जहां आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के अनुसार प्रसाद के लड्डुओं में प्रयुक्त घी में तीन जानवरों की चर्बी पाई गई। शक पूर्व मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी की सरकार पर है, जिसने देवस्थानम बोर्ड का प्रमुख अपने ईसाई चाचा को नियुक्त किया था। यह घटना न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाती है, बल्कि सनातन पर सुनियोजित प्रहार की बड़ी कड़ी है। इसी बीच कांग्रेस, डीएमके जैसे दलों के नेताओं द्वारा सनातन धर्म को ‘कुष्ठ रोग’, ‘एचआईवी’, ‘मलेरिया’ कहकर अपमानित करना गहरी साजिश को उजागर करता है। उत्तराखंड जैसे देवभूमि प्रदेश के लिए यह चेतावनी है कि सनातन संस्कृति पर ऐसे हमले केवल दक्षिण भारत तक सीमित नहीं। यहां भी मंदिरों, परंपराओं और संस्कृति पर अघोषित हमले होते रहे हैं। उत्तराखंड को अपनी धार्मिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए सतर्क रहना होगा, ताकि कोई भी शक्ति आस्था के स्तंभों को डगमगाने का दुस्साहस न कर सके। सनातन केवल मजहब नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है, जिसकी रक्षा हम सबका कर्तव्य है।
