दलेर मेहंदी विवाद खत्म कराने के लिए सीएम धामी की पहल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गायक दलेर मेहंदी से जुड़े विवाद को समाप्त करने के लिए गायक मीका सिंह से फोन पर बातचीत की। मुख्यमंत्री की इस पहल का मीका सिंह ने स्वागत किया और सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि किसी भी प्रकार की गलतफहमी को आपसी संवाद और सौहार्द के माध्यम से दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने उत्तराखंड की अतिथि देवो भवः परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देवभूमि में सभी कलाकारों का सदैव हृदय से स्वागत है।
इससे पहले भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा था कि कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल उस समय जनता के दबाव में थे। उन्हें जानकारी नहीं थी कि दलेर मेहंदी की तबीयत खराब है। मुख्यमंत्री के अनुसार, गलतफहमी के कारण यह घटनाक्रम हुआ। उन्होंने कहा कि सुबोध उनियाल ने भी खेद व्यक्त किया है।
विवाद कुंजापुरी मेले में दलेर मेहंदी की प्रस्तुति को लेकर पैदा हुआ था। मंत्री सुबोध उनियाल ने सफाई देते हुए कहा था कि दलेर मेहंदी बड़े कलाकार हैं और इसी वजह से उन्हें मेले में आमंत्रित किया गया था। प्रस्तुति के दौरान उन्हें ऐसा लगा कि गायक केवल होंठ हिला रहे हैं। आयोजन समिति से जुड़े होने के कारण उन पर सवाल उठाने वाले लोगों का दबाव भी था। मंत्री ने कहा था कि उन्हें गायक की खराब तबीयत की जानकारी नहीं थी।
मुख्यमंत्री ने दलेर मेहंदी और मीका सिंह को अपना अच्छा मित्र बताते हुए मामले को समाप्त करने की अपील की। उनकी पहल का उद्देश्य विवाद को आगे बढ़ाने के बजाय संवाद के माध्यम से सौहार्द बनाए रखना है।
खिलाड़ियों को उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में मुफ्त सफर
धामी कैबिनेट ने प्रदेश के खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पुरस्कार प्राप्त खिलाड़ी उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में निश्शुल्क यात्रा कर सकेंगे।
इस फैसले से प्रतियोगिताओं में भाग लेने और खेल उपलब्धियों के लिए सम्मानित खिलाड़ियों को आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है। राज्य सरकार का उद्देश्य खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना और खेल गतिविधियों में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देना है।
कैबिनेट ने ‘एक जिला, एक खेल’ योजना के अंतर्गत 14 मुख्य प्रशिक्षकों की नियुक्ति के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। योजना के तहत प्रत्येक जिले में एक मुख्य प्रशिक्षक और खेल निदेशालय में एक प्रशिक्षक तैनात किया जाएगा।
इन प्रशिक्षकों की नियुक्ति भारतीय खेल प्राधिकरण की ओर से निर्धारित योग्यता और अनुभव के आधार पर की जाएगी। प्रस्ताव के अनुसार, प्रत्येक प्रशिक्षक को 1.45 लाख रुपये का नियत मानदेय दिया जाएगा।
खेलों में प्रतिभाओं को निखारने के लिए प्रशिक्षकों की उपलब्धता महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में यह निर्णय प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम हो सकता है। हालांकि, योजना का वास्तविक लाभ नियुक्तियों की समयबद्ध प्रक्रिया, प्रशिक्षकों की उपलब्धता और जिलों में खेल सुविधाओं के विकास पर निर्भर करेगा।
साहसिक पर्यटन के लिए बनेगा उत्तराखंड एडवेंचर टूरिज्म कारपोरेशन
कैबिनेट ने प्रदेश में साहसिक और पर्यावरणीय पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ उसे सुरक्षित बनाने के लिए उत्तराखंड एडवेंचर टूरिज्म कारपोरेशन के गठन को भी मंजूरी दी है।
प्रस्ताव के अनुसार, इस कंपनी का गठन उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड और उत्तराखंड निवेश एवं आधारभूत संरचना विकास बोर्ड के संयुक्त उपक्रम के रूप में किया जाएगा।
