अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2009 के फोर्ट हूड हमले के दोषी निदाल हसन को फायरिंग स्क्वॉड के जरिए मौत की सजा देने की मंजूरी दे दी है. अमेरिका के रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने बताया कि रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की सिफारिश के बाद ट्रंप ने इस फैसले को मंजूरी दी गई. राष्ट्रपति ट्रंप की मंजूरी के बाद सेना के अधिकारी ये तय करेंगे कि हसन को कब और कहां मृत्युदंड दिया जाएगा.

आपको बताते चलें अमेरिका के पांच राज्यों में ‘फायरिंग स्क्वॉड’ से मृत्युदंड देने की व्यवस्था को कानूनी मंजूरी पहले से मिल चुकी है.

इन राज्यों में इडाहो, मिसिसिपी, ओक्लाहोमा, साउथ कैरोलिना और यूटा शामिल हैं. हालांकि, निडाल हसन का मामला अमेरिका की मिलिट्री कोर्ट में चल रहा था, इसलिए इस पर संभलकर बयानबाजी हो रही है.

रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी

क्या था पूरा मामला?

हसन अमेरिकी सेना में मनोचिकित्सक था, कट्टरपंथियों के प्रभाव में आकर उसने मानसिक संतुलन खोते हुए कई फौजियों को मौत के घाट उतार दिया. 2013 में मिलिट्री कोर्ट ने उसे 13 लोगों की हत्या और 32 लोगों की हत्या के प्रयास का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी. तभी से वो कंसास की फोर्ट लीवेनवर्थ में ‘सैन्य डेथ रो’ यानी मौत की सजा पाए कैदियों के लिए बनी जेल में पर बंद है. हसन की मौत की सजा की तामील अब रक्षा विभाग के अधिकारियों की निगरानी में होगी.

मौलवी ने किया था ब्रेनवाश

5 नवंबर 2009 को, जॉर्डन मूल के अमेरिकी नागरिक और अमेरिकी सेना में बतौर मेजर तैनात निदाल हसन ने टेक्सास की मिलिट्री पोस्ट के अंदर ‘सोल्जर रेडीनेस प्रोसेसिंग सेंटर’ में अंधाधुंध गोलीबारी की थी. हैंडगन से लैस हसन ने अल्लाहु अकबर का नारा लगाते हुए निहत्थे सैनिकों पर गोलियां चलाई थीं. उस भीषण हमले में हसन ने 13 लोगों (जिनमें एक प्रेग्नेंट सैनिक भी शामिल थी) की जान लेने के साथ 32 अन्य को घायल कर दिया था.

पुलिस ने बताया कि हसन कट्टरपंथी मौलवी अनवर अल-अवलाकी जैसे कई लोगों के संपर्क में आने के बाद काफिरों को निपटाना चाहता था.

2013 में कोर्ट मार्शल

हसन पर ‘यूनिफॉर्म कोड ऑफ मिलिट्री जस्टिस’ के तहत मुकदमा चला. अगस्त 2013 में उसका कोर्ट-मार्शल हुआ, जहां उसने अपना बचाव खुद करते हुए हमला करने की बात स्वीकारी. एक मिलिट्री जूरी ने उसे पहले से योजना बनाकर की गई हत्याओं के मामलों में दोषी ठहराने के बाद मौत की सजा सुनाई थी. तभी से वो कंसास के फोर्ट लेवेनवर्थ स्थित ‘यूनाइटेड स्टेट्स डिसिप्लिनरी बैरक्स’ में मौत की सजा पाने वालों के लिए बनी जेल में बंद हैं.