

देहरादून को देश के 10 असुरक्षित शहरों में शामिल करने वाली पी वैल्यू एनालिटिक्स की हालिया रिपोर्ट पर राज्य महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग ने आपत्ति जताई है। आयोगों ने स्पष्ट किया है कि यह सर्वे न तो किसी सरकारी संस्था और न ही महिला आयोगों द्वारा कराया गया है। यह सर्वे निजी कंपनी द्वारा मात्र 12,770 महिलाओं से CATI व CAPI तकनीक के माध्यम से टेलीफोनिक बातचीत कर तैयार किया गया, जिसमें देहरादून के लिए केवल 400 महिलाओं का सैंपल लिया गया।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
देहरादून पुलिस के अनुसार इतने छोटे सैंपल के आधार पर 9 लाख महिला आबादी वाले शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट तथ्यों से अधिक धारणाओं पर आधारित है। अगस्त माह में डायल 112 पर कुल 12,354 शिकायतें आईं, जिनमें महिलाओं से संबंधित शिकायतें केवल 18% थीं। इनमें से छेड़छाड़ से जुड़ी शिकायतें 1% से भी कम रहीं। महिला सुरक्षा मामलों में पुलिस का औसत रिस्पांस टाइम 13 मिनट दर्ज किया गया है।
देहरादून पुलिस ने बताया कि गौरा शक्ति एप पर अब तक 1.25 लाख रजिस्ट्रेशन हुए हैं, जिनमें से 16,649 अकेले देहरादून से हैं। इसके अलावा पिंक बूथ, महिला हेल्प डेस्क, महिला पेट्रोलिंग टीमें, वन स्टॉप सेंटर और 14,000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बना रहे हैं।
पुलिस का तर्क है कि देहरादून एक शिक्षा और पर्यटन केंद्र है, जहां हजारों बाहरी छात्र-छात्राएं और विदेशी पर्यटक सुरक्षित माहौल में निवास कर रहे हैं। ऐसे में शहर को असुरक्षित बताना वास्तविकता से परे है।
पुलिस ने कहा कि महिला सुरक्षा पर किए गए किसी भी सर्वे को नीतिगत दृष्टि से तभी महत्व दिया जा सकता है जब वह वैज्ञानिक और तथ्यपरक पद्धति पर आधारित हो।
देहरादून को देश के 10 असुरक्षित शहरों में शामिल करने वाली पी वैल्यू एनालिटिक्स की हालिया रिपोर्ट पर राज्य महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग ने आपत्ति जताई है। आयोगों ने स्पष्ट किया है कि यह सर्वे न तो किसी सरकारी संस्था और न ही महिला आयोगों द्वारा कराया गया है। यह सर्वे निजी कंपनी द्वारा मात्र 12,770 महिलाओं से CATI व CAPI तकनीक के माध्यम से टेलीफोनिक बातचीत कर तैयार किया गया, जिसमें देहरादून के लिए केवल 400 महिलाओं का सैंपल लिया गया।
देहरादून पुलिस के अनुसार इतने छोटे सैंपल के आधार पर 9 लाख महिला आबादी वाले शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट तथ्यों से अधिक धारणाओं पर आधारित है। अगस्त माह में डायल 112 पर कुल 12,354 शिकायतें आईं, जिनमें महिलाओं से संबंधित शिकायतें केवल 18% थीं। इनमें से छेड़छाड़ से जुड़ी शिकायतें 1% से भी कम रहीं। महिला सुरक्षा मामलों में पुलिस का औसत रिस्पांस टाइम 13 मिनट दर्ज किया गया है।
देहरादून पुलिस ने बताया कि गौरा शक्ति एप पर अब तक 1.25 लाख रजिस्ट्रेशन हुए हैं, जिनमें से 16,649 अकेले देहरादून से हैं। इसके अलावा पिंक बूथ, महिला हेल्प डेस्क, महिला पेट्रोलिंग टीमें, वन स्टॉप सेंटर और 14,000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बना रहे हैं।
पुलिस का तर्क है कि देहरादून एक शिक्षा और पर्यटन केंद्र है, जहां हजारों बाहरी छात्र-छात्राएं और विदेशी पर्यटक सुरक्षित माहौल में निवास कर रहे हैं। ऐसे में शहर को असुरक्षित बताना वास्तविकता से परे है।
पुलिस ने कहा कि महिला सुरक्षा पर किए गए किसी भी सर्वे को नीतिगत दृष्टि से तभी महत्व दिया जा सकता है जब वह वैज्ञानिक और तथ्यपरक पद्धति पर आधारित हो।
क्या छपा था?
मीडिया रिपोर्टों का सारांश
- देहरादून टॉप-10 असुरक्षित शहरों में छपा था?
- NARI-2025 रिपोर्ट के अनुसार, देहरादून को देश के 10 सबसे असुरक्षित शहरों की सूची में रखा गया।
- सर्वे में पाया गया कि
- दिन में 70% महिलाएं सुरक्षित महसूस करती हैं, पर रात में यह घटकर 44% रह जाता है।
- केवल 50% महिलाएं शहर को सुरक्षित मानती हैं, जबकि 10% ने इसे असुरक्षित बताया।
- सार्वजनिक परिवहन में 50% तक महिलाओं ने उत्पीड़न का अनुभव बताया।
- महिला सुरक्षा पर धारणा आधारित रिपोर्ट
- रिपोर्ट में कहा गया कि देहरादून की सुरक्षा स्कोर 60.6% रहा, जो राष्ट्रीय औसत से कम है।
- सर्वे 31 शहरों में 12,770 महिलाओं पर आधारित था।
- इसमें देहरादून से करीब 400 महिलाओं को शामिल किया गया।
- देहरादून पुलिस और राज्य महिला आयोग की प्रतिक्रिया
- पुलिस ने रिपोर्ट पर आपत्ति जताई और कहा कि यह धारणा आधारित है, अपराध के वास्तविक आँकड़ों पर नहीं।
- पुलिस ने महिला सुरक्षा के लिए किए गए कदम गिनाए — गौरा चीता, पिंक बूथ, SOS बटन, CCTV कैमरे, हेल्प डेस्क, आत्मरक्षा शिविर आदि।
- राज्य महिला आयोग ने भी कहा कि यह सर्वे किसी सरकारी एजेंसी का नहीं है बल्कि एक निजी कंपनी (पी वैल्यू एनालिटिक्स) का है।
- पुलिस ने कंपनी को नोटिस भेजा
- देहरादून पुलिस ने पी वैल्यू एनालिटिक्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया कि उन्होंने बिना अनुमति इस तरह का सर्वे और प्रकाशन कैसे किया।
खबर में यह छपा कि देहरादून महिलाओं की सुरक्षा के मामले में टॉप-10 असुरक्षित शहरों में है, लेकिन स्थानीय पुलिस और महिला आयोग ने इस रिपोर्ट को नकारते हुए इसे अवैज्ञानिक और भ्रमित करने वाला बताया।




