रुद्रपुर शहर की पहचान उत्तराखंड के उन चुनिंदा नगरों में होती है, जहाँ विकास की संभावनाएँ सबसे अधिक हैं और साथ ही चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं। तराई क्षेत्र का यह औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र वर्षों से इस उम्मीद में आगे बढ़ रहा है कि एक दिन यह शहर वास्तव में मॉडल सिटी कहलाएगा,

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर (उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी)
लेकिन इसके लिए सबसे बड़ी ज़रूरत है दृष्टि और नेतृत्व की। इसी कड़ी में नगर निगम रुद्रपुर के महापौर श्री विकास शर्मा की हालिया प्रेस वार्ता न केवल आशा की किरण जगाती है बल्कि इस बात का एहसास भी कराती है कि यदि नीयत और नीतियाँ साफ़ हों तो इंदौर और भोपाल की तरह रुद्रपुर भी अपनी अलग पहचान बना सकता है। महापौर विकास शर्मा हाल ही में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आयोजित एक पाँच दिवसीय अध्ययन यात्रा से लौटे हैं, जहाँ उन्होंने भोपाल और इंदौर के मेयरों से मुलाकात कर वहाँ के नवाचारों और कार्य प्रणालियों का गहन अध्ययन किया। उनकी यह यात्रा महज़ एक औपचारिक दौरा भर नहीं थी बल्कि इसे वास्तव में रुद्रपुर के भविष्य की दिशा तय करने वाला मील का पत्थर कहा जा सकता है।
महापौर का कहना था कि इंदौर में जिस तरह कचरा प्रबंधन का मॉडल विकसित किया गया है, उसने पूरे देश को एक नया रास्ता दिखाया है। इंदौर में कचरे को बोझ नहीं, बल्कि संसाधन के रूप में देखा जाता है। गीला, सूखा, प्लास्टिक, लोहा, कपड़ा, ई-वेस्ट, सीएनडी वेस्ट तक हर चीज़ की अलग-अलग श्रेणियाँ बनाई जाती हैं और फिर उन्हें रिसाइक्लिंग के लिए भेजा जाता है। कपड़े तक को रिसाइकिल कर नये उत्पाद बनाए जाते हैं और इससे रोजगार भी पैदा होता है। महापौर ने स्पष्ट कहा कि रुद्रपुर में भी जल्द ही इसी तरह का मॉडल लागू किया जाएगा। आज जबकि नगर निगम कचरे के बोझ से दबा हुआ है, ऐसे में यह पहल न केवल शहर को स्वच्छ बनाएगी बल्कि नगर निगम की आर्थिक आत्मनिर्भरता का भी साधन बनेगी।
इंदौर मॉडल का एक और महत्वपूर्ण पहलू उन्होंने साझा किया—महिलाओं को घर में ही जैविक कचरे से खाद बनाने का प्रशिक्षण। बड़ी बाल्टियों में रखा गया कचरा 45 दिन में खाद में बदल जाता है और इसका इस्तेमाल घर के पौधों में होता है। इससे घर-घर में कचरे का बोझ घटता है और महिलाएँ आत्मनिर्भर होती हैं। साथ ही नगर निगम ऐसे परिवारों को यूज़र चार्ज में छूट भी देता है। महापौर ने कहा कि रुद्रपुर में भी यही व्यवस्था लागू की जाएगी। यह न केवल कचरे की समस्या का समाधान होगा बल्कि समाज में महिलाओं की भागीदारी और उनकी आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी बड़ा कदम साबित होगा।
इसके अलावा थर्माकोल, पुराना कागज़ और प्लास्टिक जैसी वस्तुओं को भी इंदौर में अलग-अलग तरीके से पुनः उपयोग में लाया जाता है। महापौर ने बताया कि पेपर श्रेडर मशीन के जरिए पुराना कागज़ इकट्ठा कर रिसाइकिल किया जाता है और बदले में नया पेपर उपलब्ध कराया जाता है। इस तरह की योजनाएँ रुद्रपुर में लागू होती हैं तो यह न केवल पर्यावरण संरक्षण में मददगार होंगी बल्कि लोगों के बीच जिम्मेदारी की भावना भी जागृत करेंगी।
महापौर ने आगे बताया कि शहर में जल्द ही ‘अमृत मित्र’ बनाए जाएंगे जो घर-घर जाकर पीने के पानी की टेस्टिंग करेंगे। यह पहल सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य से जुड़ी है और साफ पानी की गारंटी देती है। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि सभी मकानों की ऑनलाइन जियो-टैगिंग की जाएगी, जिससे शहर की सटीक जनसांख्यिकी जानकारी उपलब्ध होगी। इसके लिए वरिष्ठ नागरिकों को भी जोड़ा जाएगा और एक ‘डेमोग्राफी सेल’ गठित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिक हमारे अनुभव का खजाना हैं और उन्हें शहरी विकास की योजनाओं से जोड़ना बेहद ज़रूरी है।
महापौर ने भोपाल की तर्ज पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि जिस तरह भोपाल शहर के चारों ओर तालाब बनाकर वहाँ की आवोहवा को शुद्ध रखा गया है, उसी तरह रुद्रपुर में भी नदियों और तालाबों को पुनर्जीवित करने के प्रयास होंगे। खासकर कल्याणी नदी को उसके मूल स्वरूप में लौटाना सबसे पहली प्राथमिकता होगी। क्योंकि जब तक कल्याणी नदी को साफ और पुनर्जीवित नहीं किया जाएगा, तब तक रुद्रपुर की परिकल्पना अधूरी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि शहर में ग्रीन स्पेस विकसित किए जाएंगे, डिवाइडरों को ऊँचा कर पौधों को सुरक्षित रखा जाएगा और नागरिकों को हरित वातावरण के महत्व से जोड़ने के लिए नियमित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
