रुद्रपुर, विशेष रिपोर्ट।बोलते हैं प्यार अंधा होता है, मगर जब ये अंधापन जीजा जी को होटल तक खींच ले जाए और सामने से चप्पल वाली ‘काली मां’ प्रकट हो जाएं, तो फिर खुमार की जगह केवल शर्मिंदगी और साले की दुकान का नाम डुबोने वाली कहानियां ही बचती हैं।
संवाददाता,शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स /उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट रुद्रपुर, (उत्तराखंड)
शनिवार की रात रुद्रपुर के काशीपुर बायपास रोड स्थित एक प्रतिष्ठित होटल में एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसे देखकर पुलिस भी सोच में पड़ गई – क्या मामला नैतिक शिक्षा का है या आईपीसी का?
जब आशिकी पर चप्पल भारी पड़ गई…
जी हाँ, मटके वाली गली के चर्चित ‘जीजा जी’—जिनकी सीटियों की गूंज साले की दुकान के बाहर सुबह से शाम तक सुनाई देती थी—को उस वक्त रंगे हाथों पकड़ा गया जब वो साले की ही दुकान में काम करने वाली नाबालिग लड़की के साथ होटल में “रंगरेलियों” में व्यस्त थे।
लेकिन प्रेम कहानी में ट्विस्ट तब आया, जब जीजा जी के ही किसी शराबी मित्र ने फोन कर पत्नी को सूचना दे दी। फिर क्या था—वो पत्नी, जो कभी खुद उनकी प्रेमिका थीं और जिन्होंने समाज से लड़कर विवाह किया था, ‘दुर्गा’ बनकर प्रकट हुईं और होटल में जाकर जीजा जी की आशिकी की अय्याशी को चप्पलों से पीट-पीट कर उजागर कर डाला।
साले साहब का भी दिल बैठ गया
मामले की सूचना पाकर साले साहब भी मौके पर पहुंचे, लेकिन उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि चाय लेकर जाएं या शर्म से मुंह छिपाएं। आखिर, जीजा जी की वजह से अब उनकी दुकान भी बदनाम हो गई थी और दुकान में काम करने वाली लड़की भी। अब कोई बहन-बेटी उस दुकान में काम करने आए तो पहले मोहल्ले की पंचायत की परमीशन लेनी पड़ेगी।
पुलिस आई, मगर POCSO भाग गई…
सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया, जब मौके पर पुलिस पहुंची। एक ओर तो नाबालिग लड़की थी, दूसरी ओर ‘रंगीनमिजाज जीजा’, और तीसरी तरफ आगबबूला पत्नी। लेकिन पुलिस ने वाद और प्रतिवाद के बीच “समझौता” करा कर खुद को समझदार साबित कर दिया।
यहां सवाल यह भी उठता है कि जब लड़की नाबालिग थी, और होटल में उसका प्रवेश जीजा जी के साथ हुआ, तो POCSO एक्ट लागू क्यों नहीं किया गया? क्या “समझौता” की चादर सब कुछ ढक देती है?
