चंपावत की इस घटना ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर कर रख दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पीड़िता नाबालिग है, मेडिकल में दुष्कर्म की पुष्टि हो चुकी है, पिता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हो चुका है और आरोपियों के नाम भी सामने हैं, तो फिर अब तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? जब आम लोगों के मामलों में पुलिस तत्काल कार्रवाई का दावा करती है, तब सत्ता से जुड़े लोगों पर इतनी नरमी क्यों दिखाई जा रही है?

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष Ganesh Godiyal ने जिस तरह सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, वह सीधे तौर पर कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। यदि आरोपियों के भाजपा से जुड़े होने की बातें सामने आ रही हैं, तो सरकार की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि निष्पक्ष जांच कर तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित करे, ताकि जनता का भरोसा बना रहे।
यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं बल्कि उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील प्रश्न है। पीड़िता के पिता के अनुसार बच्ची को चाकू की नोंक पर बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म किया गया और नग्न अवस्था में कमरे में बंद कर दिया गया। ऐसे आरोप किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक हैं। यदि इसमें राजनीतिक संरक्षण की बू आती है, तो यह और भी चिंताजनक स्थिति है।
Premanand Mahajan ने चंपावत में नाबालिग छात्रा के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना को बेहद शर्मनाक और मानवता को झकझोर देने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे शांत प्रदेश में इस प्रकार की घटनाएं कानून व्यवस्था की विफलता को उजागर करती हैं। महाजन ने आरोप लगाया कि यदि आरोपियों के सत्ता पक्ष से संबंध होने की चर्चा सामने आ रही है, तो सरकार को और अधिक पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बेटियों की सुरक्षा केवल भाषणों और नारों से नहीं बल्कि कठोर कार्रवाई से सुनिश्चित होगी। उन्होंने मांग की कि सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाया जाए ताकि पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय मिल सके।
Rajkumar Thukral ने इस घटना को उत्तराखंड की अस्मिता पर हमला बताते हुए सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जब मेडिकल जांच में दुष्कर्म की पुष्टि हो चुकी है और आरोपियों के नाम भी सामने हैं, तब तक गिरफ्तारी न होना बेहद चिंताजनक है। ठुकराल ने आरोप लगाया कि सत्ता से जुड़े लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे जनता में आक्रोश बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को स्वयं इस मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा प्रदान करने तथा दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की मांग
मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में हुई इस घटना ने सरकार की “बेटी सुरक्षा” संबंधी तमाम घोषणाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता यह जानना चाहती है कि क्या कानून केवल आम लोगों के लिए सख्त है और राजनीतिक रसूखदारों के लिए नरम?
अब जरूरत केवल बयानबाजी की नहीं, बल्कि कठोर कार्रवाई की है। पुलिस को चाहिए कि तीनों आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाए और पीड़िता को न्याय दिलाए। यदि देरी होती रही, तो यह संदेश जाएगा कि उत्तराखंड में सत्ता के संरक्षण में अपराधियों का मनोबल बढ़ रहा है।