उत्तराखंड में पर्वतारोहण, ट्रेकिंग और अन्य साहसिक गतिविधियों की व्यापक संभावनाएं हैं। ऐसे में नए कारपोरेशन का उद्देश्य पर्यटन गतिविधियों को व्यवस्थित करना, सुरक्षा मानकों पर ध्यान देना और पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को प्रोत्साहित करना होगा। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट जिम्मेदारियां, सुरक्षा प्रोटोकॉल और पर्यावरण संरक्षण के उपाय महत्वपूर्ण रहेंगे।
कैबिनेट के अन्य फैसले
कैबिनेट ने उत्तराखंड सिविल विधि संशोधन विधेयक, 2026 को स्वीकृति दी। उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग की वर्ष 2019-22 की वार्षिक रिपोर्ट सदन के पटल पर रखने को भी मंजूरी दी गई।
वित्तीय डाटा सेंटर के तकनीकी संवर्ग के पुनर्गठन को स्वीकृति प्रदान की गई। इसके तहत कार्मिकों को तीन वर्ष के लिए आउटसोर्स के माध्यम से रखने का प्रस्ताव है। विभागीय लेखा निदेशालय में कनिष्ठ सहायक के पांच नए पद सृजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समूह ग और घ के कार्मिकों की सेवा नियमावली को भी मंजूरी दी गई।
इन फैसलों का उद्देश्य विभिन्न विभागों की प्रशासनिक और तकनीकी व्यवस्थाओं को मजबूत करना बताया गया है।
अदाणी पावर से 1234 मेगावाट बिजली खरीद पर आयोग ने मांगा जवाब
उत्तराखंड में अदाणी पावर से 1234 मेगावाट बिजली खरीदने की प्रस्तावित योजना को लेकर उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) से स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग ने बिजली खरीद की अवधि में अंतर और टोरेंट पावर लिमिटेड के बोली प्रक्रिया से हटने के मामले में जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।
गुरुवार को सुनवाई के बाद आयोग ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। यूपीसीएल ने 25 साल के लिए बिजली खरीदने की योजना बनाई है। इसके लिए प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया अपनाई गई थी। जांच के दौरान आयोग ने दस्तावेजों में दो महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सवाल उठाए हैं।
25 साल की योजना, दस्तावेज में करीब 20 साल की अवधि
बिजली खरीद से संबंधित दस्तावेजों में अवधि एक जुलाई, 2029 से 30 जून, 2049 तक दर्ज है। यह करीब 20 साल की अवधि बनती है, जबकि बिजली खरीद 25 साल के लिए प्रस्तावित बताई गई है।
आयोग ने यूपीसीएल से पूछा है कि जब खरीद की योजना 25 साल की है तो संबंधित दस्तावेजों में अवधि कम क्यों दर्शाई गई है। इस अंतर पर कंपनी को स्पष्टीकरण देना होगा।
टोरेंट पावर के बोली प्रक्रिया से हटने पर भी सवाल
आयोग ने टोरेंट पावर लिमिटेड के बोली प्रक्रिया से हटने से संबंधित दस्तावेज भी मांगे हैं। जानकारी के अनुसार, कंपनी ने प्रक्रिया से हटने के बाद अपनी बोली सुरक्षा राशि वापस मांगी थी।
आयोग ने यूपीसीएल से पूछा है कि इस संबंध में टोरेंट पावर के साथ क्या बातचीत हुई और कंपनी की मांग पर क्या कार्रवाई की गई। दोनों मामलों में आयोग ने जल्द जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।
सुनवाई आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद और दो सदस्यों की पीठ ने की। आयोग का आदेश अभी सुरक्षित है, इसलिए बिजली खरीद की योजना के संबंध में अंतिम निर्णय आना बाकी है।
निष्कर्ष: संवाद, खेल विकास और जवाबदेही की कसौटी पर सरकार
मुख्यमंत्री धामी की ओर से कलाकारों के बीच विवाद सुलझाने की पहल, खिलाड़ियों के लिए निश्शुल्क बस यात्रा और मुख्य प्रशिक्षकों की नियुक्ति जैसे फैसले जनसरोकारों से जुड़े हैं। साहसिक पर्यटन के लिए नए कारपोरेशन का प्रस्ताव भी राज्य की पर्यटन संभावनाओं से जुड़ा है।
दूसरी ओर, 1234 मेगावाट बिजली खरीद के मामले में नियामक आयोग के सवाल यह स्पष्ट करते हैं कि बड़े ऊर्जा समझौतों में दस्तावेजों की शुद्धता, प्रतिस्पर्धी बोली की प्रक्रिया और वित्तीय जवाबदेही का विशेष महत्व है। अब संबंधित पक्षों के जवाब और आयोग के अंतिम आदेश पर नजर रहेगी।
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