ड्रग्स के खिलाफ तीन साल का राष्ट्रव्यापी अभियान: उत्तराखंड भी बनेगा ‘नशा मुक्त भारत’ मिशन का अहम हिस्सा

Spread the love


रुद्रपुर,केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को देश से नशीली दवाओं के खतरे को जड़ से समाप्त करने के लिए 31 मार्च से तीन वर्ष का राष्ट्रव्यापी सघन अभियान शुरू करने की घोषणा की। नारको-कोऑर्डिनेशन सेंटर (एनसीओआरडी) की 9वीं शीर्ष स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अभियान के तहत लक्ष्य निर्धारित कर कार्रवाई की जाएगी और इसकी समयबद्ध समीक्षा भी सुनिश्चित की जाएगी।
गृह मंत्री द्वारा घोषित इस अभियान का सीधा असर उत्तराखंड जैसे सीमावर्ती और संवेदनशील राज्यों पर भी पड़ेगा। उत्तराखंड, जो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़ा होने के साथ-साथ पर्यटन, चारधाम यात्रा और युवाओं की बड़ी आबादी वाला राज्य है, वहां नशे के खिलाफ यह अभियान विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य में बढ़ते नशा तस्करी नेटवर्क, युवाओं में ड्रग्स की लत और सीमावर्ती इलाकों में अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा।
अमित शाह ने निर्देश दिए कि सभी विभाग 31 मार्च तक ड्रग्स के खिलाफ अपना-अपना रोडमैप तैयार करें और एक प्रभावी निगरानी तंत्र स्थापित करें। इसी क्रम में उत्तराखंड पुलिस, एसटीएफ, एएनटीएफ और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों से भी अपेक्षा की जा रही है कि वे राज्य-विशेष रणनीति तैयार कर ड्रग्स नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार करें।
उन्होंने कहा कि अगले तीन वर्षों में देशभर में हर मोर्चे पर नशीली दवाओं के खिलाफ लड़ाई लड़ी जाएगी और भारत को ‘नशा मुक्त’ बनाना लक्ष्य है। युवाओं को नशे से बचाने के लिए निरंतर जागरूकता अभियान चलाना भी इस रणनीति का अहम हिस्सा होगा। उत्तराखंड में शिक्षण संस्थानों, पर्यटन स्थलों और शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम तेज किए जाने की संभावना है।
इस अवसर पर गृह मंत्री ने अमृतसर में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) कार्यालय का वर्चुअल उद्घाटन भी किया। एनसीबी द्वारा हाइब्रिड मोड में आयोजित बैठक में केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिसमें उत्तराखंड से जुड़े अधिकारियों की भागीदारी भी रही।
शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नशीले पदार्थों का निर्माण और बिक्री करने वालों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं बरती जाएगी। सभी राज्यों के डीजीपी को अपने-अपने राज्यों के लिए ठोस रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। उत्तराखंड के लिए यह संदेश खास है, जहां हाल के वर्षों में नशा तस्करी के कई मामले सामने आए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक भारत को विश्व में नंबर एक बनाने के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि स्वस्थ और नशा-मुक्त युवा पीढ़ी के बिना यह सपना पूरा नहीं हो सकता। युवाओं का स्वास्थ्य, सोच और कार्यक्षमता सीधे तौर पर इस समस्या से जुड़ी हुई है।
उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि 2004 से 2013 के बीच देश में 26 लाख किलोग्राम ड्रग्स जब्त की गई, जिसकी कीमत करीब 40 हजार करोड़ रुपये थी, जबकि 2014 से 2025 के बीच 1.11 लाख किलोग्राम ड्रग्स जब्त की गई, जिसकी अनुमानित कीमत 1.71 लाख करोड़ रुपये है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि सख्त नीति और समन्वित प्रयासों से सफलता संभव है।
उत्तराखंड में भी इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत ड्रग्स के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की तैयारी शुरू हो चुकी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में राज्य स्तर पर विशेष अभियान, सख्त कार्रवाई और व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम देखने को मिलेंगे, ताकि देवभूमि को नशे के अभिशाप से मुक्त किया जा सके।


Spread the love