दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार (25 जुलाई 2026) को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और आंदोलन खत्म होने के ऐलान के ठीक बाद कुछ उपद्रवियों द्वारा की गई भारी पत्थरबाजी में स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस (Special CP) अनिल शुक्ला सहित तीन वरिष्ठ पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
इस हिंसक घटना और पुलिस की कार्रवाई को लेकर मुख्य अपडेट्स इस प्रकार हैं:
घटनाक्रम और हिंसा की वजह
- अचानक हुआ हमला: शनिवार शाम जब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर भीड़ को नियंत्रित किया जा रहा था, तभी प्रदर्शनकारियों के बीच छिपे कुछ उपद्रवी उग्र हो गए। उन्होंने सुरक्षा बलों पर अचानक पत्थरों और पानी की बोतलों से हमला कर दिया।
- वरिष्ठ अधिकारी घायल: इस पथराव में भीड़ का प्रबंधन संभाल रहे स्पेशल सेल के स्पेशल सीपी अनिल शुक्ला और दो अन्य मैदानी अधिकारी घायल हो गए, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
- पुलिस की जवाबी कार्रवाई: स्थिति को अनियंत्रित होते देख पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने हल्का लाठीचार्ज किया और उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले (Tear Gas) दागे। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस ने स्थिति पर पूरी तरह काबू पा लिया।
हाई-टेक कैमरों से उपद्रवियों की पहचान
- फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS): दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन स्थल के एंट्री और एग्जिट गेट पर एडवांस फेशियल रिकॉग्निशन कैमरे लगाए थे।
- 2500 उपद्रवियों की पहचान: पुलिस डेटाबेस से जुड़े इन कैमरों की मदद से भीड़ में घुसकर दंगा और पथराव करने वाले 2500 से ज्यादा क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले संदिग्ध लोगों की पहचान की जा चुकी है।
- कानूनी कार्रवाई: इस मामले में अब तक 15 से ज्यादा एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी और FRS फुटेज के आधार पर पत्थरबाजों के चेहरे रिकॉर्ड कर लिए गए हैं और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
