उत्तराखंड। उत्तराखंड में मानसून की लगातार सक्रियता ने पहाड़ों में जनजीवन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नैनीताल से लेकर चंपावत और रुद्रप्रयाग तक लगातार बारिश, भूस्खलन और पहाड़ी से गिरते बोल्डरों ने खतरे की स्थिति पैदा कर दी है। नैनीताल में भारी भूस्खलन से सिंचाई विभाग का अस्थायी स्टोर और मजदूरों के आवास क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि चंपावत में पहाड़ी से अचानक गिरे भारी बोल्डर की चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गई और चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। उधर, केदारनाथ की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी से ठंड बढ़ गई है और रुद्रप्रयाग जिले में बारिश के कारण 14 सड़क मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
नैनीताल में कृष्णापुर की पहाड़ी पर भारी भूस्खलन
नैनीताल शहर में पिछले करीब एक सप्ताह से हो रही मूसलधार बारिश के बीच रविवार देर रात कृष्णापुर की पहाड़ी पर भारी भूस्खलन हो गया। बलियानाला के समीप हुई इस घटना में पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बड़े बोल्डर नीचे आकर बलियानाला में समा गए। भूस्खलन की चपेट में सिंचाई विभाग की ओर से बनाया गया अस्थायी स्टोर और मजदूरों के आवास भी आ गए, जिससे दोनों ढांचे क्षतिग्रस्त हो गए।
हादसे की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि जिस स्थान पर भूस्खलन हुआ, उसके आसपास महत्वपूर्ण संस्थान और सुरक्षा कार्य मौजूद हैं। राहत की बात यह रही कि जिस समय पहाड़ी दरकी, उस दौरान मजदूरों के आवासों में कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। इससे बड़ा हादसा टल गया।
भूस्खलन के बाद कृष्णापुर क्षेत्र में खतरा बढ़ गया है। पहाड़ी के नीचे स्थित पार्वती प्रेमा जगाती विद्यालय और बलियानाला में चल रहे रोकथाम कार्यों पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है। लगातार बारिश के बीच पहाड़ी का भूगर्भीय दबाव बढ़ने से स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है। प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने अब प्रभावित क्षेत्र की निगरानी बढ़ाने और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की चुनौती है।
चंपावत में कार पर गिरा बोल्डर, एक की मौत
चंपावत जिले के बाराकोट ब्लॉक में घाट-पनार मोटर मार्ग पर घाट मसान देवता मंदिर के पास सोमवार को दर्दनाक हादसा हो गया। पहाड़ी से अचानक भारी बोल्डर गिरने से पांच युवक इसकी चपेट में आ गए। हादसे में संदीप कुमार, उम्र 35 वर्ष, पुत्र भवानी राम की मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
जानकारी के अनुसार यूके-05टीए-2878 नंबर की अल्टो कार टिम्टा, गंगोलीहाट से पिथौरागढ़ की ओर जा रही थी। घाट मसान देवता मंदिर के पास सड़क बंद होने के कारण चालक ने वाहन को सड़क किनारे खड़ा किया था। कार में दो युवक बैठे थे, जबकि तीन युवक बाहर खड़े थे। इसी दौरान अचानक पहाड़ी से भारी बोल्डर गिरा और पांचों युवक उसकी चपेट में आ गए।
हादसे में सौरभ कुमार, 24 वर्ष, पुत्र नरेंद्र कुमार, संदीप कुमार, 35 वर्ष, पुत्र भवानी राम, सुनील कुमार, 23 वर्ष, पुत्र आनंद राम, सुभाष चंद्र, 44 वर्ष, पुत्र शिवराम और सुजल कुमार, 17 वर्ष, पुत्र कृष्ण राम घायल हो गए। सभी टिम्टा के निवासी बताए गए हैं।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। पुलिस, राजस्व, फायर, एसडीआरएफ और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने संयुक्त रूप से राहत और बचाव अभियान शुरू किया। खाई में फंसे घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से बाहर निकाला गया।
गंभीर रूप से घायल संदीप कुमार और सुनील कुमार को 108 एंबुलेंस सेवा से उप जिला अस्पताल लोहाघाट लाया गया। चिकित्सकों ने संदीप कुमार को मृत घोषित कर दिया। उप जिला अस्पताल के एमएस डॉ. विराज राठी के अनुसार सुनील कुमार के सिर में गंभीर चोट लगी है। उसे बेहतर उपचार के लिए चंपावत रेफर किया गया। वहीं सौरभ कुमार, सुभाष चंद्र और सुजल कुमार को उपचार के लिए पिथौरागढ़ भेजा गया।
