आज बांग्लादेश की आजादी का दिन है, जो भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम का दिन है। 16 दिसंबर के दिन 1971 को भारतीय सेना ने पाक सेना को घुटनों पर ला दिया था। आज का दिन हम विजय दिवस के रूप में जानते हैं।

Spread the love

इसकी यादों में आज भी देहरादून में पाकिस्तान का झंडा उल्टा टंगा है। पाकिस्तान सेना के तत्कालीन पूर्वी कमान के कमांडर जनरल एएके नियाजी की निजी पिस्तौल भी यहां बांग्लादेश की आजादी में भारतीय सेना की गवाही दे रही है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

भारतीय सेना ने 54 साल पहले जिस शौर्य का परिचय दिया, उसकी निशानियां भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में आज भी मौजूद हैं। यहां म्यूजियम में पाकिस्तान का उल्टा झंडा और जनरल नियाजी की पिस्तौल रखी है। जो बताती है कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान को उसके पूर्वी मोर्चे पर किस तरह से परास्त किया था। ये दोनों वस्तुएं उस समय की हैं जब 16 दिसंबर, 1971 को जनरल नियाजी ने 93,000 सैनिकों के साथ भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। इस आत्मसमर्पण की स्मृति में पाकिस्तानी ध्वज को यहां उल्टा टांगा गया है।

उत्तराखंड का विस्मरणीय योगदान

बांग्लादेश को आजादी दिलाने वाले इस युद्ध में उत्तराखंड के 255 वीर सैनिकों ने शहादत दी थी। उत्तराखंड के 74 जाबांजों को सम्मानित किया गया था।

1982 में आईएमए को सौंपी दी पिस्टल: पूर्वी कमान का नेतृत्व करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा ने 1982 में आईएमए को पिस्टल भेंट की थी। उन्हें यह पिस्टल पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण करने के दौरान जनरल नियाजी ने दी थी।

वीर सैनिकों के साहस को याद कर किया नमन

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विजय दिवस की पूर्व संध्या पर जारी संदेश में कहा कि यह भारतीय सशस्त्र सेनाओं के पराक्रम, बलिदान और गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है। यह दिन न केवल 1971 के युद्ध में प्राप्त ऐतिहासिक विजय का स्मरण कराता है, बल्कि उन वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर देता है।


Spread the love