पश्चिम बंगाल में नई सरकार द्वारा महिलाओं के लिए घोषित “अन्नपूर्णा भंडार” योजना और मुफ्त बस सेवा ने पूरे देश की राजनीति में एक नया विमर्श खड़ा कर दिया है। यह केवल चुनावी वादा पूरा करने का मामला नहीं माना जा रहा, बल्कि महिलाओं को सीधे आर्थिक रूप से मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या 2027 से पहले उत्तराखंड में भी Pushkar Singh Dhami सरकार महिलाओं के लिए इसी तरह की बड़ी योजनाएं लागू कर सकती है। उत्तराखंड में पहले से ही महिला स्वयं सहायता समूह, लखपति दीदी अभियान, गैस, राशन और स्वरोजगार योजनाओं पर सरकार लगातार काम कर रही है। ऐसे में बंगाल मॉडल की तरह प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता या महिला यात्रा सुविधा जैसी योजनाओं पर भविष्य में विचार होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञ मानते हैं कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में महिलाओं की भूमिका परिवार, कृषि, पशुपालन और सामाजिक संरचना में सबसे महत्वपूर्ण होती है। पहाड़ की अर्थव्यवस्था काफी हद तक महिलाओं की मेहनत पर टिकी है। यदि राज्य सरकार भविष्य में महिलाओं को प्रतिमाह आर्थिक सहायता, परिवहन में छूट या स्वरोजगार से जुड़ी अतिरिक्त सुविधाएं देती है, तो इसका बड़ा सामाजिक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मिशन 2027 को देखते हुए महिला वोट बैंक हर दल की प्राथमिकता बनने जा रहा है। उत्तराखंड में भाजपा पहले से महिला सुरक्षा, समान नागरिक संहिता, स्वरोजगार और गरीब कल्याण योजनाओं को प्रमुखता से आगे बढ़ा रही है। ऐसे में बंगाल की घोषणाओं के बाद अन्य राज्यों की तरह उत्तराखंड में भी महिला केंद्रित योजनाओं की संभावनाएं और मजबूत होती दिखाई दे रही हैं।
हालांकि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां बंगाल से अलग हैं, इसलिए यहां की योजनाएं स्थानीय जरूरतों के हिसाब से तैयार की जा सकती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में मुफ्त परिवहन, ग्रामीण महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य सहायता, स्वरोजगार अनुदान और पलायन रोकने से जुड़ी महिला योजनाएं अधिक प्रभावी साबित हो सकती हैं।
कुल मिलाकर, बंगाल की नई घोषणाओं ने देशभर की राजनीति में महिलाओं को केंद्र में ला दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि 2027 से पहले उत्तराखंड में Pushkar Singh Dhami सरकार महिलाओं के लिए कौन से नए फैसले लेकर आती है, क्योंकि महिला सशक्तिकरण अब केवल सामाजिक मुद्दा नहीं बल्कि भविष्य की राजनीति का सबसे बड़ा आधार बनता जा रहा


