मूव ओवरसीज का फर्जीवाड़ा: रुद्रपुर बना इमीग्रेशन जालसाजी का गढ़?गायब हुए दस्तावेज और फ्लेक्स बोर्ड

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रुद्रपुर। राजधानी दिल्ली से लेकर इंग्लैंड तक फैले पासपोर्ट–वीज़ा फर्जीवाड़े ने उत्तराखंड को शर्मसार कर दिया है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की विशेष रिपोर्ट के बाद मूव ओवरसीज (MOVE Overseas) CANAM Oberseasऔर उससे जुड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हो चुका है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा खेल रुद्रपुर के काशीपुर बाईपास स्थित आशीर्वाद कॉम्प्लेक्स से संचालित होता रहा—जो तरुण जुनेजा की संपत्ति मानी जाती है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर (उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी)


फर्जीवाड़े का नेटवर्क?सूत्र बताते हैं कि मूव ओवरसीज के साथ-साथ CANAM Overseas और प्रॉपर्टी डीलिंग का धंधा भी इसी कॉम्प्लेक्स से चलता था। एक ही छत के नीचे तीन-तीन कारोबार, और असल में सबकी परतें खोलने पर सामने आया कि यह जगह इमीग्रेशन फ्रॉड का अड्डा बन चुकी थी।
इस गोरखधंधे को आगे बढ़ाने वालों के नाम हैं—कर्मनदीप औलख, तालविंदर रंधावा, गैरी रंधावा और तरुण जुनेजा। इनके साथ दलालों का पूरा जाल खड़ा किया गया, दलालः दलविंदर सिंह, कर्मनदीप औलख,

गिरफ्तारी और तिहाड़ तक पहुँचा मामला?24 अगस्त को दिल्ली पुलिस ने मूव ओवरसीज से जुड़े तालविंदर रंधावा और कर्मनदीप औलख को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया। आरोप है कि इन लोगों ने पंजाब के फिरोज़पुर निवासी ताजिंदर सिंह के वैध पासपोर्ट और कनाडा वीज़ा का दुरुपयोग कर गुरफिंदर सिंह को इंग्लैंड भेजने की कोशिश की। एयरपोर्ट पर इमीग्रेशन जांच में मामला पकड़ा गया और डिपोर्ट होने के बाद दिल्ली में पूरा नेटवर्क सामने आया। बताया जा रहा है कि इस सौदे में 20 लाख रुपये की वसूली हुई, जबकि असली पासपोर्ट धारक को चुप कराने के लिए 10 लाख रुपये का “सेटलमेंट” प्रस्ताव रखा गया।

गायब हुए दस्तावेज और फ्लेक्स बोर्ड?हैरानी की बात यह है कि गिरफ्तारी के तुरंत बाद रुद्रपुर स्थित आशीर्वाद कॉम्प्लेक्स में ऑफिस का शटर डाउन कर दिया गया। वहां लगे फ्लेक्स बोर्ड, साइन बोर्ड, कंप्यूटर और दस्तावेज रातों-रात हटा दिए गए। अब कॉम्प्लेक्स में खाली शटर और गायब निशानियां ही बची हैं। यह दृश्य खुद इस बात का गवाह है कि पर्दे के पीछे बहुत बड़े खेल को छुपाने की कोशिश हो रही है। सवाल यह उठता है कि अगर सब कुछ वैध और कानूनी था तो अचानक बोर्ड और कागजात क्यों गायब कर दिए गए?

यह मामला किसी एक एजेंसी या कुछ दलालों तक सीमित नहीं है। यह उस पूरे तंत्र की विफलता को उजागर करता है जिसमें विदेशी सपनों की आड़ लेकर बेरोजगार युवाओं को जाल में फंसाया गया और मोटी कमाई की गई।

आज जरूरी है कि इस फर्जीवाड़े को सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित न रखा जाए, बल्कि रुद्रपुर से दिल्ली और पंजाब तक फैले पूरे नेटवर्क की व्यापक जांच हो। वरना मूव ओवरसीज जैसा खेल नए नामों से फिर खड़ा हो जाएगा और पीड़ित हमेशा की तरह ठगा जाता रहेगा।



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