100 दिन तक चलेगा बंगाली समाज का धरना, सुब्रत राय बोले—समाज को राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया गया, अब अधिकार लेकर रहेंगे

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रुद्रपुर। उत्तराखंड में बंगाली समाज के सामाजिक न्याय, संवैधानिक अधिकारों और समान अवसरों की मांग को लेकर चल रहा धरना-प्रदर्शन अब और अधिक व्यापक रूप लेने जा रहा है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सुब्रत राय ने घोषणा की है कि यह आंदोलन पूरे 100 दिनों तक लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक धरना नहीं, बल्कि बंगाली समाज के सम्मान, पहचान और अधिकारों की लड़ाई है, जिसे किसी भी कीमत पर अधूरा नहीं छोड़ा जाएगा।
धरना स्थल पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए सुब्रत राय ने सत्ताधारी दल से जुड़े बंगाली नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वर्षों से बंगाली समाज राजनीतिक दलों के लिए केवल वोट बैंक बनकर रह गया है। चुनाव के समय समाज के बीच बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद समाज की समस्याओं को भुला दिया जाता है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


सुब्रत राय ने कहा कि यदि सत्ता में बैठे बंगाली नेताओं ने ईमानदारी से समाज की आवाज उठाई होती तो आज हजारों लोगों को सड़क पर बैठकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं ने अपने व्यक्तिगत राजनीतिक हितों को समाज के हितों से ऊपर रखा, जिसके कारण आज भी बंगाली समाज सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों के लिए आंदोलन करने को मजबूर है।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि व्यवस्था का ध्यान उन समस्याओं की ओर आकर्षित करने का प्रयास है, जो वर्षों से लंबित हैं। समाज केवल संविधान में मिले अधिकारों का समान रूप से क्रियान्वयन चाहता है।
सुब्रत राय ने कहा कि पश्चिम बंगाल, ओडिशा, त्रिपुरा सहित कई राज्यों में जिन समुदायों को अनुसूचित जाति से जुड़े संवैधानिक लाभ प्राप्त हैं, उन्हीं सामाजिक पृष्ठभूमि के लोग अन्य राज्यों में उन अधिकारों से वंचित हैं। यह स्थिति सामाजिक न्याय की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से पूरे देश में इस विषय पर एक समान नीति बनाने की मांग की।
उन्होंने बताया कि आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन भी भेजा जा रहा है, जिसमें मांग की गई है कि बंगाली समाज की सामाजिक एवं संवैधानिक स्थिति का अध्ययन करने के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए। साथ ही उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों में निवासरत बंगाली समाज की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति का सर्वे कराया जाए तथा समाज के विद्यार्थियों और युवाओं को समान अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि बंगाली समाज का देश की स्वतंत्रता, राष्ट्र निर्माण, शिक्षा, साहित्य, विज्ञान, संस्कृति, सेना और प्रशासनिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान रहा है। इसके बावजूद समाज का एक बड़ा वर्ग आज भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। यह स्थिति बदलने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए।
सुब्रत राय ने कहा कि धरना पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और संविधान के दायरे में रहकर चलाया जाएगा। आंदोलन के दौरान किसी प्रकार की हिंसा या कानून व्यवस्था प्रभावित करने जैसी गतिविधि नहीं होगी। उन्होंने कहा कि समाज लोकतंत्र में विश्वास रखता है और संवैधानिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार ने समय रहते सकारात्मक पहल नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। समाज के युवा, महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक बड़ी संख्या में इस आंदोलन से जुड़ेंगे और पूरे प्रदेश में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।
धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने कहा कि बंगाली समाज किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहा, बल्कि समान अधिकार और न्याय चाहता है। आंदोलनकारियों ने केंद्र सरकार से बंगाली समाज के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता शुरू करने तथा उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने बांग्ला भाषा के संरक्षण और संवर्धन की मांग भी दोहराई। उनका कहना था कि जहां बंगाली समाज की पर्याप्त आबादी है, वहां विद्यालयों में बांग्ला भाषा की पढ़ाई और शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रह सकें।
सभा में वक्ताओं ने यह भी कहा कि उत्तराखंड में बंगाली समाज लंबे समय से सामाजिक न्याय से जुड़ी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहा है। सरकार को वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस विषय पर ठोस निर्णय लेकर समाज में विश्वास का वातावरण बनाना चाहिए।
सुब्रत राय ने कहा कि आंदोलन के दौरान समाज के लोग शांतिपूर्वक धरना देंगे, जनप्रतिनिधियों से मिलेंगे और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाएंगे। उन्होंने सभी सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और युवाओं से इस अभियान में सहयोग करने की अपील की।
उन्होंने अंत में कहा, “यह लड़ाई किसी सरकार को गिराने या किसी दल का विरोध करने की नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और सम्मान की है। जब तक हमारी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाएगा, तब तक यह धरना लगातार 100 दिनों तक चलेगा। हमें विश्वास है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण संघर्ष की आवाज अवश्य सुनी जाएगी।”
धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने भी एक स्वर में कहा कि वे अंतिम दिन तक आंदोलन में डटे रहेंगे और सामाजिक न्याय की लड़ाई को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाते रहेंगे।


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