डीएम मनीष कुमार के निर्देश पर एसडीएम नीतू डांगर भी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचीं और राहत-बचाव कार्यों का जायजा लिया। मदन सिंह सामंत, शमशेर सिंह, मोहन सिंह, महेंद्र सिंह और पंकज तिवारी समेत स्थानीय लोगों ने भी बचाव अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पीछे खड़ी दूसरी कार भी क्षतिग्रस्त
बोल्डर गिरने से जहां एक कार उसकी चपेट में आ गई, वहीं पीछे खड़ी दूसरी अल्टो कार यूके-05टीए-4664 भी पत्थरों की चपेट में आ गई। स्थानीय लोगों के अनुसार दूसरी कार को भी आंशिक नुकसान पहुंचा है। घटना ने पहाड़ी मार्गों पर बारिश के दौरान वाहन रोकने के जोखिम को एक बार फिर सामने ला दिया है।
केदारनाथ की चोटियों पर बर्फबारी, बढ़ी ठंड
रुद्रप्रयाग जिले में बारिश के साथ मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। केदारनाथ धाम की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी होने से तापमान में गिरावट आई है और केदारनाथ धाम, गौरीकुंड तथा आसपास के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंड बढ़ गई है। पिछले तीन दिनों से जिले में रुक-रुककर बारिश जारी है। सोमवार सुबह भी कई स्थानों पर हल्की वर्षा हुई।
जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र की ओर से सुबह 8:12 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार जिले में न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। तहसीलों से मिले आंकड़ों के अनुसार रुद्रप्रयाग में 10 मिलीमीटर, ऊखीमठ में 20 मिलीमीटर और जखोली में 16.50 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
नदियां चेतावनी स्तर से नीचे, 14 सड़कें बंद
लगातार बारिश के बावजूद जिले की प्रमुख नदियों का जलस्तर फिलहाल चेतावनी स्तर से नीचे बना हुआ है। सुबह आठ बजे अलकनंदा नदी का जलस्तर 625.10 मीटर और मंदाकिनी नदी का जलस्तर 624.30 मीटर दर्ज किया गया।
हालांकि लगातार वर्षा के कारण सड़क संपर्क पर व्यापक असर पड़ा है। रुद्रप्रयाग जिले में दो राज्य मार्गों समेत कुल 14 सड़क मार्ग अवरुद्ध बताए गए हैं। इनमें लोक निर्माण विभाग के चार और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के आठ मार्ग शामिल हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात फिलहाल सामान्य बताया गया है।
प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को आपदा और दुर्घटना की किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सतर्क रहने तथा आवश्यक तैयारियां बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
बारिश ने बढ़ाई पहाड़ों की चुनौती
नैनीताल में पहाड़ी दरकने, चंपावत में बोल्डर गिरने से मौत और रुद्रप्रयाग में सड़क मार्ग बंद होने की घटनाएं बताती हैं कि लगातार बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में खतरा कई स्तरों पर बढ़ जाता है। कहीं भूस्खलन से आबादी और निर्माण प्रभावित हो रहे हैं तो कहीं सड़क पर अचानक गिरते पत्थर यात्रियों की सुरक्षा के लिए चुनौती बन रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार बारिश के दौरान पहाड़ी ढलानों पर अतिरिक्त पानी पहुंचने से मिट्टी और चट्टानों की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में संवेदनशील क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही पर नियंत्रण, सड़क किनारे वाहनों को सुरक्षित स्थानों पर खड़ा करना और प्रशासनिक निगरानी बढ़ाना बेहद जरूरी है।
फिलहाल मौसम की सक्रियता को देखते हुए पहाड़ी जिलों में प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर बंद सड़कों को खोलकर यातायात बहाल करना और दूसरी ओर संवेदनशील पहाड़ियों, नदियों तथा निर्माण स्थलों पर संभावित आपदा से लोगों को सुरक्षित रखना। लगातार बारिश के बीच आने वाले दिनों में भी भूस्खलन और सड़क अवरोध की घटनाओं पर निगरानी बनाए रखना जरूरी होगा।
