22 September 2025 Panchang: पंचांग अनुसार 22 सितंबर को आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पूरे दिन रहेगी। अभिजीत मुहूर्त 11:49 ए एम से 12:38 पी एम तक रहेगा। तो वहीं राहुकाल 07:40 ए एम से 09:11 ए एम तक रहेगा।

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त्रिलोचन पनेरु कृष्णात्रेय रुद्रपुर उत्तराखंड।नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी सुबह 11:24 तक इसके बाद हस्त नक्षत्र लग जाएगा। सूर्य और चंद्र देव दोनों ही कन्या राशि में रहेंगे। जानिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त कब से कब तक रहने वाला है और इस दिन का पूरा पंचांग क्या है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

मान्यता है जो व्यक्ति व्रत रखकर मां दुर्गा की पूजा- अर्चना करता है, तो उसके सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही मां दुर्गा की पूजा करने से नवग्रह भी शांत रहते हैं। इस साल जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा शारदीय नवरात्र में गज यानी हाथी पर सवार होकर आएंगी। ज्योतिषियों की मानें तो मां दुर्गा का हाथी पर सवार होकर आना सुखप्रद रहने वाला है। इससे मानव जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने वाला है।आइए जानते हैं घट स्थापना का शुभ मुहूर्त, मंत्र और आरती…

पंचांग के मुताबिक 22 सितंबर को घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 09 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 05 मिनट है। वहीं दूसरा मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त में 11 बजकर 49 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 38 मिनट तक है। इन दोनों में से किसी भी मुहूर्त घटस्थापना कर सकते हैं।

कलश स्थापित करते समय इस मंत्र का करें जाप

ओम आ जिघ्र कलशं मह्या त्वा विशन्त्विन्दव:। पुनरूर्जा नि वर्तस्व सा नः सहस्रं धुक्ष्वोरुधारा पयस्वती पुनर्मा विशतादयिः।।

मां दुर्गा के इन मंत्रों का करें जाप

1. ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

2. या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

नवरात्रि कलश स्थापना मुहूर्त 2025 (Navratri Kalash Sthapana Shubh Muhurat 2025)

  • नवरात्रि कलश स्थापना शुभ मुहूर्त – 06:09 ए एम से 08:06 ए एम
  • घटस्थापना अभिजित मुहूर्त – 11:49 ए एम से 12:38 पी एम
  • प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – सितम्बर 22, 2025 को 01:23 ए एम बजे
  • प्रतिपदा तिथि समाप्त – सितम्बर 23, 2025 को 02:55 ए एम बजे

नवरात्रि चौघड़िया मुहूर्त 2025 (Navratri Choghadiya Muhurat 2025)

  • अमृत – सर्वोत्तम – 06:09 ए एम से 07:40 ए एम
  • शुभ – उत्तम – 09:11 ए एम से 10:43 ए एम
  • लाभ – उन्नति – 03:16 पी एम से 04:47 पी एम
  • अमृत – सर्वोत्तम – 04:47 पी एम से 06:18 पी एम
  • लाभ – उन्नति – 10:45 पी एम से 12:14 ए एम, सितम्बर 23काल रात्रि
  • शुभ – उत्तम – 01:43 ए एम से 03:12 ए एम, सितम्बर 23
  • अमृत – सर्वोत्तम – 03:12 ए एम से 04:41 ए एम, सितम्बर 23

22 सितंबर 2025 शुभ मुहूर्त (22 September 2025 Shubh Muhurat)

  • ब्रह्म मुहूर्त 04:35 ए एम से 05:22 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या 04:58 ए एम से 06:09 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त 11:49 ए एम से 12:38 पी एम
  • विजय मुहूर्त 02:15 पी एम से 03:03 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त 06:18 पी एम से 06:41 पी एम
  • सायाह्न सन्ध्या 06:18 पी एम से 07:29 पी एम
  • निशिता मुहूर्त 11:50 पी एम से 12:38 ए एम, सितम्बर 23

22 सितंबर 2025 राहुकाल समय (22 September 2025 Rahukaal Time)

  • दिल्ली- सुबह 07:40 से सुबह 09:12 तक
  • मुंबई- सुबह 07:59 से सुबह 09:30 तक
  • चंडीगढ़- सुबह 07:42 से सुबह 09:13 तक
  • लखनऊ- सुबह 07:26 से सुबह 08:57 तक
  • भोपाल- सुबह 07:40 से सुबह 09:11 तक
  • कोलकाता- सुबह 06:56 से सुबह 08:27 तक
  • अहमदाबाद- सुबह 07:59 से सुबह 09:30 तक
  • चेन्नई- सुबह 07:29 से सुबह 09:00 तक

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

3. सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

4. नवार्ण मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’ का जाप अधिक से अधिक अवश्‍य करें।

5. पिण्डज प्रवरा चण्डकोपास्त्रुता।
प्रसीदम तनुते महिं चंद्रघण्टातिरुता।।
पिंडज प्रवररुधा चन्दकपास्कर्युत । प्रसिदं तनुते महयम चंद्रघंतेति विश्रुत।

दुर्गा जी की आरती- ॐ जय अम्बे गौरी…

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।

उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै ।

रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।

सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।

कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।

धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे ।

मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी ।

आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों ।

बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता,

भक्तन की दुख हरता । सुख संपति करता ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

भुजा चार अति शोभित, खडग खप्पर धारी ।

मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।

श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे ।

कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥

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ॐ जय अम्बे गौरी..॥

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।


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