यह मंदिर उत्तराखंड के चार धामों में भी शामिल है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यहां स्थापित शिवलिंग सामान्य गोलाकार न होकर त्रिकोणाकार (Triangular Shivling) क्यों है? इसके पीछे एक बेहद रोचक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है, जो महाभारत काल से संबंध रखती है। आइए जानते हैं इसके पीछे जुड़ी एक पैराणिक कथा के बारे…

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
क्यों खास है केदारनाथ मंदिर का शिवलिंग?
केदारनाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग अन्य मंदिरों के शिवलिंगों से बिल्कुल अलग माना जाता है। इसका आकार सामान्य गोलाकार न होकर त्रिकोणाकार है। मान्यता है कि इस शिवलिंग की ऊंचाई और चौड़ाई लगभग 12-12 फीट है। इसकी सबसे अनोखी बात यह है कि इसका स्वरूप बैल की पीठ जैसा दिखाई देता है।
मंदिर परिसर में देवी पार्वती और द्वापर युग के पांडवों की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं, जो इस धाम की पौराणिक महत्ता को और बढ़ा देती हैं। कहा जाता है कि इस अद्भुत शिवलिंग के पीछे एक प्राचीन कथा छिपी हुई है, जिसका संबंध महाभारत काल, पांडवों और भगवान शिव की दिव्य लीला से जुड़ा है।
महाभारत काल से जुड़ी है केदारनाथ की कहानी
पौराणिक मान्यता के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने ही कुल के लोगों की हत्या के पाप से मुक्ति पाना चाहते थे। इसके लिए वे भगवान शिव का आशीर्वाद लेने निकल पड़े। लेकिन भगवान शिव पांडवों से नाराज थे और उनसे मिलने नहीं चाहते थे। कहा जाता है कि शिवजी हिमालय की ओर चले गए और वहां बैल का रूप धारण कर छिप गए।
पांडव भगवान शिव की तलाश करते हुए जब हिमालय पहुंचे। तभी भीम की नजर एक अनोखे बैल पर पड़ी। भीम को संदेह हुआ कि यह कोई साधारण बैल नहीं है। जैसे ही उन्होंने उस बैल को पकड़ने की कोशिश की, तो बैल जमीन में समाने लगा। तब भीम ने बैल की पीठ का हिस्सा पकड़ लिया।
मान्यता है कि बैल की पीठ का हिस्सा ही केदारनाथ मंदिर में प्रकट हुआ, जो आज त्रिकोणाकार शिवलिंग के रूप में पूजित है। यही कारण है कि यहां का शिवलिंग सामान्य शिवलिंगों से अलग दिखाई देता है।
अद्भुत है मंदिर की वास्तुकला
करीब हजारों साल पुराने इस मंदिर का निर्माण बड़े पत्थरों से किया गया है। माना जाता है कि इसका निर्माण आदि शंकराचार्य ने करवाया था। समुद्र तल से लगभग 3,583 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर कठिन मौसम में भी मजबूती से खड़ा है। मंदिर की बनावट और शिवलिंग का आकार दोनों ही इसे अन्य शिव धामों से अलग पहचान देते हैं। यही कारण है कि केदारनाथ केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि रहस्य और आस्था का अद्भुत संगम भी माना जाता है।

