कांग्रेस में नई ऊर्जा और एकजुटता: 2027 का रण शुरू?गुटबाजी से मुक्ति का संदेश?पंचायत चुनावों से मिली प्रेरणा

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रुद्रपुर,देहरादून।उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी और आपसी खींचतान के लिए जानी जाती रही है। लेकिन हाल के दिनों में जो तस्वीरें सामने आईं, उन्होंने सियासी हलचलों को नया रंग दे दिया। सम्मान समारोह से लेकर राजभवन कूच तक, कांग्रेस के दिग्गज नेता एक मंच पर नज़र आए। यह नजारा न केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए ऊर्जा का स्रोत साबित हुआ, बल्कि बीजेपी खेमे की चिंता भी बढ़ाने वाला रहा।

हरक सिंह रावत की वापसी और जोशीली नारेबाजी

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर (उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी)

राजभवन कूच के दौरान सबसे ज्यादा सुर्खियां पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने बटोरीं। कभी बीजेपी सरकार में शामिल रहे हरक अब पूरी तरह कांग्रेस के सुर में सुर मिलाते दिख रहे हैं। उनकी जोशीली नारेबाजी ने कार्यकर्ताओं को झकझोर दिया। रावत के तेवरों में न सिर्फ गुस्सा झलक रहा था बल्कि बीजेपी के खिलाफ एक स्पष्ट रणनीति का संकेत भी था।

उनका बयान कि “बीजेपी अब एक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) पार्टी बन चुकी है” कार्यकर्ताओं के बीच गूंजा और हरीश रावत ने भी सोशल मीडिया पर इसका समर्थन कर माहौल को और धार दे दी।

गुटबाजी से मुक्ति का संदेश

कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी हमेशा से गुटबाजी रही है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा और हरक सिंह रावत का एक मंच पर दिखना, कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश देने के लिए काफी था कि कांग्रेस अब आपसी मतभेदों को भुलाकर 2027 की जंग की तैयारी में जुट गई है।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का भले ही सीधा योगदान इन आयोजनों में न रहा हो, लेकिन उनका सोशल मीडिया के जरिए किया गया समर्थन इस बात का संकेत है कि पार्टी के शीर्ष नेता अब एक-दूसरे की बातों को खुलकर बैकअप करने लगे हैं।

पंचायत चुनावों से मिली प्रेरणा

हाल ही में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में कांग्रेस ने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसने पार्टी में आत्मविश्वास भरा है। ग्रामीण स्तर पर मजबूत पकड़ ने पार्टी को भरोसा दिलाया है कि अगर यही तालमेल विधानसभा चुनाव तक कायम रहा तो बीजेपी को कड़ी टक्कर दी जा सकती है। यही वजह है कि कांग्रेस के दिग्गज अब तालमेल और एकजुटता पर जोर देते दिख रहे हैं।

बीजेपी की बेचैनी और पलटवार

कांग्रेस की आक्रामक रणनीति और हरक सिंह रावत की बयानबाजी से बीजेपी खेमे में बेचैनी साफ झलक रही है। पार्टी ने इस पर प्रतिक्रिया देने के लिए राजपुर रोड विधायक खजानदास को आगे किया। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि “हरक सिंह रावत एक दिन कांग्रेस के लिए सिरदर्द बन जाएंगे।”

यह बयान न केवल कांग्रेस नेताओं पर तंज था बल्कि बीजेपी की चिंता का संकेत भी। दरअसल, बीजेपी जानती है कि अगर कांग्रेस ने गुटबाजी छोड़ दी और आक्रामक तेवरों के साथ चुनावी मैदान में उतरी तो मुकाबला कठिन हो सकता है।

सम्मान समारोह और रणनीति का संकेत

भराड़ीसैंण विधानसभा सत्र के बाद देहरादून में आयोजित कांग्रेस विधायकों के सम्मान समारोह में हरक सिंह रावत, यशपाल आर्य और करन माहरा का तालमेल चर्चा का विषय बन गया। यह तस्वीरें न केवल कार्यकर्ताओं को उत्साहित कर रही हैं बल्कि राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठा रही हैं कि आखिर कांग्रेस की यह एकजुटता कितनी स्थायी है और क्या यह 2027 में संजीवनी साबित होगी।

2027 का रण: कांग्रेस बनाम बीजेपी

राज्य की राजनीति में 2027 का विधानसभा चुनाव बेहद अहम होगा। 25 साल पूरे करने जा रहा उत्तराखंड आज भी बेरोजगारी, पलायन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। बीजेपी इन मुद्दों पर विकास का दावा करती है, वहीं कांग्रेस इनकी कमियों को आक्रामक अंदाज में जनता के सामने रख रही है।

कांग्रेस का मानना है कि पंचायत चुनावों के नतीजे संकेत हैं कि जनता बदलाव चाहती है। वहीं बीजेपी का दावा है कि उसकी सरकार विकास और स्थिरता का पर्याय है। ऐसे में 2027 का चुनाव एकतरफा नहीं बल्कि कांटे की टक्कर वाला हो सकता है।

क्या कांग्रेस सच में बदली है?

हालांकि यह सवाल अभी भी सियासी गलियारों में गूंज रहा है कि क्या कांग्रेस की यह एकजुटता स्थायी है या सिर्फ मौसमी। हरक सिंह रावत जैसे नेताओं की राजनीतिक यात्रा हमेशा विवादों में रही है। बीजेपी इस पर लगातार सवाल उठा रही है। वहीं कांग्रेस के कार्यकर्ता इसे “पार्टी में नई जान” मान रहे हैं।

फिलहाल तस्वीर साफ है कि कांग्रेस ने 2027 के लिए बिगुल फूंक दिया है। हरक सिंह रावत के आक्रामक तेवर, यशपाल आर्य की संयमित नेतृत्व क्षमता और करन माहरा की संगठनात्मक पकड़—तीनों मिलकर पार्टी को नया जोश दे रहे हैं।

बीजेपी फिलहाल निश्चिंत दिख रही है, लेकिन कांग्रेस की सक्रियता और पंचायत चुनावों में मिली सफलता ने राजनीति को और दिलचस्प बना दिया है। आने वाले दिनों में यही एकजुटता अगर कायम रही तो यह बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।



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