राज्य आंदोलनकारियों की सात मांगों को लेकर 2 अक्टूबर तक घोषणा की मांगराज्य आंदोलनकारियों की सात मांगों को लेकर 2 अक्टूबर तक घोषणा की मांग, समाधान नहीं हुआ तो प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

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उत्तरकाशी। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजकर 2 अक्टूबर 2026 तक ठोस घोषणा किए जाने की मांग उठाई गई है। जिलाध्यक्ष बाल गोविंद डोभाल ने परिषद के अध्यक्ष हुकम सिंह कुंवर, उपाध्यक्ष सुभाष बर्थवाल तथा उपाध्यक्ष चारू कोठारी से सरकार पर दबाव बनाने का आग्रह किया है।
ज्ञापन में राज्य आंदोलनकारियों के लिए एक समान ₹21 हजार मासिक पेंशन किए जाने की मांग प्रमुखता से रखी गई है। इसके साथ ही 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने, वास्तविक रूप से वंचित राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया तत्काल पूरी करने की मांग की गई है।
राज्य आंदोलनकारियों ने उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में आंदोलनकारी के साथ परिवार के एक सदस्य को सहवर्ती के रूप में निःशुल्क यात्रा की सुविधा देने की मांग भी उठाई है। ज्ञापन में कहा गया है कि अधिकांश राज्य आंदोलनकारी अब 60 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं, इसलिए उनके साथ परिवार के एक सदस्य को यह सुविधा मिलनी चाहिए।
इसके अतिरिक्त प्रत्येक तहसील में शहीद स्मारक का निर्माण, ‘राज्य आंदोलनकारी’ शब्द के स्थान पर ‘राज्य निर्माण सेनानी’ का दर्जा देने तथा गढ़वाल मंडल एवं कुमाऊं मंडल के सभी सरकारी गेस्ट हाउसों में राज्य आंदोलनकारियों को निःशुल्क रात्रि विश्राम की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
बाल गोविंद डोभाल ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों की इन मांगों को लेकर सरकार से लंबे समय से अपेक्षाएं बनी हुई हैं। उन्होंने परिषद के पदाधिकारियों से आग्रह किया कि समय की गंभीरता को देखते हुए संपूर्ण मंत्रिमंडल पर प्रभावी दबाव बनाकर 2 अक्टूबर तक मांगों पर घोषणा कराई जाए।
ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय तक मांगों का समाधान नहीं किया गया तो उत्तराखंड के राज्य आंदोलनकारी प्रदेशव्यापी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। डोभाल ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों को सरकार से इन मांगों के समाधान की उम्मीद है और वे सकारात्मक निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।


बाल गोविंद डोभाल, जिलाध्यक्ष का बयान
राज्य आंदोलनकारियों ने उत्तराखंड निर्माण के लिए अपना जीवन संघर्ष में लगाया है। आज बड़ी संख्या में आंदोलनकारी 60 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं, ऐसे में उनकी सामाजिक एवं आर्थिक जरूरतों को देखते हुए सरकार को लंबित मांगों पर गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए। हमारी प्रमुख मांग है कि सभी राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन ₹21 हजार प्रतिमाह की जाए, 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रभावी रूप से लागू हो तथा वास्तविक रूप से वंचित आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण तत्काल पूरा किया जाए। परिवहन निगम की बसों में एक आश्रित को सहवर्ती के रूप में निःशुल्क यात्रा, प्रत्येक तहसील में शहीद स्मारक, ‘राज्य निर्माण सेनानी’ का दर्जा तथा मंडलीय गेस्ट हाउसों में निःशुल्क ठहरने की सुविधा भी दी जानी चाहिए। हम मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आग्रह करते हैं कि 2 अक्टूबर तक इन मांगों पर स्पष्ट घोषणा करें। समाधान नहीं हुआ तो आंदोलनकारी प्रदेशव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।


— बाल गोविंद डोभाल, जिलाध्यक्ष


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