भू माफिया के खिलाफ नगर निगम का बड़ा एक्शन?अतिक्रमण हटाकर खाली कराई करोड़ों की बेशकीमती भूमि?लैंड जिहाद के खिलाफ शहरमें जारी रहेगी कार्रवाईः महापौर

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भू माफिया के खिलाफ नगर निगम का बड़ा एक्शन

।✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

  • अतिक्रमण हटाकर खाली कराई करोड़ों की बेशकीमती भूमि
  • लैंड जिहाद के खिलाफ शहरमें जारी रहेगी कार्रवाईः महापौर

रुद्रपुर। महापौर विकास शर्मा के निर्देश पर नगर निगम की टीम ने शनिवार को किच्छा रोड हाईवे पर करीब दो एकड़ बेशकीमती जमीन से अतिक्रमण हटाकर भूमि को कब्जे में ले लिया। लाव लस्कर के साथ पहुंची नगर निगम की टीम ने निर्माण सामग्री समेत अतिक्रमणकारियों का सामान भी जब्त कर लिया। नगर निगम की इस सख्त कार्रवाई से इलाके में हड़कम्प मचा रहा। अतिक्रमण हटाने के बाद महापौर विकास शर्मा ने कहा कि लैंड जिहाद के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगा।

बता दें किच्छा रोड हाईवे पर कल्याणी नदी के पुल के पास कुछ अतिक्रमणकारी मंदिर की आड़ में वर्षों से बेशकीमती नजूल भूमि पर कब्जा जमाये बैठे थे, अतिक्रमणकारियों ने खुद तो इस भूमि पर कब्जा किया ही साथ ही अन्य लोगों को भी गुमराह करके यह जमीन बेच दी। यह मामला न्यायालय में भी चला। न्यायालय में चली लंबी कानूनी लड़ाई में आखिरकार फैसला नगर निगम के पक्ष में आया।

न्यायालय से फैसला नगर निगम के पक्ष में आने के बाद महापौर नगर निगम के अधिकारियों को शीघ्र भूमि को खाली कराने के निर्देश दिये। जिसके बाद शनिवार को नगर आयुक्त नरेश दुर्गापाल, नगर निगम की टीम, पुलिस बल और जेसीबी के साथ मौके पर पहुंचे और अतिक्रमण कारियों द्वारा किये गये अवैध पक्के निर्माण को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान मौके से अतिक्रमणकारियों का सामान भी जब्त किया गया। अतिक्रमण हटाने के दौरान मौके पर मौजूद मंदिर को फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है।

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान महापौर विकास शर्मा ने खुद भी मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया अपनी देखरेख में भूमि पर कब्जे की कार्रवाई सम्पन्न कराई। अतिक्रमण हटाने के बाद नगर निगम की टीम ने पिलर लगाकर करीब दो एकड़ भूमि को कवर कर लिया है।

इस दौरान महापौर विकास शर्मा ने कहा कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार प्रदेश भर में चल रहे ‘लैंड जिहाद’ विरोधी अभियान का हिस्सा है। जो लोग वर्षों से सरकारी जमीन पर कब्जा जमाए बैठे थे, उन्होंने न केवल सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया, बल्कि भोले-भाले लोगों को भी गुमराह किया। अब ऐसे किसी भी अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएग। जिस तरह से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरे प्रदेश में लैंड जिहाद के खिलाफ अभियान शुरू किया है उसी के तहत रूद्रपुर में भी लैंड जिहाद के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गयी है यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

महापौर ने कहा कि किच्छा रोड हाईवे पर स्थित नगर निगम की इस बेशकीमती भूमि पर पिछले कई वर्षों से भू माफिया कब्जा जमाकर बैठे हुए थे,भूमाफियाओं ने कुछ जमीन दूसरों को गुमराह करके बेच भी दी थी और न्यायालय को भी इस मामले में लगातार गुमराह किया जा रहा था, नगर निगम ने भू माफिया के खिलाफ न्यायालय में मजबूत पैरवी की और आखिरकार माननीय न्यायालय ने नगरनिगम के पक्ष में फैसला सुनाया। महापौर ने कहा कि शहर में इसी तरह कई अन्य जगहों पर भी सरकारी पर भू माफिया कब्जा जमाकर बैठे हैं, इनके खिलाफ भी शीघ्र एक्शन लिया जायेगा। महापौर ने अतिक्रमणकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि वह जल्द से जल्द सरकारी जमीन खाली कर दें अन्यथा नगर निगम प्रशासन अपनी जमीन तो खाली करायेगा ही साथ ही अतिक्रमणकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जायेगी। महापौर ने कहा कि आज जो भूमि अतिक्रमण मुक्त कराई गयी है उसे जल्द ही बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव लाकर और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में जन कल्याणकारी कार्य के लिए उपयोग में लाया जायेगा।

