पौराणिक कथाओं के अनुसार उत्‍तरकाशी के डोडीताल (Dodital) को भगवान गणेश का जन्म स्थान माना गया है। कहा जाता है कि डोडीताल में ही माता पार्वती ने स्नान करने से पूर्व द्वार की सुरक्षा के लिए अपने उबटन से गणेश भगवान को उत्पन्न किया था। डोडीताल में गजानन के साथ उनकी माता पार्वती भी विराजमान हैं।

   कहा जाता है क‌ि भगवान गणेश का जन्म उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी ज‌िले में हुआ था। समुद्रतल से 3,310 मीटर की ऊंचाई पर उत्‍तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित डोडीताल

पौराणिक कथाओं के अनुसार उत्‍तरकाशी के डोडीताल (Dodital) को भगवान गणेश का जन्म स्थान माना गया है। कहा जाता है कि डोडीताल में ही माता पार्वती ने स्नान करने से पूर्व द्वार की सुरक्षा के लिए अपने उबटन से गणेश भगवान को उत्पन्न किया था। डोडीताल में गजानन के साथ उनकी माता पार्वती भी विराजमान हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार उत्‍तरकाशी के डोडीताल (Dodital) को भगवान गणेश का जन्म स्थान माना गया है। कहा जाता है कि डोडीताल में ही माता पार्वती ने स्नान करने से पूर्व द्वार की सुरक्षा के लिए अपने उबटन से गणेश भगवान को उत्पन्न किया था। डोडीताल में गजानन के साथ उनकी माता पार्वती भी विराजमान हैं।

इस ताल के निकट स्थित मंदिर को भगवान गणेश की जन्‍मस्‍थली माना जाता है। वहीं इस मंदिर के सामने स्थित ताल से भी एक बड़ा रहस्‍य जुड़ा हुआ है। आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में : पौराणिक कथाओं के अनुसार उत्‍तरकाशी के डोडीताल (Dodital) को भगवान गणेश का जन्म स्थान माना गया है। कहा जाता है कि डोडीताल में ही माता पार्वती ने स्नान करने से पूर्व द्वार की सुरक्षा के लिए अपने उबटन से गणेश भगवान को उत्पन्न किया था। डोडीताल में गजानन के साथ उनकी माता पार्वती भी विराजमान हैं। यहां पार्वती माता की पूजा अन्नपूर्णा के रूप में होती हैं। यहां माता अन्नपूर्णा का मंदिर (Maa Annapurna Temple Dodital) है। श्रद्धालु यहां मां अन्नपूर्णा और भगवान गणेश की पूजा के लिए आते हैं। उनका विश्वास है कि भगवान गणपति डोडीताल के अन्नपूर्णा मंदिर मे अपनी माता के साथ आज भी निवास करते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार उत्‍तरकाशी के डोडीताल (Dodital) को भगवान गणेश का जन्म स्थान माना गया है। कहा जाता है कि डोडीताल में ही माता पार्वती ने स्नान करने से पूर्व द्वार की सुरक्षा के लिए अपने उबटन से गणेश भगवान को उत्पन्न किया था। डोडीताल में गजानन के साथ उनकी माता पार्वती भी विराजमान हैं।

हिंदुस्तान Global Times/print media,शैल ग्लोबल टाइम्स,अवतार सिंह बिष्ट, रुद्रपुर डोडीताल एक से डेढ़ किमी क्षेत्र में फैली षट्कोणीय झील है। इसकी गहराई कितनी है, आज तक कोई इसका अनुमान नहीं लगा पाया है। कई विज्ञानियों और वन विभाग के अधिकारियों ने झील की गहराई को नापने का प्रयास किया, लेकिन असफल रहे। आज भी इस ताल की गहराई रहस्‍य बनी हुई है।

इसलिए इस दिन भगवान गणेश के जन्म का उत्सव गणेश चतुर्थी के तौर पर मनाया जाता है।

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल गणेश चतुर्थी का त्योहार 7 सितंबर को मनाया जाएगा, जिसका समापन 17 सितंबर को अनंत चतुर्थी के दिन होगा। 7 सितंबर को बप्पा की आराधना करने का शुभ मुहूर्त सुबह 11:03 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 33 मिनट तक है। इस दौरान भगवान की उपासना करने के साथ-साथ उन्हें उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाने से साधक को अपनी सभी परेशानियों से छुटकारा मिल सकता है। आइए जानते हैं उन खास पांच चीजों के बारे में, जिनका भोग भगवान गणेश को लगाना अति शुभ माना जाता है।

मालपुआ

गणेश जी को मालपुआ अति प्रिय है। इसलिए गणेश चतुर्थी के दौरान बप्पा को मालपुआ का भोग जरूर लगाना चाहिए। खासतौर पर मूर्ति स्थापना के दिन भगवान गणेश को मालपुआ का भोग लगाना शुभ होता है। इससे जीवन में आ रही परेशानियां कम होने लगती हैं।

श्रीखंड

दही और चीनी से बनाए जाने वाला केसरिया श्रीखंड भगवान गणेश को बेहद पसंद है। माना जाता है कि जो लोग अपने हाथ से केसरिया श्रीखंड को बनाकर उसका भोग बप्पा को लगाते हैं, उनके घर में सदा खुशहाली बनी रहती है।

उत्तराखंड में भी विगत कुछ वर्षों से गणेशोत्सव की परपंरा चल निकली है। हालांकि यहां के लोग गणपति विसर्जन को शुभ नहीं मानते हैं क्योंकि उत्तराखंड में विघ्नहर्ता की जन्मस्थली है।

खसखस का हलवा

देश के कई राज्यों में भगवान गणेश को खसखस से बने हलवे का भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब तक गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा को खसखस से बने हलवे का भोग नहीं लगाया जाता है, तब तक उनकी पूजा को पूरा नहीं माना जाता है।

खजूर के लड्डू

भगवान गणेश की पूजा खजूर के लड्डू के बिना अधूरी मानी जाती है। ये उनकी प्रिय मिठाई है, जिसका भोग लगाने से बप्पा बेहद प्रसन्न होते हैं।

पूरन पोली

कहा जाता है कि भगवान गणेश को पूरन पोली अति प्रिय है। इसलिए हर साल गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा को पूरन पोली का भोग लगाया जाता है। ये एक तरह का मीठा पराठा होता है, जो खाने में बेहद स्वादिष्ट लगता है।

भगवान गणेश की पूजा विधि

  • गणेश चतुर्थी के दिन प्रात: काल उठें। स्नान आदि कार्य करने के बाद शुद्ध वस्त्र धारण करें।
  • घर के मंदिर में एक चौकी रखें। उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं।
  • चौकी के ऊपर गणेश जी की प्रतिमा को स्थापित करें।
  • बप्पा को सिंदूर, मिठाई, फूल और फल का भोग लगाएं। इस दौरान गणेश जी के मंत्रों का जाप करें।
  • गणेश चतुर्थी की कथा और गणेश चालीसा का पाठ करें।
  • अंत में आरती करके पूजा का समापन करें।

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