रूद्रपुर। ग्राम सभा किरतपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ अवसर पर भव्य कलश यात्रा निकाली गई। धार्मिक आस्था, श्रद्धा और उत्साह से ओतप्रोत इस आयोजन में क्षेत्रभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों की मौजूदगी से कलश यात्रा अत्यंत आकर्षक और भव्य दिखाई दी। पूरे मार्ग में “जय श्री राधे”, “जय श्री कृष्ण” और “हरि नाम संकीर्तन” के जयघोष गूंजते रहे, जिससे संपूर्ण क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।
कलश यात्रा कथा स्थल से विधिवत पूजा-अर्चना के बाद प्रारंभ हुई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर सजे हुए कलश धारण किए और भजन-कीर्तन करते हुए नगर भ्रमण किया। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान के भजनों का गायन किया, जिससे पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता दिखाई दिया। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया तथा जलपान की व्यवस्था भी की गई।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल का आयोजन समिति और ग्रामीणों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने श्रद्धालुओं का अभिवादन करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को नैतिक मूल्यों, संस्कारों, सेवा, सद्भाव और आपसी भाईचारे का संदेश देते हैं।
राजकुमार ठुकराल ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में समाज को आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है। श्रीमद्भागवत कथा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक सोच, संयम, सेवा और धर्म के प्रति आस्था का संचार करती है। उन्होंने कहा कि जब समाज धार्मिक आयोजनों से जुड़ता है तो सामाजिक एकता मजबूत होती है और नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को जानने और अपनाने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम सामाजिक समरसता को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कलश यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सुसज्जित होकर सिर पर कलश धारण किए और पूरे मार्ग में भक्ति गीत गाते हुए वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। युवा वर्ग ने यात्रा की व्यवस्थाओं को संभालते हुए अनुशासन बनाए रखा, जबकि बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने पूरे आयोजन में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई। बच्चों की उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक आकर्षक बना दिया।
धार्मिक आयोजन में जिला पंचायत सदस्य एडवोकेट सर्वेश सिंह भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं और लोगों के भीतर सेवा, सद्भाव तथा आध्यात्मिक चेतना का विकास करते हैं। उन्होंने आयोजन समिति को सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं और कथा के सफल एवं मंगलमय आयोजन की कामना की।
इस अवसर पर प्रदीप यादव, मलखान सिंह, सर्वेश सिंह, आशीष यादव, सन्ना गुप्ता, ललित बिष्ट, दिनेश चौहान, मनोज वैष्णव महाराज, संदीप महाराज, विनीत महाराज तथा रोहित महाराज सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने कथा आयोजन को समाज के लिए प्रेरणादायी बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभागिता करने का आह्वान किया।
कथा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। फूलों की मनमोहक सजावट, रंग-बिरंगी झालरों और धार्मिक ध्वजों से पूरा परिसर अलौकिक छटा बिखेर रहा था। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बैठने, पेयजल, प्रसाद वितरण तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई थीं। आयोजन समिति के सदस्यों और स्वयंसेवकों ने पूरे कार्यक्रम को व्यवस्थित और सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ग्रामीणों का कहना था कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन गांव में आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण करते हैं और लोगों के बीच आपसी प्रेम, सहयोग तथा सामाजिक एकता को मजबूत बनाते हैं। श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से धर्म, भक्ति और मानव जीवन के आदर्शों का संदेश जन-जन तक पहुंचता है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होता है।
कलश यात्रा के सफल आयोजन के साथ ही श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हो गया। आगामी दिनों में कथा वाचन के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, धर्म, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य से जुड़े प्रसंगों का रसपान श्रद्धालु करेंगे। आयोजन समिति ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में कथा श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त करने की अपील की है।
भक्ति, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना से परिपूर्ण यह आयोजन ग्राम सभा किरतपुर के लिए एक यादगार अवसर बन गया, जहां धर्म, संस्कृति और सामाजिक एकता का सुंदर संगम देखने को मिला।
