जयपुर, जोधपुर स्थित पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि अगहन अमावस्या (मार्गशीर्ष अमावस्या) 19 और 20 नवंबर को पड़ रही है। तिथियों में परिवर्तन के कारण यह तिथि दो दिन रहेगी।
✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
भगवान कृष्ण ने मार्गशीर्ष माह के बारे में क्या कहा है?
मार्गशीर्ष माह को स्वयं भगवान कृष्ण का स्वरूप माना जाता है, जैसा कि भगवान ने भगवद्गीता में कहा है, “सभी महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ।” इससे इस माह की अमावस्या का महत्व और बढ़ जाता है। इस माह में प्रतिदिन भगवान कृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त मथुरा, वृंदावन, गोकुल, गोवर्धन पर्वत और बरसाना जाते हैं और यमुना नदी में स्नान करते हैं। मार्गशीर्ष अमावस्या पर भगवान कृष्ण की पूजा के साथ-साथ धूप-दीप भी अर्पित करना चाहिए और पितरों का ध्यान करना चाहिए। द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने स्वयं कहा था कि मार्गशीर्ष मास उनका ही स्वरूप है। इसलिए यह महीना भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए बेहद खास है।
ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास से जानें इसका महत्व
ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि अगहन अमावस्या का महत्व कार्तिक अमावस्या और दिवाली के समान ही है। इस तिथि पर किए गए धार्मिक कार्यों से भगवान विष्णु, भगवान कृष्ण और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह तिथि विशेष रूप से पितरों को समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि अमावस्या के दिन पितर पितृ लोक से अपने परिजनों के घर आते हैं। इसलिए इस दिन श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष है, उन्हें अमावस्या के दिन अपने पूर्वजों से संबंधित धार्मिक अनुष्ठान करने चाहिए। इस दिन गंगा, यमुना, नर्मदा और शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने का विधान है। जो लोग नदी में स्नान नहीं कर सकते, वे घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। इससे भी किसी पवित्र स्थान पर स्नान करने के समान पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन अपने आराध्य देव की पूजा करें। मंत्रों का जाप करें। अपनी क्षमतानुसार दान करें।
अमावस्या पर चंद्र पूजा विधि
ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि मार्गशीर्ष मास भगवान कृष्ण का प्रिय मास है, इसलिए इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए। पूजा के दौरान “क्रीं कृष्णाय नमः” मंत्र का जाप करें। बाल गोपाल का अभिषेक करें। तुलसी के साथ माखन-मिश्री का भोग लगाएं। अमावस्या पर चंद्र देव की पूजा करने की भी परंपरा है। इस दिन शिवलिंग पर विराजमान चंद्र देव की विशेष पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से कुंडली में चंद्र दोष का प्रभाव कम होता है। इस दिन देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करना भी शुभ होता है; ऐसा करने से घर में सुख, समृद्धि और शांति आती है।
इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें। पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए गाय, कुत्ते, कौवे, देवताओं आदि के लिए भोजन अलग रखना चाहिए। जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, कंबल, गुड़, घी, तिल, तिल के लड्डू या धन दान करें। पीपल के वृक्ष में भगवान विष्णु और पितरों का निवास माना जाता है। अगहन अमावस्या पर पीपल के वृक्ष पर कच्चा दूध और जल चढ़ाएँ। शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाएँ और परिक्रमा करें।
अमावस्या तिथि
ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि अमावस्या तिथि 19 नवंबर को सुबह 9:43 बजे से शुरू होकर 20 नवंबर को दोपहर 12:16 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार इस पर्व को मनाने वाले 20 नवंबर को स्नान-दान कर सकते हैं। जो लोग श्राद्ध और तर्पण जैसे पितृ कर्म करना चाहते हैं, वे 19 नवंबर की दोपहर को ये कर्म कर सकते हैं।
पितरों की शांति
ज्योतिषाचार्य एवं कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि अमावस्या तिथि विशेष रूप से पितरों को समर्पित है। इस दिन उनके निमित्त तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने से उन्हें शांति मिलती है और पितृदोष से मुक्ति मिलती है।
भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण का आशीर्वाद
ज्योतिषाचार्य एवं कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि मार्गशीर्ष माह भगवान कृष्ण का महीना माना जाता है। इस अमावस्या पर भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है। इसलिए व्रत के साथ-साथ भगवान सत्यनारायण की कथा भी अवश्य पढ़ें। इससे जीवन के सभी कष्ट दूर होंगे।
दान और स्नान का महत्व
ज्योतिषी एवं कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास बताते हैं कि इस दिन पवित्र नदियों गंगा, यमुना या किसी अन्य तीर्थस्थल पर स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि ऐसा करना संभव न हो, तो घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। कहा जाता है कि स्नान के बाद दान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इस दिन अन्न, वस्त्र और तिल का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। स्नान के बाद जरूरतमंदों को अनाज, धन, जूते और वस्त्र दान करने चाहिए। गौशाला में धन दान करें। गायों को हरी घास खिलाएँ। तालाब में मछलियों को आटे की गोलियां खिलाएँ।✧ धार्मिक और अध्यात्मिक
