पंचम नवरात्रि पर माँ स्कंदमाता की आराधना से शांति, सद्बुद्धि और आरोग्य की कामना
धार्मिक समाचार। शारदीय नवरात्रि के पंचम दिवस पर माँ दुर्गा के पांचवें स्वरूप माँ स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है। ज्योतिषाचार्य एवं कर्मकांड विशेषज्ञ उच्च कुलीन ब्राह्मण पंडित त्रिलोचन पनेरु के अनुसार, माँ स्कंदमाता की आराधना भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख-शांति, सद्बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
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माँ स्कंदमाता का दिव्य स्वरूप
पंडित त्रिलोचन पनेरु ने बताया कि माँ स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय अर्थात स्कंद की माता हैं। उनकी गोद में बाल स्वरूप भगवान स्कंद विराजमान रहते हैं। कमल के आसन पर विराजने के कारण उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। माँ का यह स्वरूप ममता, करुणा, वात्सल्य और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ स्कंदमाता की चार भुजाएँ हैं। उनके दो हाथों में कमल पुष्प सुशोभित हैं, एक हाथ में बाल स्कंद विराजमान हैं, जबकि दूसरा हाथ भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करने की मुद्रा में रहता है। उनका वाहन सिंह है। माँ की आराधना से साधक को आध्यात्मिक शांति और आत्मबल प्राप्त होने की मान्यता है।
माँ स्कंदमाता का पूजन मंत्र
पंडित त्रिलोचन पनेरु के अनुसार, नवरात्रि के पांचवें दिन श्रद्धालुओं को माँ स्कंदमाता का ध्यान करते हुए निम्नलिखित श्लोक का पाठ करना चाहिए।
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदा सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी॥
केले और खीर का लगाएं भोग
धार्मिक परंपराओं में माँ स्कंदमाता को केले का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही दूध, खीर और दूध से बने मिष्ठान का नैवेद्य भी अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और भक्तिभाव से किया गया पूजन माता की कृपा प्राप्त करने का माध्यम बनता है।
जानिए माँ स्कंदमाता की पूजन विधि
पंडित त्रिलोचन पनेरु ने बताया कि पंचम नवरात्रि पर प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद पूजा स्थल को साफ करना चाहिए। इसके बाद माँ स्कंदमाता का ध्यान कर दीप प्रज्वलित करें। माता को रोली, अक्षत, कुमकुम, पुष्प और सुगंधित पदार्थ अर्पित करें। इसके पश्चात केले या खीर का भोग लगाकर ॐ स्कंदमात्रै नमः मंत्र का 108 बार जाप करें। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार दुर्गा सप्तशती का पाठ कर कपूर और दीपक से माता की आरती कर सकते हैं।
माँ से करें सुख, शांति और सद्बुद्धि की प्रार्थना
पंडित त्रिलोचन पनेरु ने कहा कि नवरात्रि केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संयम और सदाचार को जीवन में अपनाने का अवसर भी है। मनुष्य को अपनी व्यस्त दिनचर्या के बीच मानसिक शांति, पारिवारिक सद्भाव और सामाजिक जिम्मेदारियों के लिए भी समय निकालना चाहिए।
पंचम नवरात्रि पर माँ स्कंदमाता के चरणों में प्रार्थना करें कि वे सभी के जीवन में सुख-शांति, सद्बुद्धि, शक्ति और आरोग्य प्रदान करें। माता की कृपा से प्रत्येक परिवार में प्रेम, सौहार्द और सकारात्मकता का संचार हो।
जय माता दी! हर-हर महादेव!
