दिल्ली ब्लास्ट के बाद ‘डॉक्टर्स ऑफ टेरर’ की कुंडली खंगाली जा रही है. एक के बाद एक नए चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से कथित संबंधों के आरोप में गिरफ्तार डॉक्टर आदिल अहमद राथर की परत दर परत खुलती जा रही है.

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अब जांच एजेंसियों ने खुलासा किया है कि किस तरह आदिल का प्लान था डॉक्टरों को फंसाने का. इतना ही नहीं, कुछ डॉक्टर तो उसके चंगुल में फंस भी चुके थे. सूत्रों के मुताबिक, आदिल पूरे एक साल 2023 से 2024 के बीच लापता रहा था. वह किसी के भी संपर्क में नहीं था. घरवालों को भी उसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी. ऐसे में उसने क्या खौफनाक जाल बिछाने की साजिश रची आइए जानते हैं.

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

6 नवंबर को जम्मू-कश्मीर पुलिस और एसटीएफ डॉ. अदील को अरेस्ट कर ले गई थी. पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए. सूत्रों के अनुसार, पता चला कि अनंतनाग में पढ़ाई और जॉब के दौरान ही उसकी गतिविधि संदिग्ध थी. वह अपने पास एक पिस्टल रखता था. इस पिस्टल को देखकर ही मौलवी इरफान ने उससे बात की. फिर जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन का सदस्य बना दिया. इसके बाद उसने डॉक्टरों को फंसाने के लिए एक बड़ा प्लान बनाया.

वह डॉक्टरों को ब्लैकमेल करने के लिए हनीट्रैप की तैयारी कर रहा था. इस बात का आदिल के मोबाइल से लगा. जांच एजेंसियों को उसके मोबाइल में कई कश्मीरी लड़कियों की फोटो मिली है. यहां तक कि आशंका जताई जा रही है कि कुछ डॉक्टर और अन्य लोग इस हनीट्रैप का शिकार बन चुके थे. गिरफ्तार आंतकी का मकसद हनीट्रैप के जरिए फंसाए गए लोगों की मदद से सहारनपुर को सेफ ठिकाना बनाना था. उसके मोबाइल से देर रात तक चैटिंग होती थी.

अब जांच एजेंसी इस बात को पता लगाने में जुट गई है कि वो डॉक्टर्स कौन हैं, जिन्हें कश्मीरी लड़कियों की मदद से हनीट्रैप में फंसा रखा था. वहीं, इन कश्मीरी लड़कियों का भी पता लगाने की कोशिश की जाएगी. डॉ. आदिल से अभी जम्मू-कश्मीर की स्पेशल सेल और पुलिस पूछताछ कर रही है. ये जांच एजेंसियां जांच पूरी होने के बाद अपनी रिपोर्ट NIA को सौंपेगे. फिर NIA पकड़े गए सभी लोगों से पूछताछ करेगी. कानपुर, सहारनपुर, हरियाणा से पकड़े गए लोगों को जम्मू-कश्मीर में अलग-अलग कमरों में रखा गया है, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है.

गौरतलब है, डॉक्टर आदिल अहमद जम्मू कश्मीर के कुलगाम जिले के वानपुरा का रहने वाला है. श्रीनगर मेडिकल कॉलेज से उसने MBBS की पढ़ाई की है. इसके बाद वह अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज में रेजिडेंट डॉक्टर के तौर पर नौकरी करने लगा. हालांकि वर्ष 2024 में अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज से इस्तीफा दे दिया और सहारनपुर आ गया. तब से वह सहारनपुर के अलग अलग निजी अस्पतालों में नौकरी करता रहा. फिलहाल वह फेमस मेडिकेयर अस्पताल में नौकरी कर रहा था.


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