इस दौरान नगर आयुक्त नरेश दुर्गापाल ने कहा कि किच्छा रोड पर अतिक्रमण करके कब्जाई गयी जमीन को खाली कराने के लिए लम्बे समय से प्रयास किये जा रहे थे, भू माफिया इतना शातिर था कि वह एक तरफ न्यायालय को गुमराह करके स्टे ले चुका था और दूसरी तरफ लोगों को गुमराह करके जमीन का कुछ हिस्सा बेच भी चुका था। हाल ही में इस भू माफिया के खिलाफ प्रशासन जिला बदर की कार्रवाई भी कर चुका है। भूमाफिया के कारनामों से माननीय न्यायालय को अवगत कराने के साथ ही सारे तथ्य मजबूती के रखे गये, जिसके बाद न्यायालय ने स्टे खारिज करके नगर निगम के हित में फैसला सुनाया और आखिरकार करोड़ों की भूमि आज नगर निगम के कब्जे में आ गयी। नगर आयुक्त ने कहा कि नजूल भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नगर आयुक्त ने कहा कि चाहे कोई कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, अवैध कब्जा और अतिक्रमण को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कब्जे की कार्रवाई के दौरान अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय ने भी स्थलीय निरीक्षण किया और कार्रवाई की सराहना की। इस दौरान उन्होंने कहा कि करोड़ों की जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त किया जाना नगर निगम प्रशासन की बहुत बड़ी सफलता है। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण के खिलाफ की जा रही कार्रवाई में जिला प्रशासन नगर निगम के साथ खड़ा है, जहां भी इस तरह के अतिक्रमण किये गये हैं, उन्हें भी जल्द खाली कराया जायेगा। अतिक्रमण हटाने के दौरान तहसीलदार दिनेश कुमार समेत नगर निगम टीम और पुलिस फोर्स मौजूद रही

संपादकीय रुद्रपुर: न्याय सबके लिए, न कि सिर्फ गरीबों के लिए रुद्रपुर की दो हालिया घटनाएं हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या कानून और न्याय वास्तव में सबके लिए बराबर है, या फिर यहां भी उसका चेहरा रसूख और सत्ता देखकर बदल जाता है।

पहला उदाहरण किच्छा रोड हाईवे पर नगर निगम की कार्रवाई का है। महापौर विकास शर्मा के नेतृत्व में नगर निगम ने वर्षों से कब्जाई गई करोड़ों की नजूल भूमि को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराया। अदालत से फैसला नगर निगम के पक्ष में आने के बाद जेसीबी चली, कब्जे हटे और भूमाफिया को कड़ा संदेश गया कि अब लैंड जिहाद या किसी भी नाम पर कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई निश्चित ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सख्त नीति और स्थानीय प्रशासन की तत्परता का प्रमाण है। इससे जनता का विश्वास जागता है कि सरकारी संपत्ति सुरक्षित है और भविष्य में यह जनकल्याण के काम आ सकती है।

लेकिन दूसरी तरफ, ग्रीन बेल्ट और काशीपुर बायपास जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की तस्वीर बिल्कुल उलट है। यहां हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद रसूखदार कार बाजार और शोरूम मालिकों के खिलाफ कार्रवाई आज तक ठंडी पड़ी है। यही वह दोहरा रवैया है, जो रुद्रपुर की न्याय व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़ा करता है। गरीब मजदूर की झुग्गी तो एक दिन में ढहा दी जाती है, लेकिन रसूखदारों की अवैध इमारतें सालों तक प्रशासन की छत्रछाया में फलती-फूलती रहती हैं।

अगर किच्छा रोड पर बैठे अतिक्रमणकारी भू-माफिया हैं, तो फिर ग्रीन बेल्ट पर कब्जा जमाने वाले भी भू-माफिया ही हैं। कानून के दायरे में दोनों बराबर होने चाहिए। एक जगह तो नगर निगम अदालत के आदेश का पालन कर दिखाता है, लेकिन दूसरी जगह वही अदालत का आदेश रसूखदारों के दबाव में धरा रह जाता है। यह दोहरा न्याय न सिर्फ रुद्रपुर, बल्कि उत्तराखंड राज्य की मूल परिकल्पना के भी विपरीत है।

रुद्रपुर की जनता चाहती है कि हर इंच भूमि पर जनता का अधिकार हो, न कि सत्ता और पैसे के गठजोड़ का। अगर वाकई रुद्रपुर को स्मार्ट सिटी बनाना है और उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना को सार्थक करना है, तो जिला प्रशासन, नगर निगम और सत्ताधारी नेताओं को इस पक्षपातपूर्ण रवैये से बाहर आना होगा। ग्रीन बेल्ट पर भी उसी तरह बुलडोजर चलना चाहिए जैसे किच्छा रोड की जमीन पर चला। तभी जनता का विश्वास शासन-प्रशासन में टिकेगा।

अन्यथा, यह संदेश जाएगा कि कानून गरीबों के लिए कठोर है और अमीरों-रसूखदारों के लिए महज औपचारिकता। लोकतंत्र में यह असमानता लंबे समय तक नहीं टिक सकती। 2027 में जनता उसी स्मार्ट तरीके से अपना जवाब देगी।


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