वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, यूएई ने पिछले महीने गुपचुप तरीके से ईरान पर हवाई हमले किए हैं। सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि ये हमले अप्रैल की शुरुआत में ईरान के लावान द्वीप पर स्थित एक तेल रिफाइनरी को निशाना बनाकर किए गए थे।

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चौंकाने वाली बात यह है कि यह कार्रवाई ठीक उस समय हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पांच हफ्तों के अभियान के बाद संघर्ष-विराम (सीजफायर) की घोषणा कर रहे थे। इस कदम के साथ ही यूएई, अमेरिका और इजरायल के बाद इस युद्ध का नया प्रत्यक्ष भागीदार बन गया है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

अमेरिका ने यूएई की सैन्य सक्रियता का किया स्वागत

रिपोर्ट के मुताबिक, वाशिंगटन ने यूएई के इस कदम का चुपचाप स्वागत किया है। अमेरिका उन सभी खाड़ी देशों के शामिल होने के पक्ष में है जो ईरान के खिलाफ लड़ाई में साथ देना चाहते हैं। अमेरिकी प्रशासन ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई, क्योंकि उनके अनुसार जिस वक्त हमले हुए, उस समय संघर्ष-विराम पूरी तरह से लागू नहीं हुआ था। हालांकि, ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने इसे ‘कायरतापूर्ण हमला’ करार देते हुए कहा कि लावान फैसिलिटी पर सुबह 10:00 बजे हमला किया गया था।

ईरान का पलटवार: यूएई और कुवैत पर मिसाइल दागने का दावा

लावान द्वीप पर हमले के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की। ईरानी मीडिया के अनुसार, अमीरात और कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए गए। यूएई ने बाद में पुष्टि की कि उसे निशाना बनाने के लिए 17 ईरानी मिसाइलें और 35 ड्रोन दागे गए थे। आंकड़ों के मुताबिक, जिस रिफाइनरी को निशाना बनाया गया वह ईरान की 10वीं सबसे बड़ी रिफाइनरी थी, जो रोजाना 60,000 बैरल कच्चा तेल प्रोसेस करती थी। यूएई ने ईरान के भीतर हमले की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं की है, लेकिन उसके विदेश मंत्रालय ने कहा है कि देश को आत्मरक्षा में सैन्य कार्रवाई का अधिकार है।

क्षेत्र की सबसे आधुनिक वायु सेना से लैस है यूएई

सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यूएई की एंट्री से युद्ध का समीकरण बदल सकता है। यूएई के पास मिडिल-ईस्ट की सबसे आधुनिक वायु सेनाओं में से एक है, जिसमें फ्रांसीसी मिराज लड़ाकू विमान, उन्नत F-16 जेट और अत्याधुनिक ड्रोन शामिल हैं। युद्ध की शुरुआत से ही ईरान के ऊपर देखे गए ‘अज्ञात’ विमानों के कारण यूएई की भूमिका पर अटकलें लग रही थीं। साथ ही, यूएई ने संयुक्त राष्ट्र के उन प्रस्तावों का भी समर्थन किया है जो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा के लिए बल प्रयोग की अनुमति देते हैं।


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