खटीमा, सनातन श्री रामलीला पात्र परिषद द्वारा आयोजित रामलीला मंचन में प्रतिदिन भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों का भव्य, भावपूर्ण और आकर्षक मंचन किया जा रहा है। आज के कार्यक्रम में वनवास प्रसंग के अंतर्गत शूर्पणखा का भगवान श्रीराम को देखकर मोहित होना, लक्ष्मण द्वारा उसकी नासिका का छेदन, खर-दूषण वध, रावण-मारीच संवाद, सीता हरण और भगवान श्रीराम के विलाप जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से दर्शकों को रामायण की घटनाओं से जोड़ते हुए धर्म, मर्यादा, कर्तव्य और अधर्म के परिणामों का संदेश दिया।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स अवतार सिंह बिष्ट उत्तराखंड | देश-दुनिया की खबरों पर नजर
रामलीला के दौरान पंचवटी वन का दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। वनवास के दौरान भगवान श्रीराम को देखकर शूर्पणखा उनके पुरुषार्थ, सौंदर्य और तेजस्वी व्यक्तित्व से मंत्रमुग्ध हो जाती है। वह भगवान श्रीराम के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखती है। भगवान श्रीराम मर्यादापूर्ण संवाद करते हुए उसे लक्ष्मण के पास जाने का निर्देश देते हैं। इसके बाद शूर्पणखा लक्ष्मण को अपने आकर्षण में बांधने का प्रयास करती है, लेकिन लक्ष्मण उसके प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करते।
शूर्पणखा के बार-बार प्रयास करने और परिस्थितियों के नाटकीय रूप लेने के बाद लक्ष्मण उसकी नासिका का छेदन कर उसे वहां से भगा देते हैं। इस प्रसंग का मंचन कलाकारों ने प्रभावशाली संवादों और अभिनय के साथ किया। शूर्पणखा के अपमान का समाचार मिलने के बाद खर-दूषण के साथ संघर्ष और उनके वध का दृश्य भी प्रस्तुत किया गया। इस घटनाक्रम ने दर्शकों के सामने रामायण के उस महत्वपूर्ण मोड़ को जीवंत कर दिया, जो आगे चलकर लंका के राजा रावण और भगवान श्रीराम के बीच महासंग्राम की भूमिका तैयार करता है।
इसके बाद रावण और मारीच के बीच संवाद का मंचन किया गया। रावण अपनी योजना को सफल बनाने के लिए मारीच की सहायता लेता है। स्वर्ण मृग के प्रसंग के माध्यम से सीता हरण की भूमिका तैयार होती है। रावण छलपूर्वक माता सीता का हरण कर लेता है। माता सीता के न मिलने पर भगवान श्रीराम की व्याकुलता, उनकी खोज और विलाप के दृश्यों ने दर्शकों को भावुक कर दिया। कलाकारों ने इन प्रसंगों के माध्यम से रामायण की कथा को सजीव रूप में प्रस्तुत किया।
रामलीला मंचन का उद्देश्य केवल धार्मिक प्रसंगों का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी तक भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं, नैतिक मूल्यों और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को पहुंचाना भी है। आयोजन में उपस्थित श्रद्धालुओं ने मंचन का आनंद लिया और कलाकारों के अभिनय की सराहना की।
समाजसेवा में योगदान के लिए दो संस्थाओं का सम्मान
रामलीला मंचन के साथ कार्यक्रम में सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली दो प्रतिष्ठित संस्थाओं को सम्मानित भी किया गया। सनातन श्री रामलीला पात्र परिषद की ओर से उत्तरांचल पंजाबी महासभा और भारत विकास परिषद को समाजसेवा के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया।
इस अवसर पर दोनों संस्थाओं के सामाजिक कार्यों और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारियों को सम्मानित करने की पहल को कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया। धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन के मंच से समाजसेवी संस्थाओं का सम्मान करना सामाजिक सहयोग, सेवा भावना और आपसी समन्वय को प्रोत्साहित करने वाला कदम है। रामलीला परिषद की इस पहल ने यह संदेश दिया कि धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के साथ समाजहित में कार्य करने वाले संगठनों का उत्साहवर्धन भी आवश्यक है।
रामलीला के मंच से किया गया यह सम्मान समारोह सांस्कृतिक आयोजनों और सामाजिक सरोकारों के बीच मजबूत संबंध को दर्शाता है। ऐसे कार्यक्रम समाज में सेवा, सहयोग और सांस्कृतिक चेतना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आयोजन में ये गणमान्य लोग रहे उपस्थित
कार्यक्रम में रामलीला कमेटी के संरक्षक राजीव अग्रवाल, दीपक बत्रा और रमेश सिंघल सहित अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल उपस्थित रहे। इनके साथ मनोज वाधवा, राजेश श्रीवास्तव, सतीश गोयल, संतोष अग्रवाल, नीरज वर्मा, सुनील रैदानी, जितिन ग्रोवर, हरीश बत्रा, विजय अरोड़ा, जतिन बत्रा, सचिन विज, दुष्यंत गुंबर, रितेश टंडन, अश्वनी गुंबर, मुकेश गुप्ता, अनिल बत्रा, राजू बत्रा और हरीश जोशी सहित अन्य गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
रामलीला परिषद के आयोजन में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक सम्मान का सुंदर समन्वय देखने को मिला। भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों के मंचन ने जहां दर्शकों को रामायण की कथा से जोड़ा, वहीं उत्तरांचल पंजाबी महासभा और भारत विकास परिषद का सम्मान समाजसेवा के महत्व को रेखांकित करता नजर आया।
सनातन श्री रामलीला पात्र परिषद द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने के साथ समाज में सेवा, सद्भाव और सहयोग की भावना को मजबूत करने का संदेश देता रहा।
