हिंदू धर्म के अनुसार, इस संसार में जन्म लेने वाला हर प्राणी नश्वर है. जिसका जन्म हुआ है, उसकी मृत्यु निश्चित है. यह एक ऐसा सत्य है जिसे कोई टाल नहीं सकता. गरुड़ पुराण हिंदू धर्म का एक प्रमुख ग्रंथ है, जो जीवन, मृत्यु और मृत्यु के बाद की यात्रा से जुड़ी रहस्यमयी बातों को विस्तार से समझाता है.

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इस ग्रंथ में भगवान विष्णु अपने वाहन गरुड़ को बताते हैं कि मृत्यु के समय आत्मा शरीर से कैसे निकलती है और मृत्यु के बाद उसे अपने कर्मों के आधार पर कौन-कौन से फल भोगने पड़ते हैं. गरुड़ पुराण में यह भी कहा गया है कि मृत्यु केवल शरीर की होती है, आत्मा की नहीं- क्योंकि आत्मा अजर-अमर और शाश्वत है. यही बात श्रीकृष्ण ने भगवद् गीता में भी कही है. आइए जानते हैं कि मृत्यु के बाद किन 9 अंगों से आत्मा निकलती और अपने गंतव्य तक कैसे पहुंचती है.

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

शरीर के नौ द्वार

गरुड़ पुराण के अनुसार, मानव शरीर में कुल नौ द्वार होते हैं, जिनसे मृत्यु के समय आत्मा बाहर निकलती है. ये द्वार हैं- दो आंखें, दो कान, दो नासिका (नाक के छिद्र), मुंह और दो उत्सर्जन द्वार (मल-मूत्र मार्ग).

किस द्वार से आत्मा का निकलना होता है शुभ या अशुभ

आंखों से आत्मा का निकलना- ऐसा तब होता है जब व्यक्ति को जीवन से गहरा लगाव होता है और वह अपने परिवार के प्रति अत्यधिक भावनात्मक होता है.

नाक से आत्मा का निकलना- इसे अत्यंत शुभ माना गया है. यह संकेत देता है कि व्यक्ति ने अपने जीवन में धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर चलकर पुण्य कमाया है.

मुख से आत्मा का निकलना- इसे भी शुभ माना गया है. यह दर्शाता है कि व्यक्ति ने धार्मिक आचरण और सत्य के मार्ग पर जीवन व्यतीत किया.

उत्सर्जन द्वार से आत्मा का निकलना- इसे अशुभ माना जाता है. गरुड़ पुराण के अनुसार, जो लोग जीवनभर केवल धन, भोग और लोभ में लिप्त रहते हैं, उनकी आत्मा इसी मार्ग से बाहर निकलती है.

मृत्यु के बाद की यात्रा

गरुड़ पुराण यह भी बताता है कि मृत्यु के बाद आत्मा अपने कर्मों के अनुसार नई यात्रा पर निकलती है. जिनका जीवन पुण्य से भरा होता है, उन्हें शुभ लोक की प्राप्ति होती है, जबकि पाप कर्म वाले प्राणी को विभिन्न यातनाओं का अनुभव करना पड़ता है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स इसकी पुष्टि नहीं करता है.)✧ धार्मिक और अध्यात्मिक


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