यमन की सरकार ने लाल सागर के तट पर और सैनिक भेजने व हूतियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने की बात कही है। पिछले हफ्ते हूतियों ने महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर मोखा और बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य के पास एक द्वीप पर कब्जा कर लिया था। यह इलाका वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हूतियों के बढ़ते हमलों से सऊदी अरब के तेल ठिकानों और लाल सागर में जहाजों को खतरा बढ़ गया है। इससे वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई और कीमतों पर असर पड़ने की आशंका है। यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष के फिर बड़े युद्ध में बदलने का खतरा भी बढ़ गया है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
सऊदी अरब में हमले का दावा
हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब के ठिकानों और एक सैन्य बेस को निशाना बनाने के लिए ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। सऊदी अरब के अबहा शहर और खमीस मुशैत इलाके में रविवार को हमले की चेतावनी के लिए सायरन बजाए गए। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, यमन की सीमा के पास एक प्रोजेक्टाइल (गोले) की चपेट में आने से दो लोग घायल हुए और एक मस्जिद समेत कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं।
यमन में 82 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित
संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी के मुताबिक, सितंबर की शुरुआत से अब तक 82 हजार से अधिक लोग यमन में अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। बड़ी संख्या में लोग राहत शिविरों और सड़कों पर रहने के लिए मजबूर हैं। यमन के सरकारी बलों से जुड़े एक संगठन ने दावा किया है कि पिछले चार हफ्तों में लाल सागर के पश्चिमी तट पर उसके 500 से अधिक सरकारी सैनिक मारे गए हैं। वहीं, उसने दावा किया कि होदेदा और ताइज प्रांतों में 1,000 से ज्यादा हूती विद्रोही मारे गए।
जिबूती तक पहुंचा संघर्ष का असर
हूतियों के कब्जे वाले इलाकों का विस्तार अब जिबूती में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे से करीब 32 किलोमीटर दूर तक पहुंच गया है। जिबूती में चीन, फ्रांस और जापान समेत कई देशों के सैन्य अड्डे भी हैं। लड़ाई से बचकर 2,000 से ज्यादा यमनी लोग जिबूती पहुंच चुके हैं। उन्हें समुद्र के रास्ते बेहद जोखिम भरी यात्रा करनी पड़ी। इस बीच यमन के अंदर विस्थापित लोगों के लिए खाने, रहने और इलाज की व्यवस्था बड़ी चुनौती बन गई है। यमन में सरकार और हूतियों के बीच 2022 में युद्धविराम हुआ था, जिसके बाद लड़ाई काफी हद तक रुक गई थी। लेकिन हालिया घटनाओं ने देश में एक बार फिर बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है।
