डीडीहाट : जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान में हुआ चर्चित नाटक ‘बाघैंन’ का प्रभावशाली मंचन

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डीडीहाट। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) डीडीहाट में मंगलवार को भाव राग ताल नाट्य अकादेमी, पिथौरागढ़ की ओर से चर्चित नाटक ‘बाघैंन’ का मंचन किया गया। कथाकार नवीन जोशी की प्रसिद्ध कहानी पर आधारित इस नाटक का नाट्य रूपांतरण प्रीति रावत ने किया, जबकि निर्देशन की जिम्मेदारी अनुभवी रंगकर्मी कैलाश कुमार ने संभाली।

✍️ रिपोर्ट : अवतार सिंह बिष्ट
हिन्दुस्तान ग्लोबल टाइम्स /
रुद्रपुर, उत्तराखंड,उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी

नाटक “बाघैंन” पहाड़ के जनजीवन, पलायन की त्रासदी और विकास के नाम पर हो रहे सामाजिक-सांस्कृतिक विस्थापन को बेहद संवेदनशील और मर्मस्पर्शी अंदाज में दर्शाता है। यह एक ऐसे पूर्व सैनिक की कथा है, जिसका पूरा गांव पलायन की भेंट चढ़ जाता है और जो अकेला अपने गांव की यादों और जड़ों से जुड़े रहने की जिद में वहीं रह जाता है। नाटक पर्वतीय विकास के तथाकथित मॉडल पर तीखी टिप्पणी करता है और दर्शकों को आत्ममंथन के लिए मजबूर करता है।

मंचन के पश्चात संस्थान के प्राचार्य श्री भास्करानंद पांडे ने कहा कि नाटक के माध्यम से समाज में हो रहे सांस्कृतिक और पर्यावरणीय बदलावों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने भाव राग ताल नाट्य अकादेमी के कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रस्तुतियां प्रशिक्षुओं के व्यक्तित्व विकास और सामाजिक संवेदनशीलता को गहराई देती हैं।

पूर्व में इस नाटक का मंचन कोलकाता, प्रयागराज, दिल्ली, हल्द्वानी, खटीमा और पिथौरागढ़ सहित अनेक शहरों में किया जा चुका है, जहां इसे दर्शकों से अपार सराहना मिली।

भाव राग ताल नाट्य अकादेमी, पिथौरागढ़, विगत 12 वर्षों से लोक कला, साहित्य और रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय है और अपने कार्यों के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर रही है।

नाट्य प्रस्तुति “बाघैंन” में मंच पर सुनील उप्रेती, दीपक मण्डल, धीरज कुमार, अभिषेक पटेल, राजेश सामंत, शुभम कुमार, दिनेश कुमार, पंकज, सुजल धामी, विशाल, प्रीति रावत, साक्षी तिवारी और सपना ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया। कलाकारों के अभिनय, भाव-भंगिमा और संवाद अदायगी को दर्शकों ने लंबे समय तक तालियों से सराहा।

इस अवसर पर संस्थान के प्रशिक्षुओं के साथ-साथ स्थानीय पत्रकार संजू पंत, डॉ. रेनू कार्की, दीपक कन्याल, भावना कन्याल, अजय अवस्थी, और जया वर्मा सहित अनेक कला-प्रेमी उपस्थित रहे।

संपादकीय टिप्पणी:
‘बाघैंन’ केवल एक नाटक नहीं, बल्कि उत्तराखंड के गांवों की मौन चीख है। यह उस पीढ़ी की वेदना का प्रतीक है जो विकास के शोर में अपनी जड़ों से कटती जा रही है। भाव राग ताल नाट्य अकादेमी जैसे समूह जब लोकसंस्कृति को नाट्य मंच पर जीवंत करते हैं, तो वे केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का निर्माण कर रहे होते हैं। इस प्रकार की प्रस्तुतियां आज के युवाओं और शिक्षार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं — जो अपने समाज, अपने पर्यावरण और अपनी मिट्टी से जुड़ाव की नई परिभाषा गढ़ सकती हैं।


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