

सितारगंज क्षेत्र में सामने आया एफडी और दैनिक जमा से जुड़ा यह मामला केवल 11 खाताधारकों की ठगी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छोटे कस्बों में पनप रहे फर्जी वित्तीय संस्थानों के खतरनाक नेटवर्क की ओर इशारा करता है। वासुरी म्यूचुअल बेनिफिट इंडिया लिमिटेड द्वारा स्थानीय लोगों को सुरक्षित निवेश और बेहतर रिटर्न का सपना दिखाकर लाखों रुपये जमा कराना और फिर अचानक कंपनी का बंद हो जाना गंभीर चिंता का विषय है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में सीमित वित्तीय जागरूकता का लाभ उठाकर इस तरह की कंपनियां आमजन की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रही हैं। सितारगंज में जून 2023 से सक्रिय इस कंपनी ने एफडी और दैनिक जमा योजनाओं के जरिए भरोसा जीता, लेकिन समय पर भुगतान न होना और एजेंट द्वारा टालमटोल करना साफ तौर पर धोखाधड़ी की मंशा को दर्शाता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसी कंपनियां बिना पुख्ता जांच के कैसे शाखाएं खोल लेती हैं और लंबे समय तक काम करती रहती हैं? क्या स्थानीय प्रशासन और नियामक एजेंसियों की भूमिका केवल शिकायत के बाद सक्रिय होने तक ही सीमित है? यह मामला सिस्टम की ढिलाई और निगरानी तंत्र की कमजोरी को भी उजागर करता है।
पुलिस द्वारा कंपनी के चेयरमैन, एमडी, डायरेक्टर और एजेंट के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना सही दिशा में कदम है, लेकिन पीड़ितों की जमा राशि की वापसी और दोषियों को सख्त सजा दिलाना असली परीक्षा होगी। साथ ही, प्रशासन को चाहिए कि ऐसे संदिग्ध निवेश संस्थानों की समय रहते पहचान कर जनता को सचेत करे।
यह प्रकरण एक चेतावनी है—आकर्षक रिटर्न के लालच में बिना जांच-पड़ताल निवेश करना आमजन के लिए घातक साबित हो सकता है। अब जरूरत है सख्त कार्रवाई, तेज जांच और व्यापक जागरूकता की, ताकि भविष्य में भरोसे की इस तरह की लूट को रोका जा सके।