प्लास्टिक कचरे से मुक्ति भी महापौर की प्राथमिकता सूची में शामिल है। उन्होंने कहा कि नगर निगम कपड़े के बैग वितरित करेगा और प्लास्टिक पर सख्ती से रोक लगाएगा। यदि आवश्यक हुआ तो कठोर निर्णय भी लिए जाएंगे। साफ तौर पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन और जनता के सहयोग से रुद्रपुर को उत्तराखंड का मॉडल शहर बनाया जाएगा।
महापौर ने अध्ययन यात्रा की झलक साझा करते हुए बताया कि भोपाल में स्वच्छ भारत मिशन, अमृत योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और एसटीपी जैसी योजनाओं पर विशेषज्ञों ने विस्तृत जानकारी दी। ऐतिहासिक स्थलों के सौंदर्यीकरण का अध्ययन कराया गया और इंदौर में कचरा प्रबंधन के मॉडल को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिला। यह पूरा दौरा प्रमाणपत्र वितरण के साथ समाप्त हुआ, लेकिन इसका प्रभाव लंबे समय तक रुद्रपुर के विकास में देखा जाएगा।
इच्छा बिन सीमाएँ, सपनों का है भार, कर्महीन संकल्प से, अधूरे सब विचार।”
अब सवाल यह है कि क्या वाकई रुद्रपुर इंदौर की तरह चमक सकता है? इसका उत्तर है—हाँ, लेकिन इसके लिए सबसे पहले नागरिक सहभागिता को सुनिश्चित करना होगा। इंदौर और भोपाल मॉडल इसलिए सफल हुए क्योंकि वहाँ जनता ने उसे अपनाया, उसका हिस्सा बनी। केवल सरकार या नगर निगम के प्रयासों से शहर का कायाकल्प संभव नहीं है। जब तक हर नागरिक अपने हिस्से की जिम्मेदारी नहीं निभाएगा, तब तक यह सपना अधूरा रहेगा। महापौर ने खुद स्वीकार किया कि यह सब जनभागीदारी के बिना असंभव है और उन्होंने इसे रुद्रपुर को स्मार्ट सिटी बनाने की दिशा में मील का पत्थर बताया।
रुद्रपुर की दो तस्वीरें अक्सर सामने आती हैं। एक तरफ पोश इलाके हैं जो अपने आप में उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। वहाँ के लोग जागरूक हैं, अनुशासित हैं और पर्यावरण के प्रति सजग रहते हैं। इन इलाकों की साफ-सफाई और सुव्यवस्था देखकर कोई भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता। दूसरी तरफ मलिन बस्तियाँ हैं, जहाँ जागरूकता का अभाव है। वहाँ लोगों के अंदर स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और नगर निगम की योजनाओं का कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता। यही सबसे बड़ी चुनौती है। यदि वास्तव में रुद्रपुर को इंदौर की तर्ज पर विकसित करना है तो मलिन बस्तियों में जागरूकता अभियान चलाने होंगे। वहाँ के लोगों को यह समझाना होगा कि धरती की महत्ता क्या है, पर्यावरण क्यों ज़रूरी है और उनका छोटा-सा प्रयास भी पूरे शहर की तस्वीर बदल सकता है।
महापौर विकास शर्मा की योजनाएँ निश्चित रूप से सराहनीय हैं। उन्होंने जो बातें प्रेस वार्ता में कहीं, वे न केवल व्यवहारिक हैं बल्कि प्रेरणादायक भी हैं। अब ज़िम्मेदारी नगर निगम के साथ-साथ जनता की भी है कि वे इन योजनाओं को सफल बनाने में योगदान दें। खासकर कल्याणी नदी को पुनर्जीवित करना ऐसा कदम है जो रुद्रपुर की पहचान को नई ऊँचाई देगा। यदि इस दिशा में ठोस प्रयास हुए तो न केवल पर्यावरण सुधरेगा बल्कि शहर की सुंदरता भी निखरेगी और लोगों का जीवन स्तर बेहतर होगा।
रुद्रपुर की जागरूक जनता इस बात की उम्मीद करती है कि महापौर विकास शर्मा के नेतृत्व में जो भी योजनाएँ बनाई गई हैं, वे धरातल पर उतरेगीं और पूरा शहर उनके इन प्रयासों के लिए इंतजार कर रहा है। शहर को स्मार्ट सिटी बनाने का सपना तभी साकार होगा जब हर नागरिक इसे अपना मिशन बनाए और नगर निगम को सहयोग करे। यदि इंदौर और भोपाल आज देश के मॉडल शहर बन सकते हैं तो रुद्रपुर क्यों नहीं? आवश्यकता है केवल विश्वास, समर्पण और सामूहिक प्रयासों की।
इसमें कोई संदेह नहीं कि आज की यह प्रेस वार्ता रुद्रपुर के इतिहास में एक सकारात्मक मोड़ की तरह दर्ज होगी। महापौर ने जो दृष्टि दिखाई है, वह आने वाले वर्षों में शहर की तस्वीर बदल सकती है। यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि इस दृष्टि को हकीकत में बदलें और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, हरित और आधुनिक रुद्रपुर का निर्माण करें।

