

सितारगंज (उधम सिंह नगर)। विदेश जाने का सपना दिखाकर एक महिला से 17 लाख 50 हजार रुपये की ठगी का गंभीर मामला सामने आया है। इस संगठित ठगी में पिता, पुत्र, पुत्रवधू समेत पांच लोगों के शामिल होने का आरोप है। पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
ग्राम पंडरी निवासी अमनजहां पुत्री रिजवान अली ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि ग्राम उड़ला, थाना अमरिया (जनपद पीलीभीत) निवासी करणदीप सिंह पुत्र गुरतेज सिंह ने सितारगंज में एचडीएफसी बैंक, रामश्याम इंडस्ट्रीज के पास “केडी इमिग्रेशन” के नाम से कार्यालय खोल रखा था। करणदीप लोगों को यूके भेजने का झांसा देकर मोटी रकम वसूलता था। विदेश जाने की इच्छुक अमनजहां से संपर्क होने पर आरोपी ने उसे यूके भेजने का भरोसा दिलाया।
पीड़िता ने विभिन्न किस्तों में चेक और नकद के माध्यम से कुल 17 लाख 50 हजार रुपये करणदीप को सौंप दिए। लेकिन धोखे से उसे यूके की बजाय तुर्की भेज दिया गया। तुर्की पहुंचते ही पीड़िता हालात के जाल में फंस गई, जहां उसे भारी संकटों का सामना करना पड़ा और जेल जाने तक की नौबत आ गई। किसी तरह अपने खर्च पर वह भारत वापस लौट सकी।
भारत लौटने के बाद जब पीड़िता ने आरोपी से अपने पैसे वापस मांगे तो रकम लौटाने के बजाय उसे जान से मारने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकियां दी जाने लगीं। पीड़िता का आरोप है कि इस पूरे गिरोह में करणदीप की पत्नी इकनीत कौर, उसके पार्टनर अभय सिंह और इंद्रजीत कौर भी सक्रिय रूप से शामिल हैं। पैसा मांगने पर इंद्रजीत कौर द्वारा झूठे केस में फंसाने की धमकी दी गई। वहीं करणदीप सिंह राजनीतिक पहुंच का हवाला देकर पीड़िता को डराता रहा। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि करणदीप का पिता गुरतेज सिंह भी इस कबूतरबाजी के नेटवर्क में शामिल है।
पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर करणदीप सिंह, इकनीत कौर, अभय सिंह, इंद्रजीत कौर और गुरतेज सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया है। फिलहाल पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।
संपादकीय :यह मामला केवल एक महिला से ठगी का नहीं, बल्कि उत्तराखंड और तराई क्षेत्रों में सक्रिय फर्जी इमीग्रेशन एजेंटों के बढ़ते नेटवर्क की भयावह तस्वीर पेश करता है। विदेश भेजने के नाम पर युवाओं और महिलाओं से लाखों रुपये ऐंठने वाले ऐसे गिरोह न केवल आर्थिक रूप से लोगों को तबाह कर रहे हैं, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संकट में भी डाल रहे हैं। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे फर्जी ट्रैवल और इमीग्रेशन दफ्तरों की नियमित जांच हो, लाइसेंस व्यवस्था सख्त की जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि कोई और परिवार इस तरह के धोखे का शिकार न बने।




